कावेरी विवाद: तमिलनाडु CM विजय ने बेंगलुरु दौरा टाला, कर्नाटक में बड़े पैमाने पर विरोध
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 3 अगस्त 2026 को बेंगलुरु का अपना प्रस्तावित दौरा स्थगित कर दिया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कावेरी जल-बंटवारे के विवाद से उपजे तीव्र राजनीतिक और सार्वजनिक तनाव का हवाला देते हुए बैठक टालने का अनुरोध किया था। यह दौरा दोनों राज्यों के बीच इस पुराने विवाद पर पहली सीधी मुख्यमंत्री-स्तरीय बातचीत का अवसर बनने वाला था।
मुख्य घटनाक्रम
कावेरी जल विनियमन समिति ने 29 जुलाई से 15 दिनों तक कर्नाटक को प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ने का निर्देश दिया था। इसके तुरंत बाद कर्नाटक के कई हिस्सों, विशेष रूप से मांड्या क्षेत्र में, बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन भड़क उठे। इसी दबाव के चलते राज्य सरकार ने बैठक स्थगित करने की माँग की।
कर्नाटक की अपील खारिज
स्थिति तब और जटिल हो गई जब कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने जल विनियमन समिति के आदेश पर रोक लगाने की कर्नाटक की अपील को खारिज कर दिया। इस फैसले के बाद विरोध-प्रदर्शनों की लहर और तेज हो गई। सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक ने स्पष्ट किया कि मौजूदा माहौल इस स्तर पर द्विपक्षीय वार्ता के लिए अनुकूल नहीं है।
दौरे की पृष्ठभूमि
यह प्रस्तावित बैठक मूल रूप से मुख्यमंत्री विजय की पहल पर तय हुई थी, जिसमें कावेरी नदी जल-बंटवारे और विवादास्पद मेकेदातु जलाशय परियोजना सहित प्रमुख अंतर-राज्यीय मुद्दों पर चर्चा की योजना थी। दौरे पर अंतिम निर्णय लेने से पहले मुख्यमंत्री विजय ने जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि कावेरी जल विवाद दशकों पुराना है और दोनों राज्यों के किसानों की आजीविका से सीधे जुड़ा है। मांड्या जैसे कृषि-प्रधान जिलों में जल-आवंटन को लेकर संवेदनशीलता अत्यधिक है, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी अत्यंत नाजुक बना रहता है।
क्या होगा आगे
फिलहाल दोनों राज्यों के बीच नई बैठक की कोई तारीख तय नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कर्नाटक में जन-आक्रोश शांत नहीं होता और न्यायिक या प्राधिकरण स्तर पर कोई स्पष्टता नहीं आती, तब तक दोनों पक्षों के बीच सार्थक वार्ता की संभावना सीमित रहेगी।