नमक्कल में सूखे का संकट गहराया: 20 से अधिक झीलें सूखीं, हज़ारों एकड़ खेती खतरे में
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के नमक्कल जिले के कुमारपालयम क्षेत्र में जल संकट खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। मॉनसून की बारिश में देरी और मेट्टूर बांध से पानी न छोड़े जाने के कारण इलाके में सिंचाई पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे हज़ारों किसान परिवारों की आजीविका खतरे में आ गई है। 12 जुलाई तक की स्थिति के अनुसार, कुमारपालयम, पल्लीपालयम और वेप्पाडाई क्षेत्रों में 20 से अधिक सिंचाई झीलें पूरी तरह सूख चुकी हैं।
मुख्य घटनाक्रम
कुमारपालयम, पल्लीपालयम और वेप्पाडाई में सिंचाई के काम आने वाली 20 से अधिक झीलें पूरी तरह सूख गई हैं। इसके चलते हज़ारों एकड़ कृषि भूमि पर सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। नहर से पानी की आपूर्ति भी बाधित है, जिससे खेती का काम लगभग रुक गया है। यह ऐसे समय में आया है जब किसानों ने खरीफ सीज़न की तैयारी में बीज, पौधे और खाद खरीदने में भारी निवेश किया था — अधिकांश उधार लेकर।
किसानों पर असर
इस इलाके की अर्थव्यवस्था की रीढ़ खेती है। धान, हल्दी, केला और गन्ना यहाँ की प्रमुख फसलें हैं। पानी की कमी के कारण कई खेत अब खाली पड़े हैं, जबकि पहले से बोई गई फसलें सूखने लगी हैं। जिन किसानों ने सामान्य मॉनसून की उम्मीद में कर्ज लेकर निवेश किया था, उनके सामने अब भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।
गौरतलब है कि लंबे समय तक सूखे का असर केवल सतही जल तक सीमित नहीं रहा — भूजल स्तर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैकल्पिक सिंचाई के विकल्प भी सिकुड़ते जा रहे हैं।
पेयजल का भी संकट
सिंचाई टैंकों के सूख जाने से अब खेती के साथ-साथ पीने के पानी की उपलब्धता पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई गाँवों में निवासियों और मवेशियों के लिए पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है। यह स्थिति ग्रामीण जीवन के दो बुनियादी आधारों — खेती और पेयजल — दोनों को एक साथ प्रभावित कर रही है।
सरकार से राहत की माँग
स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तमिलनाडु सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उनकी माँग है कि कृषि और राजस्व अधिकारी फौरन खेतों का निरीक्षण करें और फसल नुकसान का आकलन करें। किसान संगठनों ने एक व्यापक राहत पैकेज की माँग रखी है, जिसमें प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता, आपातकालीन सिंचाई प्रबंध और मॉनसून सामान्य होने तक जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपाय शामिल हों।
क्या होगा आगे
अगर मेट्टूर बांध से जल्द पानी नहीं छोड़ा गया और मॉनसून में और देरी हुई, तो आने वाले हफ्तों में नुकसान और व्यापक होने की आशंका है। राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और राहत पैकेज की घोषणा पर किसानों की नज़रें टिकी हैं। यह संकट तमिलनाडु में जल प्रबंधन नीति और मॉनसून-निर्भर कृषि की कमज़ोरियों को एक बार फिर उजागर करता है।