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कावेरी जल विवाद: कर्नाटक सरकार 2 अगस्त को बुलाएगी सर्वदलीय बैठक, CM शिवकुमार करेंगे अध्यक्षता

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कावेरी जल विवाद: कर्नाटक सरकार 2 अगस्त को बुलाएगी सर्वदलीय बैठक, CM शिवकुमार करेंगे अध्यक्षता

सारांश

कावेरी जल विनियमन समिति के 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश के बाद कर्नाटक में विरोध तेज है। CM शिवकुमार ने 2 अगस्त को सर्वदलीय बैठक बुलाई है जिसमें सत्ता-विपक्ष एक साथ रणनीति बनाएंगे — यह दुर्लभ राजनीतिक एकजुटता राज्य के जल हितों की गंभीरता को रेखांकित करती है।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने कावेरी जल विवाद पर 2 अगस्त को बेंगलुरु में सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
शिवकुमार के आधिकारिक आवास 'कृष्णा' में होगी; पूर्व मुख्यमंत्री, सांसद और सभी दलों के नेता आमंत्रित।
कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने का निर्देश दिया है।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी , वी.
सोमन्ना और पूर्व CM बसवराज बोम्मई समेत BJP नेता भी राज्य हित में सहयोग कर रहे हैं।
किसान और कन्नड़ संगठनों ने कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन शुरू किए हैं।

कर्नाटक सरकार ने कावेरी जल विवाद पर राज्य की भावी रणनीति तय करने के लिए 2 अगस्त को बेंगलुरु में सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने 30 जुलाई को नई दिल्ली में यह जानकारी दी और स्पष्ट किया कि बैठक उनके आधिकारिक आवास 'कृष्णा' में आयोजित होगी। यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है जब कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने का निर्देश दिया है।

बैठक में कौन होगा शामिल

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्री, कावेरी बेसिन क्षेत्र के सांसद, सभी राजनीतिक दलों के शीर्ष नेता और विधानसभा में विभिन्न दलों के फ्लोर लीडर आमंत्रित किए गए हैं। बैठक का एकमात्र एजेंडा कावेरी जल विवाद में राज्य की अगली कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर विस्तृत विमर्श करना है।

राजनीतिक एकजुटता का संकेत

शिवकुमार ने कहा कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, वी. सोमन्ना, पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और जगदीश शेट्टार समेत सभी सांसद और केंद्रीय मंत्री राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए सहयोग कर रहे हैं। यह एकजुटता इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच आमतौर पर तीखी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा देखी जाती है।

कावेरी विनियमन समिति का निर्देश और विरोध

गौरतलब है कि कावेरी जल विनियमन समिति के हालिया निर्देश के बाद राज्य में विरोध प्रदर्शनों की लहर उठ खड़ी हुई है। किसान संगठनों और कन्नड़ संगठनों ने कई स्थानों पर प्रदर्शन किए हैं और माँग की है कि राज्य सरकार कर्नाटक के पेयजल हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए। शिवकुमार ने आश्वस्त किया कि वरिष्ठ अधिकारी संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष राज्य का पक्ष मजबूती से रख रहे हैं और वे स्वयं पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

तमिलनाडु से टकराव पर संयमित रुख

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से संभावित मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर शिवकुमार ने टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि वे किसी भी टकराव की स्थिति नहीं चाहते और देश का कानून सर्वोपरि है। उनके अनुसार दोनों राज्यों के लोगों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए — यह रुख दर्शाता है कि सरकार कानूनी मार्ग को प्राथमिकता दे रही है।

आगे क्या होगा

2 अगस्त की सर्वदलीय बैठक के बाद राज्य सरकार संबंधित प्राधिकरणों और संभवतः सर्वोच्च न्यायालय में अपनी अगली कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा तय करेगी। कावेरी विवाद दशकों पुराना है और हर बार जल छोड़ने के निर्देश के साथ यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो जाता है — इस बार भी स्थिति अलग नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस बैठक से कोई नई कानूनी रणनीति निकलेगी या यह महज एक सांकेतिक कदम बनकर रह जाएगी। दशकों से यह विवाद हर मानसून में उफनता है और हर बार बैठकें होती हैं, बयान आते हैं — पर स्थायी समाधान नहीं निकलता। 3,500 क्यूसेक के निर्देश के खिलाफ कानूनी विकल्प सीमित हैं, और विरोध प्रदर्शनों को राजनीतिक ऊर्जा में बदलना आसान है, ठोस राहत दिलाना नहीं। जब तक अंतर-राज्यीय जल विवाद के लिए कोई बाध्यकारी और समयबद्ध तंत्र नहीं बनता, ऐसी बैठकें समस्या का हल नहीं, उसका प्रबंधन मात्र हैं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक सरकार ने 2 अगस्त की सर्वदलीय बैठक क्यों बुलाई है?
कावेरी जल विनियमन समिति के उस निर्देश के बाद यह बैठक बुलाई गई है जिसमें कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने को कहा गया है। बैठक का उद्देश्य सभी दलों के साथ मिलकर राज्य की आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति तय करना है।
कावेरी जल विनियमन समिति का ताज़ा आदेश क्या है?
समिति ने कर्नाटक को 15 दिनों की अवधि तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु को छोड़ने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद कर्नाटक में किसान और कन्नड़ संगठनों ने कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
सर्वदलीय बैठक में कौन-कौन शामिल होगा?
बैठक में राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्री, कावेरी बेसिन क्षेत्र के सांसद, सभी राजनीतिक दलों के नेता और विधानसभा में विभिन्न दलों के फ्लोर लीडर शामिल होंगे। BJP के केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और पूर्व CM बसवराज बोम्मई भी सहयोग कर रहे हैं।
कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी विवाद क्या है?
कावेरी नदी के जल बँटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच दशकों पुराना विवाद है। कावेरी जल विनियमन समिति और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के तहत कर्नाटक को तमिलनाडु को निर्धारित मात्रा में पानी छोड़ना होता है, जिसे कर्नाटक के किसान अपने पेयजल और सिंचाई हितों के लिए नुकसानदेह मानते हैं।
CM शिवकुमार का तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से मुलाकात पर क्या रुख है?
शिवकुमार ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से मुलाकात के सवाल पर सीधी टिप्पणी से परहेज किया। उन्होंने कहा कि वे किसी टकराव की स्थिति नहीं चाहते और देश का कानून सर्वोपरि है, जो दर्शाता है कि राज्य सरकार फिलहाल कानूनी मार्ग को प्राथमिकता दे रही है।
राष्ट्र प्रेस
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