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काबिनी डैम भरने की कगार पर, शिवकुमार बोले — पानी छोड़ना अनिवार्य, विरोध वापस लें

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काबिनी डैम भरने की कगार पर, शिवकुमार बोले — पानी छोड़ना अनिवार्य, विरोध वापस लें

सारांश

काबिनी डैम में 40,000 क्यूसेक की आवक के साथ जलाशय भरने की कगार पर है। CM शिवकुमार ने साफ कह दिया — पानी छोड़ना अब प्रकृति की मजबूरी है, राजनीति की नहीं। सुप्रीम कोर्ट के 177 टीएमसी के आदेश और तकनीकी वास्तविकता के बीच विरोध-प्रदर्शन की गुंजाइश कम है।

मुख्य बातें

काबिनी जलाशय में पानी की आवक 40,000 क्यूसेक तक पहुँची, जलाशय भरने की कगार पर।
CM डीके शिवकुमार ने 1 अगस्त 2026 को मैसूरु में कहा — जलाशय भरने के बाद पानी रोकना तकनीकी रूप से असंभव।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 177 टीएमसी कावेरी जल छोड़ना अनिवार्य।
शिवकुमार ने प्रदर्शनकारियों को जल-विसर्जन स्थलों के पास न आने की चेतावनी दी — तेज़ धारा से जान का खतरा।
कावेरी विवाद पर राजनीति करने का आरोप BJP पर लगाया; कर्नाटक बंद के आह्वान को निराधार बताया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 1 अगस्त 2026 को मैसूरु एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि काबिनी जलाशय तेज़ी से अपनी भंडारण क्षमता की ओर बढ़ रहा है और एक बार भर जाने के बाद तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी का पानी छोड़ना तकनीकी रूप से अनिवार्य हो जाएगा। उन्होंने उन संगठनों से आंदोलन वापस लेने की अपील की जो इस जल-विसर्जन के विरोध में सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं।

मुख्य घटनाक्रम

शिवकुमार ने बताया कि काबिनी जलाशय में पानी की आवक 40,000 क्यूसेक तक पहुँच चुकी है। उन्होंने कहा, 'काबिनी जलाशय भर रहा है। एक बार डैम भर जाए तो पानी छोड़ना ही पड़ता है। इसे रोक पाना संभव नहीं है। मैं उन लोगों से विनम्र अपील करता हूँ जो पानी छोड़ने के खिलाफ प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं, वे अपना फैसला दोबारा सोचें।' अधिकारी जलाशय के जल-स्तर की हर घंटे निगरानी कर रहे हैं।

सुरक्षा की चेतावनी

मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारियों को पानी छोड़े जाने वाले स्थानों के निकट एकत्र न होने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने आगाह किया कि तेज़ जलधारा जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। कर्नाटक बंद के आह्वान को उन्होंने निराधार बताया और कहा कि लोकतांत्रिक विरोध का सम्मान होना चाहिए, परंतु मौजूदा परिस्थितियों में ऐसे प्रदर्शन अनावश्यक हैं।

कानूनी और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 177 टीएमसी कावेरी जल छोड़ना अनिवार्य है। शिवकुमार ने याद दिलाया कि एस. बंगारप्पा, एस.एम. कृष्णा, एच.डी. देवेगौड़ा और सिद्धारमैया की पूर्ववर्ती सरकारों ने भी परिस्थितियों के अनुसार पानी छोड़ा था। उन्होंने यह भी बताया कि पिछली स्थितियों की तुलना में अभी तक आधी मात्रा में भी पानी नहीं छोड़ा गया है, फिर भी कर्नाटक की माँगें खारिज की जाती रही हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

शिवकुमार ने कावेरी विवाद पर राजनीति करने का आरोप भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर लगाया। उन्होंने एचडी कुमारस्वामी के बयानों का भी उल्लेख किया और कहा कि तमिलनाडु के कुछ नेता इस मुद्दे पर राजनीतिक स्वार्थ साध रहे हैं। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के पास सभी जलाशयों के जल-स्तर की पूर्ण जानकारी उपलब्ध है। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई द्वारा दिल्ली में किए गए प्रयासों का भी उन्होंने उल्लेख किया।

आगे क्या होगा

जलाशय की भंडारण क्षमता पूर्ण होते ही सरकार को तकनीकी रूप से पानी छोड़ना होगा। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि अदालत का फैसला दोनों राज्यों के हितों में संतुलन बनाने के उद्देश्य से है और कर्नाटक सरकार न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक संदर्भ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता — कावेरी विवाद दशकों से कर्नाटक की चुनावी राजनीति का सबसे संवेदनशील तार रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश और जलवायु-जनित बाढ़ की मजबूरी के बीच सरकार की स्थिति वैधानिक रूप से मज़बूत है, परंतु किसान-समर्थक छवि बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी। BJP पर राजनीति का आरोप लगाते हुए शिवकुमार खुद एक राजनीतिक संदेश दे रहे हैं — यह संयोग नहीं। असली सवाल यह है कि CWMA के पास डेटा होने के बावजूद दीर्घकालिक जल-साझाकरण फ्रेमवर्क क्यों नहीं बन पाया, जो हर मानसून में इस संकट को टाल सके।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

काबिनी जलाशय में अभी पानी की क्या स्थिति है?
1 अगस्त 2026 तक काबिनी जलाशय में पानी की आवक 40,000 क्यूसेक तक पहुँच चुकी है और यह अपनी भंडारण क्षमता के करीब है। अधिकारी हर घंटे जल-स्तर की निगरानी कर रहे हैं।
कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए कितना कावेरी जल छोड़ना है?
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 177 टीएमसी कावेरी जल छोड़ना अनिवार्य है। यह आदेश अदालत द्वारा बरकरार रखा गया है।
CM शिवकुमार ने प्रदर्शनकारियों से क्या अपील की?
शिवकुमार ने विरोध-प्रदर्शन वापस लेने और पानी छोड़े जाने वाले स्थानों के पास न आने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि तेज़ जलधारा जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
कर्नाटक बंद के आह्वान पर मुख्यमंत्री का क्या रुख है?
शिवकुमार ने कर्नाटक बंद के आह्वान को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध का सम्मान होना चाहिए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ऐसे प्रदर्शन ज़रूरी नहीं हैं।
कावेरी विवाद में BJP पर क्या आरोप लगाए गए?
CM शिवकुमार ने BJP पर कावेरी मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने एचडी कुमारस्वामी के बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ नेता इस जल-संकट का राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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