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काबिनी से 12,000 क्यूसेक जल छोड़ा, तमिलनाडु को सोमवार तक मिलेगा कावेरी का पानी

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काबिनी से 12,000 क्यूसेक जल छोड़ा, तमिलनाडु को सोमवार तक मिलेगा कावेरी का पानी

सारांश

कर्नाटक ने काबिनी जलाशय से 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा है — जो जुलाई में महज 26.59% से भरकर 82.65% तक पहुँचा। सोमवार तक बिलीगुंडलू और मंगलवार-बुधवार तक मेत्तूर पहुँचने की उम्मीद है, लेकिन सूखे नदी मार्ग और वाष्पीकरण से देरी संभव। कावेरी डेल्टा के किसानों की नज़रें इस पर टिकी हैं।

मुख्य बातें

कर्नाटक ने काबिनी जलाशय से लगभग 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा है।
पानी सोमवार, 4 अगस्त तक बिलीगुंडलू गेजिंग स्टेशन और मंगलवार-बुधवार तक मेत्तूर जलाशय पहुँचने की उम्मीद।
काबिनी जलाशय 31 जुलाई तक अपनी 19,516 MCFT क्षमता के 82.65% तक भर चुका था; 1 जुलाई को यह केवल 26.59% था।
मेत्तूर जलाशय में शनिवार को 35.774 TMCFT पानी — कुल 93.470 TMCFT क्षमता का 38.27% ।
तमिलनाडु के अधिकारियों के अनुसार, कावेरी जल विनियमन समिति के निर्देशों के बावजूद कर्नाटक ने पानी छोड़ने में देरी की।
कावेरी डेल्टा के किसान फसल सीजन से पहले इस जल-प्रवाह पर निर्भर हैं।

कर्नाटक ने काबिनी जलाशय से लगभग 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा है, जिसके सोमवार, 4 अगस्त 2026 तक तमिलनाडु पहुँचने की उम्मीद है। कावेरी नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के कारण काबिनी जलाशय में पानी की आवक में तेज़ उछाल आया है, जिससे यह जल-विमोचन संभव हो पाया।

बिलीगुंडलू से मेत्तूर तक का सफर

जल संसाधन विभाग (WRD) के अधिकारियों के अनुसार, छोड़ा गया पानी सबसे पहले कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर स्थित बिलीगुंडलू गेजिंग स्टेशन तक सोमवार तक पहुँचने की संभावना है। इसके बाद यह प्रवाह मेत्तूर जलाशय की ओर बढ़ेगा, जहाँ इसके मंगलवार या बुधवार तक पहुँचने का अनुमान है।

हालाँकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पानी के पहुँचने का सटीक समय नदी की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। WRD के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नदी मार्ग में वाष्पीकरण और जल-अवशोषण से होने वाले नुकसान को भी ध्यान में रखना होगा, क्योंकि हाल के दिनों में कावेरी बेसिन के कई हिस्से अपेक्षाकृत सूखे रहे हैं।

काबिनी जलाशय में जलस्तर की स्थिति

19,516 मिलियन क्यूबिक फीट (MCFT) क्षमता वाले काबिनी जलाशय में 1 जुलाई को मात्र 26.59 प्रतिशत जल भंडारण था और उस समय आवक केवल 1,988 क्यूसेक थी। जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हुई बारिश ने स्थिति बदल दी — 15 जुलाई तक भंडारण बढ़कर 61.63 प्रतिशत हो गया। 31 जुलाई तक जलाशय अपनी कुल क्षमता के 82.65 प्रतिशत तक भर चुका था और पानी की आवक 9,133 क्यूसेक तक पहुँच गई।

इसी प्रकार, कृष्णराज सागर (KRS) जलाशय में भी कावेरी बेसिन में हुई भारी वर्षा के कारण पानी की आवक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

