नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी पर संजय राउत का BJP पर हमला, बोले- 'डर के कारण पुराने केस में फँसाया'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने 20 सितंबर 2026 को नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की न्यायिक हिरासत और दिल्ली में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 31 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर कड़ा हमला बोला। राउत ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल चुनावी प्रतिस्पर्धा से घबराकर विपक्षी उम्मीदवारों को पुराने मामलों में फँसा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
19 सितंबर 2026 को नंदीग्राम निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इसके ठीक एक दिन बाद, 20 सितंबर को पुलिस ने रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार शफीउल इस्लाम को भी एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया। कथित तौर पर दोनों मामलों में वर्षों पुराने मुकदमों का सहारा लिया गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब नंदीग्राम उपचुनाव का मतदान निकट है और विपक्ष पहले से ही चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा था।
संजय राउत की प्रतिक्रिया
राउत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'भाजपा क्या कहती है, इससे क्या फर्क पड़ता है? जिस तरह से नंदीग्राम से कांग्रेस के उम्मीदवार को गिरफ्तार किया गया है, यह कैसा न्याय है? आप डर गए, है ना? आप नंदीग्राम में डरे हुए हैं। इसीलिए आपने हमारे उम्मीदवार को 6-10 साल पुराने मामले में गिरफ्तार किया।' उनका यह बयान तत्काल चुनावी विमर्श का हिस्सा बन गया।
दिल्ली मतदाता सूची विवाद
राउत ने दिल्ली में SIR के दौरान 31 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी होने पर भी केंद्र सरकार को घेरा। उल्लेखनीय है कि इन नोटिसों की सूची में कथित तौर पर आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के नाम भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा, 'जहाँ बड़ी पार्टियों के चुनाव चिह्न चोरी हो जाते हैं और पूरी की पूरी पार्टियाँ चोरी हो जाती हैं, वहाँ अगर किसी का नाम वोटर लिस्ट से गायब हो जाए तो किसी को हैरान नहीं होना चाहिए। केजरीवाल जी का नाम गायब है। महाराष्ट्र और पूरे देश में हजारों, लाखों और करोड़ों लोगों के नाम गायब हो जाते हैं। यह सरकार कुछ भी कर सकती है।'
विपक्ष का व्यापक आरोप
राउत का आरोप है कि केंद्र सरकार मतदाता सूची में हेरफेर कर 'चुनिंदा मतदाताओं' को ही मताधिकार देना चाहती है। उन्होंने कहा कि 'वे दिखाना चाहते हैं कि केवल वही वोट करेंगे जिन्हें वे चाहते हैं, और जिन्हें वे नहीं चाहते, वे वोट नहीं करेंगे — यह सरकार की नीति है।' गौरतलब है कि BJP ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आगे क्या
नंदीग्राम उपचुनाव में मिलन प्रधान की न्यायिक हिरासत का मामला अदालत में विचाराधीन है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की माँग करते हुए उम्मीदवारों की गिरफ्तारी को 'लोकतंत्र पर हमला' बताया है। दिल्ली में मतदाता सूची पुनरीक्षण का मामला भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आने की संभावना है।