काबिनी से 12,000 क्यूसेक जल छोड़ा, तमिलनाडु को सोमवार तक मिलेगा कावेरी का पानी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक ने काबिनी जलाशय से लगभग 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा है, जिसके सोमवार, 4 अगस्त 2026 तक तमिलनाडु पहुँचने की उम्मीद है। कावेरी नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के कारण काबिनी जलाशय में पानी की आवक में तेज़ उछाल आया है, जिससे यह जल-विमोचन संभव हो पाया।
बिलीगुंडलू से मेत्तूर तक का सफर
जल संसाधन विभाग (WRD) के अधिकारियों के अनुसार, छोड़ा गया पानी सबसे पहले कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर स्थित बिलीगुंडलू गेजिंग स्टेशन तक सोमवार तक पहुँचने की संभावना है। इसके बाद यह प्रवाह मेत्तूर जलाशय की ओर बढ़ेगा, जहाँ इसके मंगलवार या बुधवार तक पहुँचने का अनुमान है।
हालाँकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पानी के पहुँचने का सटीक समय नदी की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। WRD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नदी मार्ग में वाष्पीकरण और जल-अवशोषण से होने वाले नुकसान को भी ध्यान में रखना होगा, क्योंकि हाल के दिनों में कावेरी बेसिन के कई हिस्से अपेक्षाकृत सूखे रहे हैं।
काबिनी जलाशय में जलस्तर की स्थिति
19,516 मिलियन क्यूबिक फीट (MCFT) क्षमता वाले काबिनी जलाशय में 1 जुलाई को मात्र 26.59 प्रतिशत जल भंडारण था और उस समय आवक केवल 1,988 क्यूसेक थी। जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हुई बारिश ने स्थिति बदल दी — 15 जुलाई तक भंडारण बढ़कर 61.63 प्रतिशत हो गया। 31 जुलाई तक जलाशय अपनी कुल क्षमता के 82.65 प्रतिशत तक भर चुका था और पानी की आवक 9,133 क्यूसेक तक पहुँच गई।
इसी प्रकार, कृष्णराज सागर (KRS) जलाशय में भी कावेरी बेसिन में हुई भारी वर्षा के कारण पानी की आवक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
कावेरी जल विवाद की पृष्ठभूमि
यह जल-विमोचन ऐसे समय में हुआ है जब दोनों राज्यों के बीच कावेरी जल बंटवारे का विवाद लंबे समय से जारी है। तमिलनाडु के अधिकारियों का कहना है कि कर्नाटक ने कावेरी जल विनियमन समिति और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के बावजूद पानी छोड़ने में देरी की। गौरतलब है कि यह अंतर-राज्यीय जल विवाद दशकों पुराना है और न्यायिक तथा प्रशासनिक दोनों स्तरों पर विचाराधीन रहा है।
मेत्तूर जलाशय की मौजूदा स्थिति
शनिवार को मेत्तूर जलाशय में 35.774 TMCFT पानी मौजूद था, जो इसकी कुल 93.470 TMCFT क्षमता का 38.27 प्रतिशत है। WRD अधिकारियों ने बताया कि जलाशय के जलस्तर और ऊपरी क्षेत्रों से छोड़े जा रहे पानी पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
किसानों को राहत की उम्मीद
काबिनी और KRS जलाशयों के अपनी पूर्ण क्षमता के करीब पहुँचने के साथ, यदि भारी आवक जारी रही तो आगे और पानी छोड़ा जा सकता है। कावेरी डेल्टा के किसान फसल सीजन से पहले पानी की उपलब्धता पर करीबी नज़र बनाए हुए हैं — किसी भी अतिरिक्त जल-विमोचन से उन्हें महत्वपूर्ण राहत मिलने की उम्मीद है।