16 जुलाई 2026
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भारत-अमेरिका संबंध मजबूत करना ज़रूरी, ट्रंप नीतियों ने पहुँचाया नुकसान: सांसद सुहास सुब्रमण्यम

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भारत-अमेरिका संबंध मजबूत करना ज़रूरी, ट्रंप नीतियों ने पहुँचाया नुकसान: सांसद सुहास सुब्रमण्यम

सारांश

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम का दो-टूक संदेश — भारत-अमेरिका साझेदारी वैश्विक चुनौतियों की काट है, लेकिन ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति और अनिश्चित विदेश नीति ने इस रिश्ते को कमज़ोर किया है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख से अमेरिकी निकटता पर भी उन्होंने खुलकर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

सुहास सुब्रमण्यम (वर्जीनिया, 10वाँ कांग्रेसनल जिला ) ने 16 जुलाई 2026 को भारत-अमेरिका साझेदारी को वैश्विक चुनौतियों के लिए अनिवार्य बताया।
उन्होंने ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति को 'पूरी तरह विफल' करार देते हुए कहा कि इसने भारत-अमेरिका संबंधों को नुकसान पहुँचाया।
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के लिए 'अनुत्पादक' बताया।
पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के साथ ट्रंप प्रशासन की बढ़ती निकटता पर सुब्रमण्यम ने सार्वजनिक चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि अमेरिका को किसी भी सहयोगी — पाकिस्तान सहित — से लोकतंत्र और जवाबदेही पर सवाल पूछने का अधिकार है।
ट्रंप-मोदी बैठक के असर पर सुब्रमण्यम ने कहा — नीति 'राष्ट्रपति के मूड' पर निर्भर करती है, जो स्थिरता की कमी दर्शाता है।

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने 16 जुलाई 2026 को कहा कि वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करना आज की सबसे बड़ी कूटनीतिक आवश्यकता है। वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले इस डेमोक्रेट सांसद ने साथ ही ट्रंप प्रशासन की विदेश और व्यापार नीतियों पर कड़ा प्रहार किया।

भारत-अमेरिका संबंधों पर सुब्रमण्यम का स्पष्ट संदेश

सुब्रमण्यम ने कहा, 'हमें भारत-अमेरिका के बीच मजबूत संबंध बनाए रखने होंगे। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों का सामना करें और उन देशों का मुकाबला करें जो खुद को हमारे प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश करते हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन को नई दिल्ली के साथ रणनीतिक सहयोग बनाए रखना चाहिए और किसी भी सहयोगी देश को अलग-थलग नहीं करना चाहिए।

यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हालिया बैठक के बाद दोनों देशों के संबंधों की दिशा को लेकर कूटनीतिक हलकों में बहस तेज़ है।

ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर तीखी आलोचना

सुब्रमण्यम ने ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति को 'पूरी तरह विफल' करार दिया। उन्होंने कहा, 'इस प्रशासन की विदेश नीति पूरी तरह विफल रही है और इसने भारत-अमेरिका संबंधों को नुकसान पहुँचाया है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि यह नुकसान केवल भारत तक सीमित नहीं है — 'उन्होंने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में अमेरिका के संबंधों को नुकसान पहुँचाया है।'

व्यापार नीति पर सुब्रमण्यम ने कहा, 'राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ और उनके कुछ अन्य कदम भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने के लिहाज से उत्पादक साबित नहीं हुए हैं।' गौरतलब है कि पिछले दो दशकों में दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है, जिसमें क्वाड मंच — भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान — की भूमिका केंद्रीय रही है।

ट्रंप-मोदी बैठक पर संदेह

जब सुब्रमण्यम से पूछा गया कि क्या ट्रंप-मोदी बैठक से द्विपक्षीय संबंध बेहतर हुए हैं, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से परहेज़ किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन का अन्य देशों के प्रति रवैया 'लगातार एक जैसा नहीं रहा' और यह 'इस बात पर निर्भर करता है कि राष्ट्रपति किस मूड में उठते हैं।' यह टिप्पणी प्रशासन की नीतिगत अनिश्चितता पर एक तीखा कटाक्ष मानी जा रही है।

