मेट्टूर बांध 28 अगस्त को खुलेगा: CM विजय करेंगे उद्घाटन, 16 लाख एकड़ कृषि भूमि को राहत
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 28 अगस्त 2026 को मेट्टूर बांध का औपचारिक उद्घाटन करेंगे और कावेरी डेल्टा के जिलों में सिंचाई के लिए जल प्रवाह शुरू करेंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, जलाशय में जलस्तर 88.43 फीट तक पहुँच चुका है और अगले दो दिनों में 90 फीट के निर्धारित स्तर तक पहुँचने की उम्मीद है, जिसके बाद बांध खोलने की प्रक्रिया शुरू होगी।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार को सलेम जिले के पुलिस अधीक्षक कुथलिंगम ने बांध परिसर का औचक निरीक्षण किया। इसके साथ ही जल संसाधन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस बल उद्घाटन कार्यक्रम की तैयारियों में जुट गए हैं। मुख्यमंत्री विजय सलेम के कमलापुरम हवाई अड्डे पर हवाई मार्ग से पहुँचेंगे और वहाँ से सड़क मार्ग द्वारा मेट्टूर जाएंगे।
मंगलवार को बांध में पानी का बहाव 10,807 क्यूबिक फीट प्रति सेकंड दर्ज किया गया, जो लगातार जलस्तर बढ़ने का संकेत है। अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर के 90 फीट तक पहुँचते ही पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
किसानों पर असर और देरी की पृष्ठभूमि
परंपरागत रूप से मेट्टूर बांध से हर वर्ष 12 जून को पानी छोड़ा जाता है, ताकि कावेरी डेल्टा में कृषि कार्य समय पर शुरू हो सकें। इस वर्ष जलाशय में पर्याप्त जल संचय न होने के कारण यह तिथि टाली जाती रही। लगभग 70 दिनों की देरी के बाद भी कुरुवई धान की फसल के लिए पानी नहीं छोड़ा गया, जिससे किसानों में गहरी चिंता व्याप्त हो गई।
कुरुवई एक अल्पावधि धान की किस्म है जिसकी खेती के लिए समय पर जल आपूर्ति अनिवार्य होती है। सलेम, नमक्कल, इरोड, करूर, तिरुचि और तंजावुर सहित 13 जिलों में फैली लगभग 16 लाख एकड़ कृषि भूमि इस जल प्रवाह पर निर्भर है। किसान संगठन राज्य सरकार से बिना और विलंब किए कदम उठाने की माँग करते आ रहे थे।
विधानसभा में विपक्ष की माँग
मंगलवार सुबह तमिलनाडु विधानसभा में विपक्षी विधायकों ने यह मुद्दा उठाया और सरकार से स्पष्ट जवाब माँगा कि बांध कब खोला जाएगा। जल संसाधन मंत्री आनंद ने सदन में जवाब देते हुए संकेत दिया कि स्थिति पर निरंतर और बारीकी से नज़र रखी जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब डेल्टा के किसानों में असंतोष चरम पर था और उनकी माँगें तेज़ होती जा रही थीं।
आगे क्या होगा
28 अगस्त को मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में आयोजित होने वाले उद्घाटन कार्यक्रम के बाद कावेरी डेल्टा के 13 जिलों में सिंचाई जल प्रवाह शुरू हो जाएगा। यह कदम न केवल कुरुवई धान की बची-खुची खेती के लिए राहत लाएगा, बल्कि अगली फसल की तैयारी में भी किसानों की मदद करेगा। गौरतलब है कि मेट्टूर बांध का जल प्रबंधन तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच दशकों पुराने कावेरी जल विवाद के व्यापक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।