4 अगस्त 2026
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कावेरी नदी में उफान: बिलिगुंडलू पर प्रवाह 18,000 क्यूसेक, मेट्टूर बांध और तमिलनाडु के किसानों को राहत की उम्मीद

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कावेरी नदी में उफान: बिलिगुंडलू पर प्रवाह 18,000 क्यूसेक, मेट्टूर बांध और तमिलनाडु के किसानों को राहत की उम्मीद

सारांश

कर्नाटक के काबिनी और KRS जलाशयों से 27,000 क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद कावेरी नदी का बिलिगुंडलू पर प्रवाह महज कुछ घंटों में 500 से उछलकर 18,000 क्यूसेक पर पहुँच गया। मेट्टूर बांध, जो अभी 120 फीट क्षमता के मुकाबले 73 फीट पर है, को मंगलवार शाम तक राहत मिलने की उम्मीद — और डेल्टा किसानों की निगाहें टिकी हैं।

मुख्य बातें

बिलिगुंडलू पर कावेरी का प्रवाह 4 अगस्त की सुबह 500 क्यूसेक से बढ़कर 18,000 क्यूसेक तक पहुँचा।
कर्नाटक के काबिनी और KRS जलाशयों से संयुक्त रूप से 27,000 क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा रहा है।
मेट्टूर बांध का जलस्तर 73.18 फीट — पूर्ण क्षमता 120 फीट से काफी नीचे।
बांध में आवक मात्र 68 क्यूसेक , जबकि निर्वहन 1,500 क्यूसेक — भंडार पर दबाव जारी।
नया प्रवाह मंगलवार शाम या रात तक मेट्टूर पहुँचने की उम्मीद, कावेरी डेल्टा के किसानों को राहत मिल सकती है।

तमिलनाडु में कावेरी नदी के प्रवेश बिंदु बिलिगुंडलू पर जलप्रवाह मंगलवार, 4 अगस्त की सुबह तेज़ी से बढ़कर 18,000 क्यूसेक तक पहुँच गया। यह उछाल कर्नाटक के जलाशयों से अधिक पानी छोड़े जाने और जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश का नतीजा है। अधिकारियों के अनुसार, इस बढ़ते प्रवाह से मेट्टूर बांध में जलस्तर सुधरने और कावेरी डेल्टा के किसानों को लंबे समय से प्रतीक्षित राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे बढ़ा प्रवाह

अधिकारियों ने बताया कि कर्नाटक के काबिनी और कृष्ण राज सागर (KRS) जलाशयों से छोड़ा गया पानी मंगलवार तड़के बिलिगुंडलू पहुँचना शुरू हुआ। सोमवार शाम को प्रवाह मात्र 500 क्यूसेक था, जो रात भर में बढ़कर लगभग 1,000 क्यूसेक हो गया।

इसके बाद प्रवाह में तीव्र गति से वृद्धि हुई — सुबह 7 बजे तक यह 8,000 क्यूसेक और सुबह 10 बजे तक 18,000 क्यूसेक तक जा पहुँचा। गौरतलब है कि कर्नाटक वर्तमान में काबिनी और KRS जलाशयों से मिलाकर 27,000 क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ रहा है, इसलिए आने वाले घंटों में प्रवाह के और बढ़ने की संभावना है।

मेट्टूर बांध की मौजूदा स्थिति

फिलहाल मेट्टूर जलाशय की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बांध का जलस्तर 73.18 फीट है, जबकि इसकी पूर्ण भराव क्षमता 120 फीट है। बांध में आवक प्रवाह केवल 68 क्यूसेक दर्ज किया जा रहा था, जबकि निचले इलाकों की सिंचाई जरूरतों को पूरा करने के लिए 1,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था — यानी भंडार पर लगातार दबाव था।

अधिकारियों को उम्मीद है कि बिलिगुंडलू में दर्ज नया प्रवाह मंगलवार शाम या रात तक मेट्टूर बांध तक पहुँच जाएगा, जिससे जलाशय की आवक में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह जलाशय तमिलनाडु के डेल्टा जिलों में सिंचाई का एक प्रमुख स्रोत है।

