29 जुलाई 2026
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कावेरी जल विवाद: कर्नाटक सरकार बुलाएगी सर्वदलीय बैठक, 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के आदेश पर आपत्ति

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कावेरी जल विवाद: कर्नाटक सरकार बुलाएगी सर्वदलीय बैठक, 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के आदेश पर आपत्ति

सारांश

कावेरी जल विवाद एक बार फिर तीव्र हो गया है — इस बार कर्नाटक खुद सूखे की मार झेल रहा है और उस पर तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश है। सर्वदलीय बैठक, कानूनी रणनीति और 4 अगस्त को संभावित मुख्यमंत्री-स्तरीय वार्ता — कर्नाटक हर मोर्चे पर सक्रिय है।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार के प्रस्ताव पर कावेरी जल विवाद पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया।
कावेरी जल विनियामक प्राधिकरण (CWRC) ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है, जिस पर राज्य ने आपत्ति जताई है।
परमेश्वर ने कहा कि राज्य स्वयं गंभीर पेयजल संकट में है; मंगलवार को नई दिल्ली में कानूनी विशेषज्ञों और जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी के साथ रणनीतिक बैठक हुई।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के 4 अगस्त को बेंगलुरु आने की संभावना; कावेरी मुद्दे पर द्विपक्षीय चर्चा हो सकती है।
कर्नाटक ने केंद्र से सूखा घोषणा के 10 मानकों में ढील देने की माँग की, विशेष रूप से उत्तर कर्नाटक के लिए जहाँ 80% तक वर्षा की कमी है।

कर्नाटक सरकार ने 29 जुलाई 2026 को कावेरी जल विवाद पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब कावेरी जल विनियामक प्राधिकरण (CWRC) ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है, और राज्य स्वयं गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहा है। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बुधवार को पुष्टि की कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के प्रस्ताव पर यह बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति तय की जाएगी।

क्या है विवाद की मौजूदा स्थिति

उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि जब-जब कर्नाटक के जलाशयों में पर्याप्त जल उपलब्ध रहा है, राज्य ने निर्धारित मात्रा से अधिक पानी भी तमिलनाडु को दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में भी कर्नाटक ने आवश्यकता से अधिक जल छोड़ा था। किंतु इस बार राज्य स्वयं गंभीर पेयजल संकट में है, इसलिए 3,500 क्यूसेक छोड़ने के निर्देश की उचितता पर गंभीर पुनर्विचार जरूरी है।

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई जिले सूखे की चपेट में हैं और किसान संगठन मंड्या तथा आसपास के क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। परमेश्वर ने कहा कि किसानों का विरोध स्वाभाविक है, क्योंकि वे राज्य में जल की कमी की गंभीरता से भलीभांति परिचित हैं।

कानूनी रणनीति और विशेषज्ञों की भूमिका

आगे की कानूनी रणनीति तय करने के लिए मंगलवार को नई दिल्ली में कानूनी विशेषज्ञों के साथ एक अहम बैठक हुई, जिसमें जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी भी शामिल रहे। परमेश्वर ने बताया कि विशेषज्ञों से निरंतर परामर्श लिया जाएगा और उसी के आधार पर आगे का निर्णय किया जाएगा।

मेकेदातु परियोजना और तमिलनाडु का रुख

मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वायर परियोजना पर परमेश्वर ने कहा कि तमिलनाडु केवल अपने आवंटित जल हिस्से को लेकर आपत्ति उठा सकता है, परंतु परियोजना का विरोध करने का उसे अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अदालत भी यह स्पष्ट कर चुकी है कि तमिलनाडु की आपत्ति उसे आवंटित जल हिस्से तक ही सीमित रहनी चाहिए।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मेकेदातु परियोजना का विरोध करते हुए पत्र लिखे जाने की खबरों पर परमेश्वर ने कहा कि कोई भी प्रधानमंत्री को पत्र लिख सकता है, लेकिन अदालत का फैसला सर्वोपरि है और वह कर्नाटक के पक्ष में है।

