तमिलनाडु: नमक उत्पादकों ने सीएम विजय से लीज नवीनीकरण में दखल की मांग, 150 परिवारों की आजीविका दांव पर
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में कल्पक्कम के निकट थिरुकाझुकुंद्रम तालुक और कदंबाडी क्षेत्र में राज्य सरकार की भूमि पर नमक उत्पादन करने वाले किसानों ने 10 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री विजय से अपनी लीज के नवीनीकरण में व्यक्तिगत हस्तक्षेप की अपील की है। उत्पादकों का कहना है कि लीज नवीनीकरण में हो रही देरी से इस पारंपरिक उद्योग पर आश्रित 150 से अधिक परिवारों की आजीविका सीधे संकट में पड़ सकती है।
मुख्य घटनाक्रम
इस क्षेत्र में नमक उत्पादन के लिए शुरुआत में लगभग 3,500 एकड़ सरकारी भूमि लीज पर दी गई थी। अब यह उत्पादन घटकर केवल 900 एकड़ तक सिमट गया है। उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि लैंड एडमिनिस्ट्रेशन कमिश्नर ने संबंधित जिला कलेक्टरों को लीज नवीनीकरण के निर्देश पहले ही जारी कर दिए थे, लेकिन कुछ क्षेत्रों में यह प्रक्रिया अटकी हुई है।
रिपोर्टों के अनुसार, कोवलम और केलंबक्कम जैसे इलाकों में कई छोटे सॉल्ट पैन लीज न बढ़ाए जाने के कारण पहले ही बंद हो चुके हैं। उद्योग प्रतिनिधियों को आशंका है कि यदि लंबित नवीनीकरण को समय पर मंजूरी नहीं मिली, तो और अधिक इकाइयाँ इसी स्थिति का सामना करेंगी।
भूमि की विशिष्ट प्रकृति और चुनौतियाँ
सॉल्ट पैन संचालकों ने बताया कि इन भूमियों का उपयोग कई दशकों से नमक उत्पादन के लिए होता आ रहा है और इनका वैकल्पिक उपयोग अत्यंत सीमित है। इन जमीनों के नीचे का भूजल अत्यधिक खारा है, जबकि मानसून के दौरान बड़े हिस्से में जलभराव हो जाता है। नमक उत्पादन मौसमी प्रकृति का है और अनुकूल मौसम पर काफी हद तक निर्भर करता है। श्रमिकों ने बताया कि इस वर्ष मौसम अनुकूल रहने से उत्पादन अपेक्षाकृत अधिक दिनों तक जारी रहा।
राज्यव्यापी स्थिति
यह समस्या केवल कल्पक्कम तक सीमित नहीं है। रामनाथपुरम, नागपट्टिनम और थूथुकुडी जिलों में भी राज्य सरकार की सॉल्ट पैन भूमियाँ हैं, जहाँ छोटे उत्पादक और श्रमिक अपने रोजगार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इसके अलावा, तमिलनाडु में केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली सॉल्ट पैन भूमियाँ भी हैं, जिनसे जुड़े लीज नवीनीकरण का मामला फिलहाल मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) के अधीन है।
श्रमिक संगठनों की माँग
थूथुकुडी में ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि राज्य सरकार के समक्ष यह माँग रखने की तैयारी में हैं कि ऐसी भूमियाँ उन व्यक्तिगत संचालकों को सौंपी जाएँ जो अभी उन पर कार्यरत हैं। यूनियनों ने यह भी चिंता जताई है कि कुछ सॉल्ट पैन भूमियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लीज पर दी जा सकती हैं। यूनियनों का स्पष्ट कहना है कि इन संपत्तियों के भविष्य पर कोई भी निर्णय छोटे लीज धारकों और उद्योग पर निर्भर श्रमिकों के हितों की रक्षा करने वाला होना चाहिए।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में पारंपरिक तटीय आजीविकाओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है। लीज नवीनीकरण में और देरी न केवल उत्पादन को प्रभावित करेगी, बल्कि उन परिवारों की आर्थिक स्थिरता को भी खतरे में डालेगी जो पीढ़ियों से इस उद्योग से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।