मेट्टूर बांध में कावेरी का बहाव बढ़कर 7,151 क्यूसेक, कर्नाटक जलाशयों से छोड़े पानी का असर
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के प्रमुख जलाशयों से पानी छोड़े जाने के बाद कावेरी नदी का जलस्तर बढ़ा और तमिलनाडु के मेट्टूर बांध में पानी का बहाव मंगलवार, 11 अगस्त को 5,760 क्यूसेक से उछलकर 7,151 क्यूसेक पर पहुँच गया। होगेनक्कल के रास्ते तमिलनाडु में प्रवेश करने वाले इस बढ़े हुए प्रवाह से कावेरी डेल्टा क्षेत्र में जल आपूर्ति की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।
बहाव में बढ़ोतरी की वजह
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के तेज होने से कावेरी के जलग्रहण क्षेत्र (कैचमेंट एरिया) में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे कर्नाटक के बड़े जलाशयों में पानी की आवक बढ़ी। इसी के चलते काबिनी जलाशय से 1 अगस्त से कावेरी में पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। एक चरण में कैचमेंट एरिया में भारी वर्षा के कारण काबिनी से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा बढ़ाकर लगभग 27,000 क्यूसेक तक कर दी गई थी।
कृष्ण राज सागर (KRS) जलाशय से भी पानी छोड़ा गया, जिसमें से करीब 1,000 क्यूसेक पानी तमिलनाडु की ओर प्रवाहित किया गया। इससे कावेरी में कुल बहाव और मजबूत हुआ।
कर्नाटक ने घटाया छोड़ा जाने वाला पानी
बाद में कैचमेंट एरिया में बारिश की तीव्रता कम होने से कर्नाटक के जलाशयों में पानी की आवक घटी। इसके बाद अधिकारियों ने निचले इलाकों की ओर छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा को क्रमशः कम करना शुरू किया। हालाँकि, इससे पहले ही छोड़ा जा चुका पानी निचले इलाकों की ओर बढ़ता रहा और होगेनक्कल के रास्ते तमिलनाडु में पहुँचता रहा, जिसके कारण मंगलवार सुबह होगेनक्कल में दर्ज बहाव 5,760 क्यूसेक से बढ़कर 7,151 क्यूसेक हो गया।
मेट्टूर बांध का महत्व
मेट्टूर बांध तमिलनाडु के जल प्रबंधन तंत्र की धुरी है, विशेष रूप से कावेरी डेल्टा जिलों में सिंचाई के लिए। फिलहाल बांध से निचले इलाकों में पीने के पानी की जरूरतें पूरी करने के लिए लगभग 1,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। मॉनसून के दौरान इस बांध के भंडारण स्तर और आवक पर प्रशासन की कड़ी नजर रहती है।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में कर्नाटक के जलाशयों में बारिश और छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा के साथ-साथ होगेनक्कल और मेट्टूर तक पहुँचने वाले प्रवाह पर निगरानी जारी रहेगी। बढ़े हुए बहाव से कावेरी डेल्टा क्षेत्र में जल उपलब्धता में सुधार की संभावना जताई जा रही है, जो किसानों और स्थानीय निवासियों के लिए राहत की खबर है।