दोनों राज्यों के बीच संवाद की संभावना

परमेश्वर ने बताया कि 4 अगस्त को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के बेंगलुरु आने की संभावना है, जिस दौरान कावेरी जल विवाद पर दोनों राज्यों के बीच चर्चा हो सकती है। उन्होंने कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों के बीच नदी जोड़ो परियोजनाओं पर हुई हालिया चर्चा का उदाहरण देते हुए कहा कि पड़ोसी राज्यों के बीच संवाद संघीय ढाँचे की सामान्य प्रक्रिया है।

सूखे की मार और केंद्र से राहत की माँग

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र को कर्नाटक में गंभीर सूखे की स्थिति से पहले ही अवगत करा दिया है। कर्नाटक ने सूखाग्रस्त क्षेत्रों की घोषणा के लिए लागू 10 मानकों में कुछ में ढील देने का अनुरोध किया है, ताकि विशेष रूप से उत्तर कर्नाटक के प्रभावित क्षेत्रों को तत्काल राहत मिल सके। परमेश्वर ने कहा, 'यदि 80 प्रतिशत तक वर्षा की कमी वाले तालुकों को भी सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जा सकता, तो मौजूदा मानदंड अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर रहे हैं।' आगामी सर्वदलीय बैठक में इन सभी मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार की स्थिति अलग है — कर्नाटक खुद सूखे की चपेट में है और उस पर पड़ोसी राज्य को पानी देने का कानूनी दबाव है। सर्वदलीय बैठक राजनीतिक एकजुटता का संकेत है, पर असली सवाल यह है कि CWRC के आदेश को चुनौती देने की कानूनी सीमाएँ क्या हैं। मेकेदातु परियोजना पर अदालत का रुख कर्नाटक के पक्ष में बताया जा रहा है, फिर भी परियोजना वर्षों से अटकी है — यह दर्शाता है कि कानूनी जीत और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटना कितना कठिन है। केंद्र से सूखा मानकों में ढील की माँग भी लंबे समय से लंबित है; यदि 80% वर्षा की कमी भी राहत के लिए पर्याप्त नहीं मानी जाती, तो नीतिगत ढाँचे पर गंभीर पुनर्विचार की जरूरत है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक ने कावेरी जल विवाद पर सर्वदलीय बैठक क्यों बुलाई है?
कर्नाटक सरकार ने सर्वदलीय बैठक इसलिए बुलाई है क्योंकि CWRC ने राज्य को तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है, जबकि राज्य स्वयं गंभीर पेयजल संकट में है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के प्रस्ताव पर यह बैठक आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति तय करने के लिए बुलाई जा रही है।
CWRC का 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश क्या है?
कावेरी जल विनियामक प्राधिकरण (CWRC) ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। कर्नाटक का कहना है कि राज्य में गंभीर पेयजल संकट के मद्देनजर यह निर्देश इस समय उचित नहीं है, हालांकि अतीत में राज्य ने निर्धारित मात्रा से अधिक पानी भी दिया है।
मेकेदातु परियोजना क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वायर परियोजना कर्नाटक की एक प्रस्तावित बाँध परियोजना है जो कावेरी नदी पर बनाई जानी है। तमिलनाडु इस परियोजना का विरोध करता रहा है, लेकिन कर्नाटक का कहना है कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि तमिलनाडु केवल अपने आवंटित जल हिस्से को लेकर आपत्ति उठा सकता है, परियोजना का विरोध नहीं कर सकता।
4 अगस्त को बेंगलुरु में क्या होने की संभावना है?
4 अगस्त को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के बेंगलुरु आने की संभावना है, जिस दौरान कावेरी जल विवाद पर दोनों राज्यों के बीच चर्चा हो सकती है। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने कहा कि संघीय ढाँचे में पड़ोसी राज्यों के बीच संवाद सामान्य प्रक्रिया है।
कर्नाटक ने केंद्र से सूखे के मानकों में ढील क्यों माँगी है?
कर्नाटक ने केंद्र से सूखा घोषणा के 10 मानकों में कुछ में ढील देने का अनुरोध किया है ताकि उत्तर कर्नाटक के प्रभावित क्षेत्रों को तत्काल राहत मिल सके। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने कहा कि जहाँ 80% तक वर्षा की कमी है, वहाँ भी यदि सूखा घोषित नहीं किया जा सकता तो मौजूदा मानदंड अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर रहे।
राष्ट्र प्रेस
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