कावेरी जल विवाद: कर्नाटक सरकार 2 अगस्त को बुलाएगी सर्वदलीय बैठक, CM शिवकुमार करेंगे अध्यक्षता
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने कावेरी जल विवाद पर राज्य की भावी रणनीति तय करने के लिए 2 अगस्त को बेंगलुरु में सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने 30 जुलाई को नई दिल्ली में यह जानकारी दी और स्पष्ट किया कि बैठक उनके आधिकारिक आवास 'कृष्णा' में आयोजित होगी। यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है जब कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने का निर्देश दिया है।
बैठक में कौन होगा शामिल
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्री, कावेरी बेसिन क्षेत्र के सांसद, सभी राजनीतिक दलों के शीर्ष नेता और विधानसभा में विभिन्न दलों के फ्लोर लीडर आमंत्रित किए गए हैं। बैठक का एकमात्र एजेंडा कावेरी जल विवाद में राज्य की अगली कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर विस्तृत विमर्श करना है।
राजनीतिक एकजुटता का संकेत
शिवकुमार ने कहा कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, वी. सोमन्ना, पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और जगदीश शेट्टार समेत सभी सांसद और केंद्रीय मंत्री राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए सहयोग कर रहे हैं। यह एकजुटता इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच आमतौर पर तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा देखी जाती है।
कावेरी विनियमन समिति का निर्देश और विरोध
गौरतलब है कि कावेरी जल विनियमन समिति के हालिया निर्देश के बाद राज्य में विरोध प्रदर्शनों की लहर उठ खड़ी हुई है। किसान संगठनों और कन्नड़ संगठनों ने कई स्थानों पर प्रदर्शन किए हैं और माँग की है कि राज्य सरकार कर्नाटक के पेयजल हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए। शिवकुमार ने आश्वस्त किया कि वरिष्ठ अधिकारी संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष राज्य का पक्ष मजबूती से रख रहे हैं और वे स्वयं पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
तमिलनाडु से टकराव पर संयमित रुख
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से संभावित मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर शिवकुमार ने टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि वे किसी भी टकराव की स्थिति नहीं चाहते और देश का कानून सर्वोपरि है। उनके अनुसार दोनों राज्यों के लोगों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए — यह रुख दर्शाता है कि सरकार कानूनी मार्ग को प्राथमिकता दे रही है।
आगे क्या होगा
2 अगस्त की सर्वदलीय बैठक के बाद राज्य सरकार संबंधित प्राधिकरणों और संभवतः सर्वोच्च न्यायालय में अपनी अगली कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा तय करेगी। कावेरी विवाद दशकों पुराना है और हर बार जल छोड़ने के निर्देश के साथ यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो जाता है — इस बार भी स्थिति अलग नहीं है।