12 जुलाई 2026
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कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की 51वीं बैठक: तमिलनाडु ने जून 2026 के लिए 9.91 टीएमसी पानी की मांग की

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कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की 51वीं बैठक: तमिलनाडु ने जून 2026 के लिए 9.91 टीएमसी पानी की मांग की

सारांश

कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की 51वीं बैठक में तमिलनाडु ने जून 2026 के लिए 9.91 टीएमसी पानी की माँग रखी। मेट्टूर बांध में 40.742 टीएमसी भंडारण के बीच कर्नाटक के अधिशेष जल दावे पर तीखी असहमति उभरी। मानसून पूर्वानुमान को आधार बनाकर तमिलनाडु ने यह माँग रखी।

मुख्य बातें

कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) की 51वीं बैठक 26 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई।
तमिलनाडु ने जून 2026 के लिए 9.91 टीएमसी पानी छोड़ने की माँग प्राधिकरण से की।
मेट्टूर बांध में 25 मई 2026 तक जल भंडारण 40.742 टीएमसी दर्ज; वर्तमान में 1,003 क्यूसेक प्रति सेकंड पानी छोड़ा जा रहा है।
सिंचाई वर्ष 2025-26 में तमिलनाडु को निर्धारित 176.685 टीएमसी के मुकाबले 329.166 टीएमसी पानी मिला।
कर्नाटक के अधिशेष जल को आवंटन में शामिल करने की माँग पर तमिलनाडु ने कड़ा विरोध जताया।
आईएमडी के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के 26 मई को केरल पहुँचने की संभावना।

कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) की 51वीं बैठक मंगलवार, 26 मई 2026 को नई दिल्ली में संपन्न हुई, जिसमें तमिलनाडु ने जून 2026 के लिए 9.91 टीएमसी पानी छोड़ने की माँग रखी। बैठक की अध्यक्षता प्राधिकरण के अध्यक्ष एस.के. हलदर ने की, जबकि तमिलनाडु के जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव एवं प्राधिकरण सदस्य डॉ. सत्यब्रत साहू ने चेन्नई स्थित सचिवालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए भाग लिया।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक में तमिलनाडु के प्रतिनिधि ने राज्य की जल भंडारण स्थिति का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि 25 मई 2026 तक मेट्टूर बांध में जल भंडारण 40.742 टीएमसी दर्ज किया गया है। फिलहाल बांध से पीने के पानी, औद्योगिक उपयोग और पर्यावरणीय प्रवाह की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रति सेकंड 1,003 क्यूबिक फीट पानी छोड़ा जा रहा है।

तमिलनाडु के प्रतिनिधि ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा सिंचाई वर्ष 2025-26 में — 1 जून 2025 से 24 मई 2026 तक — राज्य को बिलिगुंडुलु बिंदु पर निर्धारित 176.685 टीएमसी के मुकाबले 329.166 टीएमसी पानी प्राप्त हो चुका है, जिसमें अधिशेष जल प्रवाह भी सम्मिलित है।

कर्नाटक-तमिलनाडु विवाद का बिंदु

बैठक के दौरान कर्नाटक के प्रतिनिधि ने माँग उठाई कि राज्य द्वारा छोड़े गए अतिरिक्त पानी को भी जल आवंटन के हिसाब में शामिल किया जाए। इस पर तमिलनाडु ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

तमिलनाडु के प्रतिनिधि ने तर्क दिया कि कर्नाटक उस अधिशेष जल पर अधिकार नहीं जता सकता जिसे वह अपने जलाशयों में संग्रहित नहीं कर पाया और जिसे बाद में निचले क्षेत्रों की ओर प्रवाहित करना पड़ा। राज्य ने स्पष्ट किया कि ऐसे अधिशेष जल को नियमित आवंटन का हिस्सा मानना न्यायसंगत नहीं होगा और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों तथा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन अनिवार्य है।

