12 जुलाई 2026
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नमक्कल में सूखे का संकट गहराया: 20 से अधिक झीलें सूखीं, हज़ारों एकड़ खेती खतरे में

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नमक्कल में सूखे का संकट गहराया: 20 से अधिक झीलें सूखीं, हज़ारों एकड़ खेती खतरे में

सारांश

नमक्कल के कुमारपालयम में 20 से अधिक सिंचाई झीलें सूख गई हैं — मॉनसून की देरी और मेट्टूर बांध से पानी न मिलने का दोहरा संकट हज़ारों किसानों की फसल और आजीविका दोनों को खतरे में डाल रहा है। पेयजल तक प्रभावित होने से ग्रामीण जीवन की बुनियाद हिल गई है।

मुख्य बातें

नमक्कल जिले के कुमारपालयम, पल्लीपालयम और वेप्पाडाई में 20 से अधिक सिंचाई झीलें पूरी तरह सूख गई हैं।
मॉनसून की देरी और मेट्टूर बांध से पानी न छोड़े जाने के कारण हज़ारों एकड़ कृषि भूमि प्रभावित है।
प्रमुख फसलें — धान, हल्दी, केला और गन्ना — के बर्बाद होने का खतरा; कई किसानों ने उधार लेकर निवेश किया था।
भूजल स्तर में गिरावट से सिंचाई के वैकल्पिक साधन भी सीमित हो गए हैं।
कई गाँवों में पीने के पानी और मवेशियों के लिए जल की भी किल्लत शुरू हो गई है।
किसान संगठनों ने तमिलनाडु सरकार से तत्काल निरीक्षण और व्यापक राहत पैकेज की माँग की है।

तमिलनाडु के नमक्कल जिले के कुमारपालयम क्षेत्र में जल संकट खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। मॉनसून की बारिश में देरी और मेट्टूर बांध से पानी न छोड़े जाने के कारण इलाके में सिंचाई पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे हज़ारों किसान परिवारों की आजीविका खतरे में आ गई है। 12 जुलाई तक की स्थिति के अनुसार, कुमारपालयम, पल्लीपालयम और वेप्पाडाई क्षेत्रों में 20 से अधिक सिंचाई झीलें पूरी तरह सूख चुकी हैं।

मुख्य घटनाक्रम

कुमारपालयम, पल्लीपालयम और वेप्पाडाई में सिंचाई के काम आने वाली 20 से अधिक झीलें पूरी तरह सूख गई हैं। इसके चलते हज़ारों एकड़ कृषि भूमि पर सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। नहर से पानी की आपूर्ति भी बाधित है, जिससे खेती का काम लगभग रुक गया है। यह ऐसे समय में आया है जब किसानों ने खरीफ सीज़न की तैयारी में बीज, पौधे और खाद खरीदने में भारी निवेश किया था — अधिकांश उधार लेकर।

किसानों पर असर

इस इलाके की अर्थव्यवस्था की रीढ़ खेती है। धान, हल्दी, केला और गन्ना यहाँ की प्रमुख फसलें हैं। पानी की कमी के कारण कई खेत अब खाली पड़े हैं, जबकि पहले से बोई गई फसलें सूखने लगी हैं। जिन किसानों ने सामान्य मॉनसून की उम्मीद में कर्ज लेकर निवेश किया था, उनके सामने अब भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।

गौरतलब है कि लंबे समय तक सूखे का असर केवल सतही जल तक सीमित नहीं रहा — भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैकल्पिक सिंचाई के विकल्प भी सिकुड़ते जा रहे हैं।

पेयजल का भी संकट

सिंचाई टैंकों के सूख जाने से अब खेती के साथ-साथ पीने के पानी की उपलब्धता पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई गाँवों में निवासियों और मवेशियों के लिए पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है। यह स्थिति ग्रामीण जीवन के दो बुनियादी आधारों — खेती और पेयजल — दोनों को एक साथ प्रभावित कर रही है।

सरकार से राहत की माँग

स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तमिलनाडु सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उनकी माँग है कि कृषि और राजस्व अधिकारी फौरन खेतों का निरीक्षण करें और फसल नुकसान का आकलन करें। किसान संगठनों ने एक व्यापक राहत पैकेज की माँग रखी है, जिसमें प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता, आपातकालीन सिंचाई प्रबंध और मॉनसून सामान्य होने तक जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपाय शामिल हों।

क्या होगा आगे

अगर मेट्टूर बांध से जल्द पानी नहीं छोड़ा गया और मॉनसून में और देरी हुई, तो आने वाले हफ्तों में नुकसान और व्यापक होने की आशंका है। राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और राहत पैकेज की घोषणा पर किसानों की नज़रें टिकी हैं। यह संकट तमिलनाडु में जल प्रबंधन नीति और मॉनसून-निर्भर कृषि की कमज़ोरियों को एक बार फिर उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी समन्वित आपातकालीन जल प्रबंधन की व्यवस्था अभी भी प्रतिक्रियाशील है, न कि पूर्व-सक्रिय। किसानों का कर्ज लेकर बुवाई करना और फिर पानी के अभाव में फसल गँवाना — यह चक्र तमिलनाडु के कई जिलों में दशकों से दोहराया जा रहा है। जब तक राहत पैकेज घोषित होते हैं, तब तक नुकसान हो चुका होता है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नमक्कल में सूखे का संकट क्यों गहराया है?
मॉनसून की बारिश में देरी और मेट्टूर बांध से पानी न छोड़े जाने के कारण नमक्कल जिले के कुमारपालयम क्षेत्र में पानी की भारी कमी हो गई है। इससे 20 से अधिक सिंचाई झीलें सूख गई हैं और हज़ारों एकड़ खेती प्रभावित हुई है।
किन फसलों को सबसे अधिक नुकसान होने का खतरा है?
नमक्कल जिले में धान, हल्दी, केला और गन्ना प्रमुख फसलें हैं जो इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं। कई किसानों ने उधार लेकर इन फसलों के लिए बीज, पौधे और खाद खरीदे थे, जो अब पानी के अभाव में बर्बाद होने की कगार पर हैं।
क्या यह संकट केवल खेती तक सीमित है?
नहीं, सिंचाई टैंकों के सूखने से गाँवों में पीने के पानी और मवेशियों के लिए जल की आपूर्ति पर भी गंभीर असर पड़ा है। इसके अलावा भूजल स्तर में गिरावट ने वैकल्पिक सिंचाई के विकल्पों को भी सीमित कर दिया है।
किसानों ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
किसान संगठनों और स्थानीय निवासियों ने तमिलनाडु सरकार से तत्काल कृषि और राजस्व अधिकारियों द्वारा खेतों का निरीक्षण, फसल नुकसान का आकलन और एक व्यापक राहत पैकेज की माँग की है। इसमें आर्थिक सहायता, आपातकालीन सिंचाई प्रबंध और जल आपूर्ति बेहतर बनाने के उपाय शामिल हैं।
मेट्टूर बांध का इस संकट से क्या संबंध है?
मेट्टूर बांध तमिलनाडु के कई कृषि क्षेत्रों को सिंचाई जल उपलब्ध कराता है। बांध से पानी न छोड़े जाने के कारण नहर-आधारित सिंचाई पूरी तरह बाधित हो गई है, जो नमक्कल के कुमारपालयम जैसे क्षेत्रों में सूखे की स्थिति को और गंभीर बना रही है।
राष्ट्र प्रेस
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