कावेरी जल विवाद: कर्नाटक सरकार बुलाएगी सर्वदलीय बैठक, 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के आदेश पर आपत्ति
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 29 जुलाई 2026 को कावेरी जल विवाद पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब कावेरी जल विनियामक प्राधिकरण (CWRC) ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है, और राज्य स्वयं गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार को पुष्टि की कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के प्रस्ताव पर यह बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति तय की जाएगी।
क्या है विवाद की मौजूदा स्थिति
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि जब-जब कर्नाटक के जलाशयों में पर्याप्त जल उपलब्ध रहा है, राज्य ने निर्धारित मात्रा से अधिक पानी भी तमिलनाडु को दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में भी कर्नाटक ने आवश्यकता से अधिक जल छोड़ा था। किंतु इस बार राज्य स्वयं गंभीर पेयजल संकट में है, इसलिए 3,500 क्यूसेक छोड़ने के निर्देश की उचितता पर गंभीर पुनर्विचार जरूरी है।
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई जिले सूखे की चपेट में हैं और किसान संगठन मंड्या तथा आसपास के क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। परमेश्वर ने कहा कि किसानों का विरोध स्वाभाविक है, क्योंकि वे राज्य में जल की कमी की गंभीरता से भलीभांति परिचित हैं।
कानूनी रणनीति और विशेषज्ञों की भूमिका
आगे की कानूनी रणनीति तय करने के लिए मंगलवार को नई दिल्ली में कानूनी विशेषज्ञों के साथ एक अहम बैठक हुई, जिसमें जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी भी शामिल रहे। परमेश्वर ने बताया कि विशेषज्ञों से निरंतर परामर्श लिया जाएगा और उसी के आधार पर आगे का निर्णय किया जाएगा।
मेकेदातु परियोजना और तमिलनाडु का रुख
मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वायर परियोजना पर परमेश्वर ने कहा कि तमिलनाडु केवल अपने आवंटित जल हिस्से को लेकर आपत्ति उठा सकता है, परंतु परियोजना का विरोध करने का उसे अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अदालत भी यह स्पष्ट कर चुकी है कि तमिलनाडु की आपत्ति उसे आवंटित जल हिस्से तक ही सीमित रहनी चाहिए।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मेकेदातु परियोजना का विरोध करते हुए पत्र लिखे जाने की खबरों पर परमेश्वर ने कहा कि कोई भी प्रधानमंत्री को पत्र लिख सकता है, लेकिन अदालत का फैसला सर्वोपरि है और वह कर्नाटक के पक्ष में है।
दोनों राज्यों के बीच संवाद की संभावना
परमेश्वर ने बताया कि 4 अगस्त को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के बेंगलुरु आने की संभावना है, जिस दौरान कावेरी जल विवाद पर दोनों राज्यों के बीच चर्चा हो सकती है। उन्होंने कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों के बीच नदी जोड़ो परियोजनाओं पर हुई हालिया चर्चा का उदाहरण देते हुए कहा कि पड़ोसी राज्यों के बीच संवाद संघीय ढाँचे की सामान्य प्रक्रिया है।
सूखे की मार और केंद्र से राहत की माँग
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र को कर्नाटक में गंभीर सूखे की स्थिति से पहले ही अवगत करा दिया है। कर्नाटक ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों की घोषणा के लिए लागू 10 मानकों में कुछ में ढील देने का अनुरोध किया है, ताकि विशेष रूप से उत्तर कर्नाटक के प्रभावित क्षेत्रों को तत्काल राहत मिल सके। परमेश्वर ने कहा, 'यदि 80 प्रतिशत तक वर्षा की कमी वाले तालुकों को भी सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जा सकता, तो मौजूदा मानदंड अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर रहे हैं।' आगामी सर्वदलीय बैठक में इन सभी मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।