मानसून पूर्वानुमान और तमिलनाडु की माँग

बैठक में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की रिपोर्ट का भी उल्लेख हुआ। रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के 26 मई को केरल में दस्तक देने की संभावना जताई गई है। मानसून के सामान्य रहने के अनुमान और कर्नाटक के जलाशयों में संभावित जल-प्रवाह को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु ने प्राधिकरण से जून 2026 के लिए 9.91 टीएमसी पानी सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

विवाद की पृष्ठभूमि

कावेरी जल बंटवारा दशकों से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच एक संवेदनशील और जटिल मुद्दा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत में मानसून पूर्व की स्थिति और जलाशयों का घटता स्तर दोनों राज्यों की चिंता बढ़ा रहे हैं। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय और प्राधिकरण के निर्देशों के बावजूद अधिशेष जल के हिसाब-किताब पर असहमति नई नहीं है।

प्राधिकरण की यह बैठक आने वाले महीनों में जल वितरण की रूपरेखा तय करने की दृष्टि से दोनों राज्यों के लिए निर्णायक मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी जून के लिए अतिरिक्त माँग यह दर्शाती है कि कावेरी विवाद आँकड़ों से नहीं, राजनीतिक विश्वास की कमी से संचालित होता है। कर्नाटक का अधिशेष जल को आवंटन में गिनने का तर्क तकनीकी रूप से नया नहीं है, लेकिन प्राधिकरण इसे हर बार टालता रहा है — जो मूल ढाँचे की खामियों को उजागर करता है। जब तक सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और प्राधिकरण के दिशा-निर्देश 'अधिशेष' की परिभाषा पर सहमति नहीं बनाते, यह टकराव हर मानसून से पहले दोहराता रहेगा।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की 51वीं बैठक में क्या हुआ?
26 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में तमिलनाडु ने जून 2026 के लिए 9.91 टीएमसी पानी छोड़ने की माँग रखी और मेट्टूर बांध की जल भंडारण स्थिति का ब्यौरा दिया। कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच अधिशेष जल के आवंटन को लेकर तीखी असहमति भी सामने आई।
तमिलनाडु ने जून 2026 के लिए 9.91 टीएमसी पानी की माँग क्यों की?
तमिलनाडु ने आईएमडी के मानसून पूर्वानुमान और कर्नाटक के जलाशयों में संभावित जल-प्रवाह को आधार बनाकर यह माँग रखी। राज्य का तर्क है कि मानसून के सामान्य रहने की स्थिति में पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।
मेट्टूर बांध में अभी कितना पानी है?
25 मई 2026 तक मेट्टूर बांध में जल भंडारण 40.742 टीएमसी दर्ज किया गया है। फिलहाल बांध से पीने के पानी, औद्योगिक उपयोग और पर्यावरणीय प्रवाह के लिए प्रति सेकंड 1,003 क्यूबिक फीट पानी छोड़ा जा रहा है।
कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच अधिशेष जल पर विवाद क्या है?
कर्नाटक चाहता है कि उसके जलाशयों से बहकर आए अतिरिक्त पानी को तमिलनाडु के आवंटन में शामिल माना जाए। तमिलनाडु इसका विरोध करते हुए कहता है कि जिस पानी को कर्नाटक संग्रहित नहीं कर पाया और जो स्वाभाविक रूप से बह गया, उस पर आवंटन का दावा नहीं किया जा सकता।
कावेरी जल विवाद में सर्वोच्च न्यायालय की क्या भूमिका है?
सर्वोच्च न्यायालय ने कावेरी जल बंटवारे पर अपने आदेश दिए हैं और प्राधिकरण के दिशा-निर्देश उन्हीं पर आधारित हैं। तमिलनाडु ने बैठक में स्पष्ट किया कि इन आदेशों का पूर्ण पालन अनिवार्य है और अधिशेष जल को नियमित आवंटन में शामिल करना न्यायसंगत नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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