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मेट्टूर बांध: 12 जून को पानी छोड़ना मुश्किल, जल भंडारण 93.45 टीएमसी क्षमता के 50% से नीचे

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मेट्टूर बांध: 12 जून को पानी छोड़ना मुश्किल, जल भंडारण 93.45 टीएमसी क्षमता के 50% से नीचे

सारांश

तमिलनाडु में मेट्टूर बांध का जल भंडारण 93.45 टीएमसी की कुल क्षमता के 50% से नीचे है। 12 जून की परंपरागत तिथि पर पानी छोड़ना संदिग्ध है, जिससे 12 जिलों के 16 लाख एकड़ में कुरुवई धान की बुवाई खतरे में है। अंतिम फैसला मानसूनी वर्षा और जल प्रवाह की समीक्षा के बाद होगा।

मुख्य बातें

मेट्टूर बांध में 5 जून तक जलस्तर 79.86 फीट और भंडारण 41.81 टीएमसी — कुल 93.45 टीएमसी क्षमता के 50% से कम।
12 जून को परंपरागत जल छोड़ने की संभावना बेहद कम; अधिकारियों ने मानसूनी वर्षा को निर्णायक बताया।
तमिलनाडु के 12 जिलों के लगभग 16 लाख एकड़ कृषि क्षेत्र की सिंचाई इस जल पर निर्भर।
देरी से कुरुवई धान फसल की बुवाई सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका।
2024 में भी कम भंडारण के कारण पानी छोड़ना जुलाई तक टला था; 2022 में मई में ही छोड़ा गया था।
राज्य सरकार जल भंडारण, वर्षा और प्रवाह की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लेगी।

तमिलनाडु के मेट्टूर बांध से 12 जून को परंपरागत रूप से कुरुवई धान फसल के लिए पानी छोड़े जाने की संभावना इस वर्ष बेहद कम है, क्योंकि बांध का जल भंडारण उसकी कुल क्षमता के 50 प्रतिशत से भी नीचे बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, निर्धारित तिथि पर पानी छोड़ना तभी संभव होगा जब कावेरी जलग्रहण क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों में उल्लेखनीय वर्षा हो और बांध में जल प्रवाह में पर्याप्त वृद्धि हो।

मौजूदा जल भंडारण की स्थिति

गुरुवार, 5 जून तक मेट्टूर बांध का जलस्तर 79.86 फीट दर्ज किया गया और बांध में 41.81 टीएमसी (हजार मिलियन घन फीट) पानी उपलब्ध था। बांध की कुल भंडारण क्षमता 93.45 टीएमसी है, यानी वर्तमान भंडारण इसके आधे से भी कम है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक मौसम की स्थिति में नाटकीय बदलाव नहीं आता, 12 जून की तारीख का पालन करना संभव नहीं होगा।

कावेरी डेल्टा के किसानों पर असर

मेट्टूर बांध से छोड़ा जाने वाला पानी तमिलनाडु के 12 जिलोंसेलम, इरोड, नमक्कल, करूर, तिरुचिरापल्ली, तंजावुर, तिरुवरूर, नागपट्टिनम, पुडुकोट्टई, कुड्डालोर, मयिलादुथुरै और पेरम्बलूर — के लगभग 16 लाख एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई करता है। कुरुवई, सांबा और थलाडी — तीनों प्रमुख धान फसलें इसी जल पर निर्भर हैं। यदि पानी छोड़ने में देरी होती है, तो कम अवधि में तैयार होने वाली कुरुवई फसल की बुवाई सबसे पहले प्रभावित होगी, जिससे किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा।

ऐतिहासिक संदर्भ: पिछले वर्षों की तुलना

गौरतलब है कि मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने की तारीख हर वर्ष जल भंडारण की स्थिति के अनुसार बदलती रही है। वर्ष 2022 में पर्याप्त जल उपलब्धता के चलते मई में ही पानी छोड़ दिया गया था, जो परंपरागत तारीख से भी पहले था। इसके विपरीत, 2024 में जल भंडारण कम रहने के कारण पानी छोड़ने की तारीख जुलाई तक टालनी पड़ी थी। अन्य वर्षों में 12 जून की परंपरागत तिथि का पालन किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में वर्षा में वृद्धि की संभावना जताई जा रही है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह

राज्य सरकार के अधिकारियों ने बताया कि जल भंडारण, वर्षा की स्थिति और कावेरी नदी में जल प्रवाह की समग्र समीक्षा के बाद ही मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। कावेरी डेल्टा क्षेत्र के किसान उम्मीद लगाए हैं कि आने वाले दिनों में मानसूनी वर्षा से बांध में जल आवक बढ़ेगी और फसल चक्र प्रभावित होने से बचेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि लाखों किसानों की फसल योजना की धुरी है — और इसका बार-बार टलना एक गहरी संरचनात्मक समस्या की ओर इशारा करता है। 2024 में जुलाई तक की देरी और अब 2025 में फिर वही संकट बताता है कि कावेरी जलग्रहण क्षेत्र में जल प्रबंधन और मानसून-पूर्व भंडारण की रणनीति पर पुनर्विचार ज़रूरी है। 16 लाख एकड़ और 12 जिलों की निर्भरता को देखते हुए, केवल मौसम पर आशा टिकाए रखना दीर्घकालिक समाधान नहीं है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेट्टूर बांध से 12 जून को पानी क्यों नहीं छोड़ा जा सकता?
बांध में वर्तमान जल भंडारण 41.81 टीएमसी है, जो कुल 93.45 टीएमसी क्षमता के 50% से कम है। अधिकारियों के अनुसार यह स्तर 12 जून को पानी छोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है, जब तक कि कावेरी जलग्रहण क्षेत्रों में उल्लेखनीय वर्षा न हो।
मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने की परंपरा क्या है?
हर वर्ष 12 जून को मेट्टूर बांध से कुरुवई धान फसल की बुवाई के लिए पानी छोड़ा जाता है। यह तमिलनाडु की कृषि परंपरा का हिस्सा है और कावेरी डेल्टा के 12 जिलों के किसान इसी तिथि के अनुसार अपनी बुवाई की योजना बनाते हैं।
देरी से कौन-सी फसलें और कितनी कृषि भूमि प्रभावित होगी?
पानी छोड़ने में देरी से तमिलनाडु के 12 जिलों के लगभग 16 लाख एकड़ कृषि क्षेत्र की सिंचाई प्रभावित होगी। कुरुवई, सांबा और थलाडी धान फसलें इस जल पर निर्भर हैं, जिनमें कम अवधि वाली कुरुवई फसल सबसे पहले प्रभावित होगी।
पिछले वर्षों में मेट्टूर बांध से पानी कब छोड़ा गया था?
2022 में पर्याप्त जल उपलब्धता के कारण मई में ही पानी छोड़ दिया गया था। 2024 में कम भंडारण के चलते जुलाई तक इंतजार करना पड़ा था। अन्य वर्षों में परंपरागत 12 जून की तारीख का पालन किया गया।
राज्य सरकार पानी छोड़ने का अंतिम फैसला कब और कैसे लेगी?
अधिकारियों के अनुसार जल भंडारण, वर्षा की स्थिति और कावेरी नदी में जल प्रवाह की समग्र समीक्षा के बाद राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेगी। दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति और आगामी दिनों में होने वाली बारिश इस फैसले में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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