पाकिस्तान और जनरल मुनीर पर चिंता

सुब्रमण्यम ने ट्रंप प्रशासन के पाकिस्तान और वहाँ के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के साथ बढ़ते संपर्क पर भी अपनी चिंता सार्वजनिक की। उन्होंने कहा, 'मैं असीम मुनीर और पाकिस्तान में हो रही घटनाओं को लेकर अपनी चिंता को कई बार सार्वजनिक रूप से व्यक्त कर चुका हूँ।' उन्होंने जोड़ा कि सहयोगी देशों से भी जवाबदेही तय होनी चाहिए — 'इसमें पाकिस्तान भी शामिल है और वहाँ लोकतंत्र के साथ जो कुछ हुआ है, उस पर भी सवाल उठने चाहिए।'

सुब्रमण्यम कौन हैं और क्यों है उनकी आवाज़ अहम

सुहास सुब्रमण्यम वर्ष 2025 से वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उत्तरी वर्जीनिया में बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी समुदाय निवास करता है, जो प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और संघीय सेवाओं में सक्रिय है। भारतीय मूल का होने के कारण सुब्रमण्यम की टिप्पणियाँ अमेरिकी कांग्रेस में भारत-संबंधी नीति-विमर्श में विशेष महत्त्व रखती हैं। आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और इंडो-पैसिफिक रणनीति की समीक्षा के बीच उनके ये बयान नीतिगत दबाव का हिस्सा बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या इनके पीछे ठोस नीतिगत प्रतिबद्धता भी है। पाकिस्तान पर सुब्रमण्यम की चिंता वाजिब है, पर वाशिंगटन में दोनों दलों का पाकिस्तान-रिकॉर्ड मिला-जुला रहा है। भारत को इस बहस में सहयोगी की तलाश से अधिक, दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी पर ध्यान देना होगा।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुहास सुब्रमण्यम कौन हैं और भारत-अमेरिका संबंधों में उनकी क्या भूमिका है?
सुहास सुब्रमण्यम भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेट सांसद हैं जो वर्ष 2025 से वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय-अमेरिकी समुदाय है, जिससे वे अमेरिकी कांग्रेस में भारत-संबंधी नीति पर एक प्रमुख आवाज़ माने जाते हैं।
सुब्रमण्यम ने ट्रंप प्रशासन की किन नीतियों की आलोचना की?
सुब्रमण्यम ने ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति को 'पूरी तरह विफल' बताया और कहा कि राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने में 'अनुत्पादक' साबित हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन का अन्य देशों के प्रति रवैया 'लगातार एक जैसा नहीं रहा।'
पाकिस्तान और जनरल असीम मुनीर पर सुब्रमण्यम ने क्या कहा?
सुब्रमण्यम ने ट्रंप प्रशासन के पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के साथ बढ़ते संपर्क पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सहित सभी सहयोगी देशों से लोकतंत्र और जवाबदेही पर सवाल पूछे जाने चाहिए।
ट्रंप-मोदी बैठक के बाद भारत-अमेरिका संबंधों की स्थिति क्या है?
सुब्रमण्यम के अनुसार ट्रंप-मोदी बैठक के बावजूद संबंधों में स्थायी सुधार स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की नीति 'राष्ट्रपति के मूड' पर निर्भर करती है, जो नीतिगत अनिश्चितता को दर्शाता है।
भारत-अमेरिका साझेदारी की मौजूदा स्थिति क्या है?
पिछले दो दशकों में दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है। दोनों देश ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ क्वाड मंच के ज़रिए भी सहयोग करते हैं, हालाँकि टैरिफ विवाद और नीतिगत अनिश्चितता ने हाल के वर्षों में रिश्ते को जटिल बनाया है।
राष्ट्र प्रेस
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