किसानों पर असर: डेल्टा में उम्मीद की किरण

कावेरी डेल्टा के किसान लंबे समय से पानी की अपर्याप्त उपलब्धता की समस्या से जूझ रहे हैं। इस क्षेत्र में खेती — विशेष रूप से धान की खेती — बड़े पैमाने पर मेट्टूर बांध से होने वाली सिंचाई पर निर्भर है। प्रवाह में इस अचानक वृद्धि ने किसानों में नई उम्मीद जगाई है।

यह ऐसे समय में आया है जब कावेरी डेल्टा के कई हिस्सों में खरीफ सीजन के लिए पानी की माँग चरम पर है। पानी की कमी के चलते किसान खेती की तैयारी में पिछड़ रहे थे।

आगे क्या होगा

ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश और कर्नाटक के जलाशयों से जारी निर्वहन को देखते हुए अधिकारियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु में कावेरी का प्रवाह और मजबूत हो सकता है। अधिकारी काबिनी और KRS से छोड़े जा रहे पानी के साथ-साथ बिलिगुंडलू और मेट्टूर दोनों बिंदुओं पर प्रवाह की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।

यदि ऊपरी क्षेत्रों में बारिश जारी रहती है और कर्नाटक का निर्वहन बना रहता है, तो मेट्टूर जलाशय के जलस्तर में क्रमिक सुधार की उम्मीद है — जो डेल्टा किसानों के लिए इस मौसम का सबसे सकारात्मक संकेत होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 क्यूसेक का आँकड़ा उत्साहजनक है, लेकिन मेट्टूर बांध की असली परीक्षा यह है कि यह प्रवाह कितने दिन टिकता है — एक दिन की बाढ़ 73 फीट के जलस्तर को 120 फीट तक नहीं पहुँचाती। कावेरी जल विवाद की पृष्ठभूमि में कर्नाटक का यह निर्वहन उसके अपने जलाशयों में अधिशेष के कारण है, नीति-प्रेरित उदारता के कारण नहीं — और मानसून कमज़ोर पड़ते ही यह तस्वीर बदल सकती है। डेल्टा किसानों की वास्तविक राहत तभी सुनिश्चित होगी जब ऊपरी जलग्रहण में बारिश का सिलसिला जारी रहे और दोनों राज्यों के बीच समन्वित जल प्रबंधन हो।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिलिगुंडलू पर कावेरी का प्रवाह अचानक इतना क्यों बढ़ा?
कर्नाटक के काबिनी और KRS जलाशयों में जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद अतिरिक्त पानी छोड़ा गया, जिससे बिलिगुंडलू पर प्रवाह 4 अगस्त की सुबह कुछ ही घंटों में 500 क्यूसेक से बढ़कर 18,000 क्यूसेक हो गया। कर्नाटक वर्तमान में दोनों जलाशयों से मिलाकर 27,000 क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ रहा है।
मेट्टूर बांध का अभी क्या हाल है?
मेट्टूर बांध का जलस्तर 4 अगस्त को 73.18 फीट दर्ज किया गया, जबकि इसकी पूर्ण क्षमता 120 फीट है। बांध में आवक प्रवाह केवल 68 क्यूसेक था, जबकि निचले इलाकों के लिए 1,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था।
कावेरी का नया पानी मेट्टूर बांध तक कब पहुँचेगा?
अधिकारियों के अनुसार, बिलिगुंडलू पर दर्ज नया प्रवाह मंगलवार, 4 अगस्त की शाम या रात तक मेट्टूर बांध तक पहुँचने की उम्मीद है। इसके बाद जलाशय की आवक में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है।
कावेरी डेल्टा के किसानों पर इसका क्या असर होगा?
कावेरी डेल्टा के किसान लंबे समय से पानी की कमी झेल रहे थे और खरीफ सीजन की सिंचाई के लिए मेट्टूर बांध पर निर्भर हैं। मेट्टूर में प्रवाह बढ़ने से सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता में सुधार होगा, जिससे किसान खेती की तैयारी आगे बढ़ा सकेंगे।
आने वाले दिनों में कावेरी प्रवाह की क्या संभावना है?
ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश और कर्नाटक के जलाशयों से जारी निर्वहन को देखते हुए अधिकारियों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु में कावेरी का प्रवाह और मजबूत हो सकता है। अधिकारी बिलिगुंडलू और मेट्टूर दोनों बिंदुओं पर बारीकी से निगरानी कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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