कावेरी जल विवाद: 3 अगस्त को बेंगलुरु में एक दशक बाद पहली बार आमने-सामने होंगे कर्नाटक-तमिलनाडु के मुख्यमंत्री
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 3 अगस्त को बेंगलुरु के विधान सौधा में आमने-सामने बैठेंगे — यह कावेरी जल विवाद पर दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच एक दशक से भी अधिक समय में पहली प्रत्यक्ष द्विपक्षीय वार्ता होगी। वरिष्ठ सूत्रों ने 28 जुलाई को इसकी पुष्टि की, हालाँकि किसी भी पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
बैठक की तैयारियाँ
सूत्रों के अनुसार, विधान सौधा की तीसरी मंजिल पर स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में व्यापक तैयारियाँ की जा रही हैं। इनमें सफाई, लाइटिंग, एयर-कंडीशनिंग प्रणाली की जाँच और फर्श बदलने का काम शामिल है। बैठक में लगभग 25 प्रतिभागियों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है, जिनमें दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री, मंत्री, प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि हॉल में दोनों राज्यों के आधिकारिक प्रतीक और झंडे लगाए जाएँ।
एक दशक में पहली सीधी बातचीत
गौरतलब है कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच इस तरह की पिछली बैठक नवंबर 2012 में बेंगलुरु में हुई थी, जब जल-बँटवारे के विवाद को सुलझाने की कोशिश की गई थी — लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई थी। इस बार की वार्ता मुख्यमंत्री शिवकुमार द्वारा पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री विजय को लिखे उस पत्र के बाद तय हुई है, जिसमें उन्होंने कावेरी मुद्दे पर सीधी चर्चा की पेशकश की थी।
मौजूदा तनाव की पृष्ठभूमि
यह बैठक ऐसे नाज़ुक समय में हो रही है जब कावेरी जल विनियमन प्राधिकरण (CWRA) ने मंगलवार को कर्नाटक को निर्देश दिया कि वह तमिलनाडु के लिए कावेरी का पानी छोड़े। कर्नाटक का कहना है कि मानसून की कम बारिश के कारण वह पहले से ही पानी की गंभीर कमी का सामना कर रहा है। कावेरी बेसिन के जलाशयों का जलस्तर घटने से दोनों राज्यों के बीच तनाव और गहरा हो गया है।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग रिज़र्वॉयर परियोजना का विरोध किया है। उन्होंने चिंता जताई है कि यह परियोजना निचले इलाकों में पानी की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है।
बैठक में क्या होगा
सूत्रों के मुताबिक, 3 अगस्त की इस द्विपक्षीय वार्ता में तीन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा अपेक्षित है: पानी के न्यायसंगत बँटवारे को सुनिश्चित करना, पेयजल आपूर्ति को लेकर कर्नाटक की चिंताओं पर विचार करना, और मेकेदातु परियोजना पर आगे की कार्रवाई तय करना। बैठक दोपहर 2 बजे शुरू होने की संभावना है।
आगे क्या
भारत के सबसे पुराने और जटिल अंतरराज्यीय नदी विवादों में से एक पर यह वार्ता दोनों दक्षिणी राज्यों के बीच संवाद की बहाली की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। हालाँकि, 2012 की बैठक के अनुभव को देखते हुए विशेषज्ञ किसी ठोस नतीजे को लेकर सतर्क हैं। बैठक के परिणाम पर पूरे दक्षिण भारत की निगाहें टिकी हैं।