मेटूर से छोड़ा पानी अपर एनीकट पहुंचा, मात्र 1,500 क्यूसेक प्रवाह से कावेरी डेल्टा के किसान चिंतित
सारांश
मुख्य बातें
कावेरी डेल्टा में सिंचाई के लिए मेटूर बांध से छोड़ा गया पानी 5 सितंबर की सुबह तिरुची जिले के मुक्कोंबू स्थित अपर एनीकट तक पहुंच गया, लेकिन प्रवाह घटकर मात्र 1,500 क्यूसेक रह जाने से किसानों और सिंचाई विशेषज्ञों में गहरी चिंता व्याप्त हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, डेल्टा क्षेत्र में प्रभावी सिंचाई के लिए कम से कम 16,000 क्यूसेक जल प्रवाह आवश्यक है — जो मौजूदा स्तर से कई गुना अधिक है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर 1 सितंबर को मेटूर जलाशय से 7,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। यह पानी पहले करूर जिले के मयानूर बैराज तक पहुंचा, जहाँ प्रवाह शुरुआत में 2,737 क्यूसेक था जो बाद में 4,081 क्यूसेक तक बढ़ा। मयानूर से करीब 2,050 क्यूसेक पानी अपर एनीकट की ओर छोड़ा गया, किंतु 5 सितंबर की सुबह करीब 6 बजे मुक्कोंबू पहुंचते-पहुंचते प्रवाह घटकर 1,500 क्यूसेक रह गया।
जलाशय की स्थिति और विलंब का कारण
इस वर्ष मेटूर जलाशय में अपर्याप्त जल भंडारण के चलते पानी छोड़ने में देरी हुई, जिससे कावेरी डेल्टा के कुछ हिस्सों में कुरुवाई की खेती पर प्रतिकूल असर पड़ा। जलाशय का स्तर 92 फीट तक पहुंचने और 8,456 क्यूसेक की आवक दर्ज होने के बाद ही पानी छोड़ने का निर्णय लिया गया। गौरतलब है कि पानी छोड़ने में हुई यह देरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों के लिए पहले से ही एक बड़ी चुनौती बन चुकी थी।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
अधिकारियों ने बताया कि अपर एनीकट पर उपलब्ध 777 क्यूसेक पानी फिलहाल पेयजल आवश्यकताओं के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। उपलब्ध 1,500 क्यूसेक पानी को कावेरी नदी में ग्रैंड एनीकट (कल्लनई) की ओर छोड़ दिया गया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि शनिवार तक पानी कल्लनई पहुंचेगा और रविवार से सिंचाई प्रणालियों की ओर जल प्रवाह शुरू किया जा सकेगा।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
सिंचाई विशेषज्ञों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वर्तमान प्रवाह स्तर डेल्टा क्षेत्र की सिंचाई जरूरतों के लिहाज से बेहद अपर्याप्त है। उनके अनुसार, सिंचाई नेटवर्क को ठीक से चलाने के लिए 16,000 क्यूसेक से अधिक प्रवाह की आवश्यकता होगी। मौजूदा स्तर पर पानी काफी हद तक मुख्य नदी मार्ग तक ही सीमित रहेगा और शाखा नदियों तथा सिंचाई नहरों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाएगा।
आम जनता और किसानों पर असर
डेल्टा क्षेत्र के किसान पहले से ही सिंचाई नहरों में पर्याप्त पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में जल निकासी में पर्याप्त वृद्धि नहीं हुई, तो फसलों के लिए पानी का इंतजार कर रहे किसानों को कोई खास राहत मिलने की संभावना नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब डेल्टा क्षेत्र में कुरुवाई सीजन पहले ही देरी की मार झेल चुका है और रबी सीजन की तैयारी भी दांव पर है।