मेट्टूर बांध 12 जून को खुलने की संभावना कम, कम जलस्तर और कमज़ोर मानसून पूर्वानुमान बड़ी चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मेट्टूर बांध को 12 जून की पारंपरिक तिथि पर खोले जाने की संभावना अब काफी कम हो गई है। कावेरी डेल्टा में कुरुवाई (धान की विशेष अगेती फसल) की सिंचाई के लिए यह तिथि दशकों से निर्धारित रही है, लेकिन वर्तमान में बांध में अपर्याप्त जल भंडारण और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के कमज़ोर दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वानुमान ने स्थिति को अनिश्चित बना दिया है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मौजूदा जल स्तर पारंपरिक जल निकासी के लिए पर्याप्त नहीं है।
मेट्टूर बांध की मौजूदा स्थिति
31 मई 2025 तक मेट्टूर जलाशय में मात्र 41 टीएमसीएफटी जल भंडार था, जबकि इसकी पूर्ण भंडारण क्षमता 93.47 टीएमसीएफटी है। बांध में लगभग 1,950 क्यूसेक जल का प्रवाह दर्ज किया जा रहा था और लगभग 1,000 क्यूसेक पानी निचले इलाकों में छोड़ा जा रहा था। यह आँकड़ा बताता है कि जलाशय अपनी क्षमता के लगभग 44 प्रतिशत पर ही है।
कर्नाटक के ऊपरी जलाशयों की स्थिति भी निराशाजनक
कावेरी बेसिन की स्थिति केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र के आँकड़ों के अनुसार, कृष्णा राजा सागर (KRS) और काबिनी जलाशयों में संयुक्त भंडारण केवल 16.09 टीएमसीएफटी था, जबकि इनकी कुल क्षमता 68.97 टीएमसीएफटी है। इसी प्रकार हरंगी और हेमावती जलाशयों में 45.6 टीएमसीएफटी की क्षमता के मुकाबले केवल 17.75 टीएमसीएफटी पानी संग्रहित था। यह ऊपरी इलाकों से पर्याप्त जल प्रवाह की उम्मीदों पर पानी फेरता है।
मानसून पूर्वानुमान और जल उपलब्धता
IMD ने दक्षिण-पश्चिम मानसून के विलंबित आगमन की भविष्यवाणी की है और वर्षा के अपने पूर्वानुमान को दीर्घकालिक औसत के 90 प्रतिशत तक संशोधित किया है, जो सामान्य से कम है। गौरतलब है कि इस वर्ष 2025-26 जल वर्ष के दौरान तमिलनाडु को बिलिगुंडुलु में कावेरी नदी से लगभग 330 टीएमसीएफटी पानी मिल चुका है, जो उसके वार्षिक हिस्से 176.85 टीएमसीएफटी से काफी अधिक है। हालाँकि यह आँकड़ा सकारात्मक है, परंतु वर्तमान भंडारण स्तर पर्याप्त नहीं है।
कुरुवाई खेती पर असर और विकल्प
अधिकारियों का अनुमान है कि वर्तमान जल स्तर के साथ लगभग 1 लाख बोरवेल और फिल्टर पॉइंट्स की सहायता से केवल 2.5 लाख एकड़ में ही कुरुवाई की खेती संभव होगी। यह हाल के वर्षों के सामान्य कुरुवाई क्षेत्रफल 4.4 लाख एकड़ और पिछले वर्ष के रिकॉर्ड 6.09 लाख एकड़ से काफी कम है। विशेषज्ञों के अनुसार, तीन लाख एकड़ भूमि की सिंचाई के लिए भी कम से कम 80 टीएमसीएफटी पानी की आवश्यकता होगी। रिपोर्टों के अनुसार, राज्य सरकार किसानों के लिए विशेष सहायता पैकेज और वैकल्पिक फसल के रूप में दालों की खेती को प्रोत्साहित करने के उपायों पर विचार कर रही है।
विशेषज्ञों की सलाह और ऐतिहासिक संदर्भ
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे विशेष रूप से काले चने की बुवाई जून के दूसरे सप्ताह तक पूरी कर लें, ताकि दक्षिण-पश्चिम मानसून के अंतिम चरण या उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान भारी बारिश से होने वाले संभावित नुकसान से बचा जा सके। यह ऐसे समय में आया है जब पिछली DMK सरकार (2021-26) के दौरान पाँच में से तीन वर्षों में बांध निर्धारित तिथि पर खोला गया था, जबकि 2022 में इसे समय से पहले खोला गया था। 2023 में सिंचाई के लिए पानी छोड़ना 29 जुलाई को शुरू हुआ था, जब भंडारण लगभग 88 टीएमसीएफटी तक पहुँचा था। इस वर्ष की स्थिति उससे भी अधिक चुनौतीपूर्ण प्रतीत होती है।