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कावेरी डेल्टा किसानों की मांग: सूखा घोषित करे सरकार, मेट्टूर जलाशय में 41.648 TMC पर घटा जलस्तर

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कावेरी डेल्टा किसानों की मांग: सूखा घोषित करे सरकार, मेट्टूर जलाशय में 41.648 TMC पर घटा जलस्तर

सारांश

मेट्टूर जलाशय का भंडारण 41.648 टीएमसी पर सिमटा है और 12 जून की परंपरागत रिलीज संभव नहीं दिख रही। कावेरी डेल्टा के किसान सूखा घोषणा, त्रिपक्षीय बैठक और केंद्रीय सहायता की माँग लेकर सामने आए हैं — बिजली कटौती ने बोरवेल पर निर्भर किसानों की मुश्किलें और बढ़ाई हैं।

मुख्य बातें

मेट्टूर जलाशय का जलस्तर 79.69 फीट और भंडारण 41.648 टीएमसी — 12 जून की परंपरागत रिलीज के लिए अपर्याप्त।
कावेरी डेल्टा किसानों ने तमिलनाडु सरकार से डेल्टा जिलों को सूखा प्रभावित घोषित करने की माँग की।
कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष 3.5 लाख एकड़ में कूरुवई खेती का अनुमान, जबकि पिछले वर्षों में 6 लाख एकड़ से अधिक में बुवाई हुई थी।
बार-बार बिजली कटौती से बोरवेल सिंचाई बाधित, कई इलाकों में खड़ी फसल सूखने की रिपोर्ट।
किसानों ने अधिकारियों, कृषि विशेषज्ञों और किसान प्रतिनिधियों के साथ त्रिपक्षीय बैठक और केंद्रीय सहायता की माँग की।

कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसानों ने तमिलनाडु सरकार से तत्काल मांग की है कि डेल्टा जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाए, क्योंकि मेट्टूर जलाशय का जलस्तर इस समय मात्र 79.69 फीट और भंडारण 41.648 टीएमसी पर है — जो 12 जून की परंपरागत जल रिलीज के लिए आवश्यक न्यूनतम स्तर से काफी नीचे है। किसान संगठनों ने कूरुवई खेती सीजन की स्थिति पर सभी हितधारकों की त्रिपक्षीय बैठक बुलाने की भी अपील की है।

मेट्टूर जलाशय की स्थिति और परंपरागत रिलीज पर संकट

मेट्टूर जलाशय कावेरी डेल्टा क्षेत्र की सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। प्रत्येक वर्ष 12 जून को यहाँ से पानी छोड़ा जाता है और यह सिलसिला 28 जनवरी तक जारी रहता है। यह रिलीज तभी संभव होती है जब जलाशय में पर्याप्त जलस्तर हो। इस वर्ष जलस्तर सामान्य से काफी नीचे होने के कारण परंपरागत रिलीज संभव नहीं दिख रही, जिससे डेल्टा क्षेत्र के लाखों किसानों की चिंता बढ़ गई है।

गौरतलब है कि पिछले वर्षों में जब समय पर पानी छोड़ा गया, तब 6 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में खेती हुई थी। इस वर्ष कृषि विभाग के अनुसार करीब 3.5 लाख एकड़ में कूरुवई खेती होने का अनुमान है, लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि वास्तविक बुवाई क्षेत्र इससे भी कम हो सकता है।

बिजली कटौती से सिंचाई पर दोहरी मार

जो किसान नदी के पानी की प्रतीक्षा न करते हुए बोरवेल सिंचाई के भरोसे बुवाई कर चुके हैं, उन्हें भी राहत नहीं मिली है। किसानों के अनुसार सिंचाई पंप चलाने के लिए निरंतर बिजली आपूर्ति अनिवार्य है, लेकिन बार-बार होने वाली बिजली कटौती से सिंचाई बाधित हो रही है और कई इलाकों में खड़ी फसल सूखने लगी है।

किसान संगठनों का तर्क है कि बोरवेल के लिए बिजली आपूर्ति में रुकावट ने उन किसानों की स्थिति भी बिगाड़ दी है, जिन्होंने जोखिम उठाकर अपनी बचत से बुवाई की थी। यह ऐसे समय में आया है जब पहले से ही मेट्टूर से जल रिलीज की अनिश्चितता बनी हुई है।

