RBI का अनुमान: वित्त वर्ष 27 में भारत की GDP वृद्धि दर 6.7%, दुनिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था बनी रहेगी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त 2026 को मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों की घोषणा करते हुए कहा कि भारत वित्त वर्ष 2026-27 में 6.7% की GDP वृद्धि दर के साथ दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। यह अनुमान RBI के पिछले अनुमान 6.6% से 10 आधार अंक अधिक है, जो घरेलू आर्थिक मजबूती का संकेत देता है।
संशोधित विकास अनुमान की मुख्य वजहें
गवर्नर मल्होत्रा के अनुसार, मजबूत घरेलू मांग, मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र में निरंतर विस्तार तथा निर्यात में उल्लेखनीय प्रदर्शन ने अर्थव्यवस्था को गति दी है। पहली तिमाही के शुरुआती कॉर्पोरेट नतीजों ने भी मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सकारात्मक रुझान की पुष्टि की है। उच्च-आवृत्ति संकेतकों (हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स) के आधार पर पहली तिमाही की घरेलू आर्थिक गतिविधियाँ मजबूत बनी हुई हैं।
वैश्विक अनिश्चितताओं का असर
RBI गवर्नर ने स्वीकार किया कि जून 2026 के बाद से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण आपूर्ति पक्ष पर दबाव कुछ कम हुआ था। हालाँकि, जुलाई के पहले सप्ताह से टकराव के फिर भड़कने के कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) को लेकर अनिश्चितता फिर से उभरी है। मल्होत्रा ने दक्षिण-पश्चिम मानसून, अल नीनो, भू-राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक व्यापार नीति को प्रमुख जोखिम कारकों के रूप में गिनाया।
महंगाई का परिदृश्य
RBI गवर्नर के अनुसार, हेडलाइन महंगाई दर के बढ़ने का अनुमान है, जिसकी मुख्य वजह खाद्य वस्तुओं और ईंधन की आपूर्ति से जुड़े दबाव हैं। हालाँकि, मुख्य महंगाई दर (कोर इन्फ्लेशन) सामान्य बनी हुई है और तीसरी तिमाही में अपने उच्चतम स्तर पर पहुँचने के बाद कम होने की उम्मीद है। मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि कोई भी नीतिगत कदम उठाने से पहले महंगाई की दिशा और उसके घटकों पर अधिक स्पष्टता ज़रूरी है।
आगे की राह
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच RBI का यह संशोधित अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी मंदी की आशंकाओं और पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक बाज़ारों को अस्थिर किया हुआ है। आने वाली तिमाहियों में मानसून की प्रगति और वैश्विक ऊर्जा कीमतों की चाल यह तय करेगी कि भारत इस विकास पथ पर कितनी मजबूती से आगे बढ़ पाता है।