20 सितंबर 2026
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पीएमके की माँग: कुड्डालोर में सिपकॉट और एनएलसी के लिए 1,277 एकड़ अधिग्रहण रद्द करे तमिलनाडु सरकार

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पीएमके की माँग: कुड्डालोर में सिपकॉट और एनएलसी के लिए 1,277 एकड़ अधिग्रहण रद्द करे तमिलनाडु सरकार

सारांश

पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने कुड्डालोर में सिपकॉट और एनएलसी के लिए 1,277 एकड़ के प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को रद्द करने की माँग की है। उनका कहना है कि इससे 100 से अधिक परिवार बेघर होंगे, उपजाऊ खेती नष्ट होगी और पहले से प्रदूषित जिले को और नुकसान पहुँचेगा।

मुख्य बातें

पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने 20 सितंबर 2026 को तमिलनाडु सरकार से 1,277 एकड़ के भूमि अधिग्रहण नोटिफिकेशन वापस लेने की माँग की।
नए सिपकॉट कॉम्प्लेक्स के लिए 1,097 एकड़ के अतिरिक्त 164.20 एकड़ का नया नोटिफिकेशन जारी किया गया; कुल प्रस्तावित परिसर 1,283 एकड़ ।
मौजूदा एस्टेट से जोड़ने पर कुड्डालोर में कुल 3,908 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र बनेगा।
एनएलसी विस्तार के लिए 145 आवासीय प्लॉट अधिग्रहित होने की योजना; 100 से अधिक परिवार बेघर होने का अंदेशा।
कृषि भूमि से सालाना ₹10 लाख तक आय संभव, जबकि गाइडलाइन वैल्यू केवल ₹3.31 लाख प्रति एकड़ ।
पीएमके ने आंदोलन की चेतावनी दी; क्षेत्र में डाइऑक्सिन जैसे खतरनाक पदार्थों की मौजूदगी का आरोप।

पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) के नेता अंबुमणि रामदास ने 20 सितंबर 2026 को तमिलनाडु सरकार से कुड्डालोर जिले में प्रस्तावित नए सिपकॉट इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स और एनएलसी खदान विस्तार के लिए 1,277 एकड़ भूमि अधिग्रहण के नोटिफिकेशन वापस लेने की माँग की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह कदम नहीं उठाया, तो पीएमके प्रभावित निवासियों को एकजुट कर बड़े आंदोलन की राह लेगी।

नोटिफिकेशन और अधिग्रहण का विवरण

अंबुमणि रामदास के अनुसार, राज्य सरकार ने प्रस्तावित सिपकॉट कॉम्प्लेक्स के लिए पहले से अधिसूचित 1,097 एकड़ के अतिरिक्त थियागावली और कयालपट्टू गांवों में 164.20 एकड़ भूमि के लिए नया नोटिफिकेशन जारी किया है। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोग पहले के अधिग्रहण आदेश का लगातार विरोध कर रहे थे, इसी बीच नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया।

नया इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स 1,283 एकड़ में फैला होगा। मौजूदा 2,625 एकड़ के सिपकॉट एस्टेट के साथ जोड़ने पर कुड्डालोर जिले में कुल 3,908 एकड़ में औद्योगिक क्षेत्र हो जाएगा। पीएमके नेता ने इसे विकास नहीं, बल्कि पर्यावरणीय क्षति का विस्तार बताया।

एनएलसी खदान विस्तार और बेघर होने का खतरा

अंबुमणि ने एनएलसी की माइन-1 के विस्तार के लिए रिहायशी भूखंडों के प्रस्तावित अधिग्रहण का भी कड़ा विरोध किया। सरकार ने गंगईकोंडन गांव में 12.60 एकड़ में फैले 68 प्लॉट और वनथिरायपुरम में 3.21 एकड़ में फैले 77 प्लॉट अधिग्रहित करने की योजना की घोषणा की थी। पीएमके प्रमुख ने दावा किया कि यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ी, तो 100 से अधिक परिवार बेघर हो सकते हैं।

मुआवजा और बाज़ार भाव का अंतर

अंबुमणि रामदास ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कृषि भूमि उपजाऊ है और उससे सालाना ₹10 लाख तक की आय संभव है, जबकि कुछ इलाकों में गाइडलाइन वैल्यू केवल ₹3.31 लाख प्रति एकड़ तय की गई थी। उनका कहना है कि सरकार द्वारा दिया जाने वाला बढ़ा हुआ मुआवजा भी मौजूदा बाज़ार भाव से काफी कम होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भूमि का एक बड़ा हिस्सा पहले दो निजी कंपनियों ने किसानों से कम मूल्य पर खरीदा था और अब सरकार उसी ज़मीन को अधिग्रहित करने का प्रयास कर रही है, जो स्थानीय जनता को स्वीकार्य नहीं है।