किसान नेताओं की चेतावनी और मांगें

किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि इस वर्ष खेती का क्षेत्रफल पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम रहेगा। उनका कहना है कि कम बुवाई से धान उत्पादन में गिरावट आएगी, जिसका सीधा असर किसानों और खेतिहर मजदूरों दोनों की आजीविका पर पड़ेगा।

किसानों ने तमिलनाडु सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: पहली, कावेरी डेल्टा जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाए; दूसरी, अधिकारियों, कृषि विशेषज्ञों और किसान प्रतिनिधियों के साथ त्रिपक्षीय बैठक बुलाई जाए ताकि वैकल्पिक फसलों और जल प्रबंधन पर निर्णय लिया जा सके; और तीसरी, सूखा घोषणा के लिए केंद्र सरकार से सहायता माँगी जाए।

आम जनता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

कूरुवई धान की खेती कावेरी डेल्टा की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। खेती में कमी का अर्थ है खेतिहर मजदूरों के लिए कम रोजगार, ग्रामीण बाज़ारों में माँग में गिरावट और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव। कुछ किसानों ने स्थिति भाँपकर इस सीजन में बुवाई ही नहीं की, जो दर्शाता है कि ज़मीनी स्तर पर भरोसे की कमी कितनी गहरी है।

यदि समय रहते सूखा घोषणा और राहत उपाय नहीं किए गए, तो आलोचकों का कहना है कि ग्रामीण संकट अगले खरीफ सीजन तक भी खिंच सकता है। सरकार की प्रतिक्रिया और त्रिपक्षीय बैठक की तारीख पर अब सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो महज़ मानसून की विफलता नहीं, बल्कि बुनियादी ढाँचे की कमज़ोरी भी उजागर करती है। सूखा घोषणा की माँग समय पर उठी है, पर असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार वैकल्पिक फसल सलाह और मुआवज़े का तंत्र पर्याप्त तेज़ी से सक्रिय कर पाएगी। कूरुवई सीजन की चूक का असर अगले रबी सीजन तक खिंचता है — इसलिए त्रिपक्षीय बैठक की माँग केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि नीतिगत रूप से अनिवार्य है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेट्टूर जलाशय से 12 जून को पानी क्यों छोड़ा जाता है?
12 जून को मेट्टूर जलाशय से कावेरी डेल्टा में कूरुवई धान की खेती के लिए पानी छोड़ने की परंपरा है, जो 28 जनवरी तक जारी रहती है। यह रिलीज तभी होती है जब जलाशय में पर्याप्त जलस्तर हो, जो इस वर्ष उपलब्ध नहीं है।
इस वर्ष मेट्टूर जलाशय का जलस्तर कितना है?
इस समय मेट्टूर जलाशय का स्तर 79.69 फीट और भंडारण 41.648 टीएमसी है, जो सामान्य रिलीज के लिए आवश्यक न्यूनतम स्तर से काफी कम है।
कूरुवई खेती पर इस संकट का क्या असर होगा?
कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष लगभग 3.5 लाख एकड़ में कूरुवई खेती का अनुमान है, जबकि सामान्य वर्षों में 6 लाख एकड़ से अधिक में बुवाई होती है। कम खेती से धान उत्पादन घटेगा और किसानों व खेतिहर मजदूरों की आजीविका प्रभावित होगी।
किसानों ने तमिलनाडु सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
किसानों ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं: कावेरी डेल्टा जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया जाए, अधिकारियों-विशेषज्ञों-किसान प्रतिनिधियों की त्रिपक्षीय बैठक बुलाई जाए, और सूखा घोषणा के लिए केंद्र सरकार से सहायता माँगी जाए।
बिजली कटौती का किसानों की सिंचाई पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
जो किसान बोरवेल सिंचाई पर निर्भर होकर बुवाई कर चुके हैं, उन्हें बार-बार होने वाली बिजली कटौती के कारण सिंचाई में रुकावट का सामना करना पड़ रहा है। इससे कई इलाकों में खड़ी फसल सूखने लगी है और वास्तविक बुवाई क्षेत्र अनुमान से भी कम रह सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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