मोदी-ट्रंप मुलाकात पर अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम: 'द्विपक्षीय रिश्ते सामान्य होने की उम्मीद'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जी7 समिट आउटरीच प्रोग्राम के दौरान एवियन में हुई मुलाकात — करीब 16 महीने के अंतराल के बाद — को भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। भारतीय-अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने कहा कि इस बैठक से दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण हुए रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने का अवसर मिल सकता है।
मुलाकात की पृष्ठभूमि
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब भारत-अमेरिका संबंधों में टैरिफ नीतियों और कुछ विवादास्पद बयानों के कारण खटास आई थी। सुब्रमण्यम ने कहा, "उम्मीद यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ संबंधों को सामान्य करेंगे। कुछ फैसलों और बयानों, जैसे टैरिफ नीतियों और भारत के बारे में की गई टिप्पणियों के कारण रिश्तों में तनाव आया है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका ने कई सहयोगी देशों के साथ संबंधों में दरार पैदा की है, इसलिए इस बैठक के बाद भारत के साथ संबंधों को फिर से स्थिर दिशा में लाना आवश्यक है।
व्यापार और टैरिफ का असर
सुब्रमण्यम ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि टैरिफ में की गई बड़ी बढ़ोतरी को बाद में आंशिक रूप से वापस लिया गया, लेकिन उसका नकारात्मक प्रभाव अभी भी महसूस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्जीनिया में कई व्यवसाय भारत-अमेरिका व्यापार पर निर्भर हैं और उन्हें इस नीति से सीधा नुकसान हुआ है, साथ ही उपभोक्ता कीमतों में भी वृद्धि देखी गई है।
उन्होंने कहा, "भारत और अमेरिका सहित सभी लोकतांत्रिक साझेदार देशों के लिए यह बेहतर होगा कि वे अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करें और सहयोग के नए रास्ते तलाशें।"
चीन के बढ़ते प्रभाव का संदर्भ
सुब्रमण्यम ने इस साझेदारी की रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि चीन एशिया में अपने प्रभाव का लगातार विस्तार कर रहा है। ऐसे में लोकतांत्रिक देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग और भी अनिवार्य हो जाता है। उन्होंने भारत को एक "प्रमुख लोकतांत्रिक साझेदार" बताते हुए कहा कि इस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग और गहरा होना चाहिए।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय पर नफरत की चिंता
सांसद सुब्रमण्यम ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ बढ़ती नफरत पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि उन्हें खुद सोशल मीडिया पर नस्लीय टिप्पणियों का सामना करना पड़ता है — जहाँ कुछ लोग उन्हें "वापस अपने देश जाओ" जैसी बातें कहते हैं या उन्हें "असली अमेरिकी नहीं" बताते हैं। उन्होंने कहा, "नफरत के हर रूप को सामने लाना और उसका विरोध करना जरूरी है, खासकर तब जब यह भारतीय-अमेरिकी समुदाय को निशाना बनाकर किया जा रहा हो।"
यह बैठक आने वाले हफ्तों में संभावित औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता की नींव मानी जा रही है, जिस पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।