पर्यावरणीय प्रदूषण के आरोप

पीएमके नेता ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सिपकॉट कॉम्प्लेक्स की रासायनिक फैक्टरियों से निकलने वाले बिना ट्रीट किए गए कचरे ने कुड्डालोर की मिट्टी, भूजल और वायु को पहले से ही प्रदूषित कर दिया है। उनके अनुसार, इस क्षेत्र में कैंसर उत्पन्न करने वाले डाइऑक्सिन जैसे खतरनाक पदार्थ पाए गए हैं। एनएलसी की खनन गतिविधियों से भी जिले भर की आबादी प्रभावित हो रही है।

आगे क्या होगा

अंबुमणि रामदास ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि यदि सिपकॉट और एनएलसी परियोजनाओं से जुड़े अधिग्रहण नोटिफिकेशन वापस नहीं लिए गए, तो पीएमके प्रभावित किसानों और निवासियों को संगठित कर एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा करेगी। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब तमिलनाडु में औद्योगीकरण बनाम कृषि भूमि संरक्षण की बहस पहले से तेज़ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो डीएमके सरकार की 'निवेश आकर्षित करो' नीति और स्थानीय जनता की 'ज़मीन बचाओ' भावना के बीच बनी हुई है। गौरतलब है कि कुड्डालोर पहले से ही देश के सर्वाधिक प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्रों में गिना जाता है, और यहाँ सिपकॉट का विस्तार बिना स्वतंत्र पर्यावरण समीक्षा के आगे बढ़ना सवाल खड़े करता है। मुआवजे की गाइडलाइन वैल्यू और बाज़ार भाव के बीच की खाई यह भी दर्शाती है कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के 'उचित मुआवजे' के प्रावधान ज़मीन पर कितने कमज़ोर साबित होते हैं। पीएमके की चेतावनी को महज़ राजनीतिक बयानबाज़ी मानना उचित नहीं होगा — यदि सरकार ने प्रभावित समुदायों से संवाद की जगह नोटिफिकेशन का रास्ता चुना, तो आंदोलन की ज़मीन पहले से तैयार है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमके ने किस भूमि अधिग्रहण का विरोध किया है?
पीएमके ने कुड्डालोर जिले में नए सिपकॉट इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स और एनएलसी माइन-1 विस्तार के लिए प्रस्तावित कुल 1,277 एकड़ भूमि अधिग्रहण का विरोध किया है। इसमें थियागावली और कयालपट्टू गांवों की 164.20 एकड़ नई अधिसूचित भूमि और आवासीय प्लॉट भी शामिल हैं।
कुड्डालोर में प्रस्तावित नया सिपकॉट कॉम्प्लेक्स कितना बड़ा होगा?
प्रस्तावित नया सिपकॉट कॉम्प्लेक्स 1,283 एकड़ में फैला होगा। मौजूदा 2,625 एकड़ के सिपकॉट एस्टेट के साथ जोड़ने पर कुड्डालोर में कुल 3,908 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र बन जाएगा।
एनएलसी विस्तार से कितने परिवार प्रभावित होंगे?
पीएमके नेता अंबुमणि रामदास के अनुसार, एनएलसी माइन-1 विस्तार के लिए गंगईकोंडन और वनथिरायपुरम में 145 आवासीय प्लॉट अधिग्रहित होने की योजना है, जिससे 100 से अधिक परिवार बेघर हो सकते हैं।
किसानों को मिलने वाला मुआवजा पर्याप्त क्यों नहीं माना जा रहा?
अंबुमणि रामदास के अनुसार, प्रस्तावित कृषि भूमि से सालाना ₹10 लाख तक की आय हो सकती है, लेकिन कुछ इलाकों में गाइडलाइन वैल्यू मात्र ₹3.31 लाख प्रति एकड़ तय है। उनका आरोप है कि बढ़ा हुआ सरकारी मुआवजा भी बाज़ार भाव से काफी कम होगा।
पीएमके ने पर्यावरण के बारे में क्या आरोप लगाए हैं?
पीएमके नेता ने आरोप लगाया है कि मौजूदा सिपकॉट कॉम्प्लेक्स की रासायनिक इकाइयों के अनुपचारित अपशिष्ट ने कुड्डालोर की मिट्टी, भूजल और वायु को पहले से प्रदूषित कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि इस क्षेत्र में कैंसरकारी डाइऑक्सिन जैसे खतरनाक पदार्थ पाए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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