मेट्टूर बांध: 12 जून को पानी छोड़ने में देरी की आशंका, अंबुमणि रामदास ने माँगा किसानों के लिए कुरुवई पैकेज
सारांश
मुख्य बातें
पट्टली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने तमिलनाडु सरकार से तत्काल एक व्यापक 'कुरुवई पैकेज' घोषित करने की माँग की है, जिसमें किसानों को वित्तीय एवं बुनियादी ढाँचागत सहायता शामिल हो। उन्होंने आगाह किया है कि मेट्टूर बांध से समय पर पानी न छोड़े जाने की स्थिति में कावेरी डेल्टा क्षेत्र में धान की कुरुवई खेती को गंभीर नुकसान हो सकता है।
मौजूदा जल स्तर की स्थिति
6 जून को जारी एक बयान में अंबुमणि ने बताया कि मेट्टूर जलाशय में फिलहाल केवल 41.60 टीएमसी पानी है और जलस्तर लगभग 79 फीट पर है, जो सिंचाई के लिए आवश्यक स्तर से काफी नीचे है। उनके अनुसार, कुरुवई सीजन में निर्बाध सिंचाई के लिए जलाशय का स्तर कम से कम 90 फीट होना चाहिए और प्रतिदिन न्यूनतम 1.5 टीएमसी पानी की आवक जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि निर्बाध सिंचाई के लिए जलाशय में कम से कम 12 टीएमसी अतिरिक्त भंडारण और लगभग 18,000 क्यूसेक प्रवाह की आवश्यकता होगी। दक्षिण-पश्चिम मानसून की कावेरी जलग्रहण क्षेत्रों में अभी तक कोई उल्लेखनीय गतिविधि न होने के कारण 12 जून — कुरुवई खेती की पारंपरिक शुरुआत तिथि — तक पानी छोड़े जाने की संभावना बहुत कम बताई जा रही है।
कर्नाटक के जलाशयों की स्थिति भी चिंताजनक
अंबुमणि ने बताया कि कर्नाटक के प्रमुख कावेरी बेसिन जलाशयों — कृष्ण राज सागर, काबिनी, हरंगी और हेमावती — में कुल मिलाकर केवल 33.45 टीएमसी पानी है, जो इनकी संयुक्त 114.57 टीएमसी क्षमता का मात्र 29.08 प्रतिशत है। इस कम भंडारण को देखते हुए कर्नाटक द्वारा निचले इलाकों में बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने की उम्मीद भी कम है।
किसानों पर संभावित असर
पीएमके नेता ने चेतावनी दी कि यदि मेट्टूर बांध समय पर नहीं खोला गया, तो इस साल कुरुवई खेती का रकबा 3 लाख एकड़ से भी कम रह सकता है — जबकि पिछले सीजन में 6.13 लाख एकड़ में खेती हुई थी। यह गिरावट तंजावुर, तिरुवरुर, नागपट्टिनम और मयिलादुथुराई समेत 10 से अधिक सिंचित जिलों के किसानों की आय पर सीधा असर डालेगी और खेतिहर मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर भी घटेंगे।
सरकार से माँगें
अंबुमणि ने राज्य सरकार से कई तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने किसानों को भूजल संसाधनों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने, सब्सिडी वाले बीज, उर्वरक और सूक्ष्म पोषक तत्व उपलब्ध कराने वाला कुरुवई पैकेज तत्काल लागू करने की माँग की। साथ ही, कृषि कार्यों के लिए 24 घंटे निर्बाध थ्री-फेज बिजली और अनिश्चितता से जूझ रहे किसानों को ₹5,000 प्रति एकड़ इनपुट सब्सिडी देने की भी अपील की।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब कावेरी जल विवाद और मानसून की अनिश्चितता हर साल तमिलनाडु के डेल्टा किसानों के लिए चुनौती बनती है। गौरतलब है कि कुरुवई सीजन की सफलता सीधे तौर पर राज्य की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी है। तमिलनाडु सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, और किसान संगठन राज्य सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।