को-ऑप्टेक्स के 10 स्टोर बंद करने पर अंबुमणि रामदास ने तमिलनाडु सरकार को चेताया, हजारों बुनकरों की आजीविका दांव पर
सारांश
मुख्य बातें
पट्टाली मक्कल काची (PMK) के नेता अंबुमणि रामदास ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को तमिलनाडु सरकार से को-ऑप्टेक्स के 10 शोरूम बंद करने के कथित फैसले को तत्काल वापस लेने की माँग की। उन्होंने आगाह किया कि यह कदम हजारों हथकरघा बुनकरों की आजीविका पर सीधा और गंभीर प्रहार करेगा।
कौन-से स्टोर बंद हो रहे हैं
अंबुमणि ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा की गई एक पोस्ट में बताया कि सरकार ने तमिलनाडु के कुड्डालोर, सेलम, वेल्लोर और तिरुनेलवेली समेत कई शहरों के अलावा आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थित को-ऑप्टेक्स आउटलेट्स को बंद करने का आदेश दिया है। उनके अनुसार, कुछ आउटलेट पहले ही बंद किए जा चुके हैं, कुछ में बिक्री रोक दी गई है, और शेष शोरूम में खरीद प्रक्रिया कथित तौर पर थाम दी गई है — ये सभी अगले कुछ हफ्तों में बंद हो सकते हैं।
बताया जा रहा है कि बिक्री और राजस्व में लगातार गिरावट तथा संस्थान के आकार को सीमित करने की नीति के तहत यह निर्णय लिया गया है।
को-ऑप्टेक्स की पृष्ठभूमि और गिरावट
तमिलनाडु हैंडलूम वीवर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी के वाणिज्यिक ब्रांड को-ऑप्टेक्स की स्थापना 1935 में हथकरघा उत्पादों के विपणन और बुनकरों की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से हुई थी। अंबुमणि के अनुसार, एक दौर में यह ब्रांड सरकारी कर्मचारियों और मध्यम व निम्न आय वर्ग के परिवारों के बीच काफी लोकप्रिय था।
उन्होंने बताया कि 2015-16 में को-ऑप्टेक्स के करीब 200 आउटलेट थे — तमिलनाडु में 133 और अन्य राज्यों व विदेशी बाजारों में 67। 2025-26 तक यह संख्या घटकर लगभग 150 रह गई है। अंबुमणि ने आरोप लगाया कि यह गिरावट वर्षों की उपेक्षा और ऐसी नीतियों का परिणाम है जिनसे अप्रत्यक्ष रूप से निजी कपड़ा कंपनियों को लाभ पहुँचा।
बुनकरों पर असर और सरकार से माँग
अंबुमणि ने स्पष्ट किया कि को-ऑप्टेक्स के शोरूम महज व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं हैं — ये हजारों हथकरघा बुनकरों की आजीविका से सीधे जुड़े हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही, तो 2035 में अपनी स्थापना की शताब्दी मनाने की उम्मीद रखने वाला यह संस्थान बंद होने की कगार पर पहुँच सकता है।
उन्होंने सरकार से तीन सूत्री माँग रखी: 10 शोरूम बंद करने का फैसला वापस लिया जाए, तमिलनाडु और अन्य राज्यों में नए आउटलेट खोले जाएँ, और आधुनिक मार्केटिंग, ई-कॉमर्स तथा बेहतर बिक्री रणनीतियों के जरिए को-ऑप्टेक्स को पुनर्जीवित किया जाए।
सत्तारूढ़ दल के वादे और विरोधाभास
अंबुमणि ने सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के चुनावी घोषणापत्र का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी ने प्रमुख शहरों में 'वेट्री लूम' शोरूम खोलने और तमिलनाडु के हथकरघा उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुँचाने के लिए एक समर्पित ई-कॉमर्स ब्रांड बनाने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि एक ओर मौजूदा स्टोर बंद किए जा रहे हैं और दूसरी ओर नए आउटलेट खोलने के वादे किए जा रहे हैं — यह सरकार की प्रतिबद्धताओं और उसके कार्यों के बीच सीधा विरोधाभास है।
आगे क्या होगा
तमिलनाडु सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हथकरघा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि को-ऑप्टेक्स को बचाने के लिए डिजिटल बिक्री चैनल और ब्रांड पुनर्निर्माण जैसे ठोस कदम उठाने की जरूरत है — अन्यथा देश के सबसे पुराने हथकरघा सहकारी ब्रांडों में से एक का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।