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कावेरी जल विवाद: 3 अगस्त को बेंगलुरु में एक दशक बाद पहली बार आमने-सामने होंगे कर्नाटक-तमिलनाडु के मुख्यमंत्री

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कावेरी जल विवाद: 3 अगस्त को बेंगलुरु में एक दशक बाद पहली बार आमने-सामने होंगे कर्नाटक-तमिलनाडु के मुख्यमंत्री

सारांश

एक दशक से अधिक की चुप्पी के बाद कर्नाटक और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री 3 अगस्त को बेंगलुरु में आमने-सामने बैठेंगे। CWRA के पानी छोड़ने के आदेश, मानसून की कमी और मेकेदातु विवाद के बीच यह वार्ता भारत के सबसे पुराने नदी विवाद में नई उम्मीद जगाती है — पर 2012 की विफलता की छाया भी है।

मुख्य बातें

3 अगस्त को बेंगलुरु के विधान सौधा में दोपहर 2 बजे कर्नाटक-तमिलनाडु के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक होगी।
यह नवंबर 2012 के बाद दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच पहली प्रत्यक्ष वार्ता होगी।
बैठक में CM डीके शिवकुमार और CM सी.
जोसेफ विजय सहित लगभग 25 प्रतिभागी शामिल होंगे।
CWRA ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़ने का निर्देश दिया है, जबकि कर्नाटक में मानसून की कमी से जल संकट है।
तमिलनाडु के CM विजय ने PM मोदी को पत्र लिखकर मेकेदातु परियोजना का विरोध किया है।
एजेंडे में जल बँटवारा, पेयजल चिंताएँ और मेकेदातु परियोजना पर चर्चा शामिल होने की उम्मीद है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 3 अगस्त को बेंगलुरु के विधान सौधा में आमने-सामने बैठेंगे — यह कावेरी जल विवाद पर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच एक दशक से भी अधिक समय में पहली प्रत्यक्ष द्विपक्षीय वार्ता होगी। वरिष्ठ सूत्रों ने 28 जुलाई को इसकी पुष्टि की, हालाँकि किसी भी पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

बैठक की तैयारियाँ

सूत्रों के अनुसार, विधान सौधा की तीसरी मंजिल पर स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में व्यापक तैयारियाँ की जा रही हैं। इनमें सफाई, लाइटिंग, एयर-कंडीशनिंग प्रणाली की जाँच और फर्श बदलने का काम शामिल है। बैठक में लगभग 25 प्रतिभागियों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है, जिनमें दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री, प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि हॉल में दोनों राज्यों के आधिकारिक प्रतीक और झंडे लगाए जाएँ।

एक दशक में पहली सीधी बातचीत

गौरतलब है कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच इस तरह की पिछली बैठक नवंबर 2012 में बेंगलुरु में हुई थी, जब जल-बँटवारे के विवाद को सुलझाने की कोशिश की गई थी — लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई थी। इस बार की वार्ता मुख्यमंत्री शिवकुमार द्वारा पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री विजय को लिखे उस पत्र के बाद तय हुई है, जिसमें उन्होंने कावेरी मुद्दे पर सीधी चर्चा की पेशकश की थी।

मौजूदा तनाव की पृष्ठभूमि

यह बैठक ऐसे नाज़ुक समय में हो रही है जब कावेरी जल विनियमन प्राधिकरण (CWRA) ने मंगलवार को कर्नाटक को निर्देश दिया कि वह तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े। कर्नाटक का कहना है कि मानसून की कम बारिश के कारण वह पहले से ही पानी की गंभीर कमी का सामना कर रहा है। कावेरी बेसिन के जलाशयों का जलस्तर घटने से दोनों राज्यों के बीच तनाव और गहरा हो गया है।

इसके साथ ही, मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग रिज़र्वॉयर परियोजना का विरोध किया है। उन्होंने चिंता जताई है कि यह परियोजना निचले इलाकों में पानी की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है।

बैठक में क्या होगा

सूत्रों के मुताबिक, 3 अगस्त की इस द्विपक्षीय वार्ता में तीन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा अपेक्षित है: पानी के न्यायसंगत बँटवारे को सुनिश्चित करना, पेयजल आपूर्ति को लेकर कर्नाटक की चिंताओं पर विचार करना, और मेकेदातु परियोजना पर आगे की कार्रवाई तय करना। बैठक दोपहर 2 बजे शुरू होने की संभावना है।

आगे क्या

भारत के सबसे पुराने और जटिल अंतरराज्यीय नदी विवादों में से एक पर यह वार्ता दोनों दक्षिणी राज्यों के बीच संवाद की बहाली की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। हालाँकि, 2012 की बैठक के अनुभव को देखते हुए विशेषज्ञ किसी ठोस नतीजे को लेकर सतर्क हैं। बैठक के परिणाम पर पूरे दक्षिण भारत की निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तमिलनाडु असंतुष्ट रहा है, और मेकेदातु परियोजना एक नया विवादास्पद मोर्चा बन गई है। इस बैठक की असली कसौटी यह नहीं है कि दोनों मुख्यमंत्री मिले या नहीं — बल्कि यह है कि क्या कोई बाध्यकारी जल-साझाकरण तंत्र या संयुक्त निगरानी ढाँचा उभरता है। बिना ठोस तंत्र के, यह वार्ता भी राजनीतिक संकेत देने का माध्यम बनकर रह सकती है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

3 अगस्त की कावेरी बैठक क्यों अहम है?
यह कर्नाटक और तमिलनाडु के मुख्यमंत्रियों के बीच नवंबर 2012 के बाद पहली प्रत्यक्ष द्विपक्षीय वार्ता है — यानी एक दशक से अधिक के अंतराल के बाद। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब CWRA ने पानी छोड़ने का आदेश दिया है और मेकेदातु परियोजना पर तनाव चरम पर है।
बैठक में कौन-कौन शामिल होगा?
बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, दोनों राज्यों के मंत्री, प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार कुल लगभग 25 प्रतिभागियों के बैठने की व्यवस्था की गई है।
मेकेदातु परियोजना क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों है?
मेकेदातु बैलेंसिंग रिज़र्वॉयर कर्नाटक की एक प्रस्तावित जल परियोजना है। तमिलनाडु का आरोप है कि यह परियोजना निचले इलाकों में कावेरी जल की उपलब्धता को प्रभावित करेगी। तमिलनाडु के CM विजय ने इसी मुद्दे पर PM मोदी को पत्र लिखकर परियोजना का विरोध किया है।
CWRA ने कर्नाटक को क्या निर्देश दिया है?
कावेरी जल विनियमन प्राधिकरण (CWRA) ने 28 जुलाई को कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी का पानी छोड़ने का निर्देश दिया। कर्नाटक का कहना है कि मानसून की कम बारिश के कारण वह स्वयं पानी की गंभीर कमी का सामना कर रहा है।
2012 की बैठक का क्या नतीजा निकला था?
नवंबर 2012 में बेंगलुरु में हुई बैठक में दोनों राज्यों ने जल-बँटवारे का समाधान निकालने की कोशिश की थी, लेकिन कोई आम सहमति नहीं बन पाई थी। तब से दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच इस मुद्दे पर कोई सीधी बातचीत नहीं हुई।
राष्ट्र प्रेस
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