कावेरी जल विवाद की पृष्ठभूमि

यह जल-विमोचन ऐसे समय में हुआ है जब दोनों राज्यों के बीच कावेरी जल बंटवारे का विवाद लंबे समय से जारी है। तमिलनाडु के अधिकारियों का कहना है कि कर्नाटक ने कावेरी जल विनियमन समिति और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के बावजूद पानी छोड़ने में देरी की। गौरतलब है कि यह अंतर-राज्यीय जल विवाद दशकों पुराना है और न्यायिक तथा प्रशासनिक दोनों स्तरों पर विचाराधीन रहा है।

मेत्तूर जलाशय की मौजूदा स्थिति

शनिवार को मेत्तूर जलाशय में 35.774 TMCFT पानी मौजूद था, जो इसकी कुल 93.470 TMCFT क्षमता का 38.27 प्रतिशत है। WRD अधिकारियों ने बताया कि जलाशय के जलस्तर और ऊपरी क्षेत्रों से छोड़े जा रहे पानी पर लगातार नज़र रखी जा रही है।

किसानों को राहत की उम्मीद

काबिनी और KRS जलाशयों के अपनी पूर्ण क्षमता के करीब पहुँचने के साथ, यदि भारी आवक जारी रही तो आगे और पानी छोड़ा जा सकता है। कावेरी डेल्टा के किसान फसल सीजन से पहले पानी की उपलब्धता पर करीबी नज़र बनाए हुए हैं — किसी भी अतिरिक्त जल-विमोचन से उन्हें महत्वपूर्ण राहत मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे की तस्वीर जटिल है — तमिलनाडु के अधिकारियों का आरोप है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी देरी हुई, जो अंतर-राज्यीय जल-साझेदारी के तंत्र की कमज़ोरी उजागर करता है। काबिनी का जुलाई में 26.59% से 82.65% तक भरना बारिश की कृपा है, नीति की नहीं — और यही असली चिंता है। जब तक कावेरी बेसिन में जल-विमोचन का बाध्यकारी, स्वचालित तंत्र नहीं बनता, डेल्टा के किसान हर मानसून में इसी राजनीतिक अनिश्चितता के बंधक बने रहेंगे।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक ने काबिनी से कितना पानी छोड़ा और यह तमिलनाडु कब पहुँचेगा?
कर्नाटक ने काबिनी जलाशय से लगभग 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा है। यह पानी सोमवार, 4 अगस्त तक कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर बिलीगुंडलू गेजिंग स्टेशन और मंगलवार या बुधवार तक मेत्तूर जलाशय पहुँचने की उम्मीद है।
काबिनी जलाशय में अभी कितना पानी है?
31 जुलाई तक काबिनी जलाशय अपनी कुल 19,516 MCFT क्षमता के 82.65 प्रतिशत तक भर चुका था और पानी की आवक 9,133 क्यूसेक थी। 1 जुलाई को यह केवल 26.59 प्रतिशत था।
मेत्तूर जलाशय की मौजूदा स्थिति क्या है?
शनिवार को मेत्तूर जलाशय में 35.774 TMCFT पानी मौजूद था, जो इसकी कुल 93.470 TMCFT क्षमता का 38.27 प्रतिशत है। WRD अधिकारी जलस्तर पर लगातार नज़र रख रहे हैं।
तमिलनाडु ने कर्नाटक पर देरी का आरोप क्यों लगाया?
तमिलनाडु के अधिकारियों का कहना है कि कर्नाटक ने कावेरी जल विनियमन समिति और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के बावजूद पानी छोड़ने में देरी की। यह दोनों राज्यों के बीच दशकों पुराने कावेरी जल बंटवारे के विवाद का हिस्सा है।
इस जल-विमोचन से कावेरी डेल्टा के किसानों को कैसे फायदा होगा?
कावेरी डेल्टा के किसान फसल सीजन से पहले पानी की उपलब्धता पर निर्भर हैं। काबिनी और KRS जलाशयों से अतिरिक्त जल-विमोचन से मेत्तूर जलाशय का स्तर बढ़ेगा, जिससे सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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