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कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु के सुप्रीम कोर्ट जाने पर सीएम शिवकुमार बोले — कर्नाटक देगा कानूनी जवाब

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कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु के सुप्रीम कोर्ट जाने पर सीएम शिवकुमार बोले — कर्नाटक देगा कानूनी जवाब

सारांश

तमिलनाडु के सर्वोच्च न्यायालय जाने के फैसले पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने साफ कहा — राज्य कानूनी मोर्चे पर पूरी तैयारी से उतरेगा। दशकों पुराना कावेरी विवाद एक बार फिर अदालत की दहलीज़ पर है, और इस बार नई कैबिनेट के साथ कर्नाटक की रणनीति बदली हुई दिखती है।

मुख्य बातें

कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने 3 अगस्त को कहा कि राज्य कावेरी जल विवाद में तमिलनाडु के सुप्रीम कोर्ट जाने पर कानूनी जवाब देगा।
कर्नाटक ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों का कानूनी ढाँचे के भीतर पालन करने का दावा किया; सभी राजनीतिक दल एकजुट बताए गए।
19 नए मंत्रियों के शपथ के बाद हुई पहली कैबिनेट बैठक में बारिश, सूखे और पेयजल संकट पर भी चर्चा हुई।
मंत्रियों को बुधवार से जिला दौरे के निर्देश; रिपोर्ट राजस्व मंत्री को सौंपनी होगी।
केआरएस और हेमावती जलाशय अभी तक पूरी तरह नहीं भरे; शिवमोग्गा और तीर्थहल्ली में बारिश से घटनाएँ।
हर विधानसभा क्षेत्र के लिए पेयजल हेतु ₹1 करोड़ पहले ही मंजूर।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार, 3 अगस्त को स्पष्ट किया कि कावेरी जल विवाद में तमिलनाडु के सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने के फैसले पर कर्नाटक विशेषज्ञों से परामर्श लेकर पूरी तरह कानूनी तरीके से जवाब देगा। बेंगलुरु के विधान सौधा में नए मंत्रियों के साथ करीब दो घंटे चली कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में शिवकुमार ने राज्य की स्थिति स्पष्ट की।

कर्नाटक का रुख: कानून का सम्मान, हितों की रक्षा

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा, 'हम कानून का सम्मान करते हैं और कानूनी रूप से जवाब देंगे। कर्नाटक ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों का कानूनी ढाँचे के भीतर पालन किया है और राज्य के सभी राजनीतिक दल कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए एकजुट रहे हैं।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों राज्यों के बीच कावेरी जल बँटवारे को लेकर तनाव एक बार फिर सतह पर आ गया है।

नई कैबिनेट की पहली बैठक, बारिश-सूखे पर मंथन

गौरतलब है कि यह बैठक 19 नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद हुई पहली कैबिनेट बैठक थी। इसमें कावेरी विवाद के साथ-साथ राज्य में भारी बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। शिवकुमार ने बताया कि कैबिनेट ने सूखा, पेयजल उपलब्धता और कई जिलों में बारिश से हुए नुकसान जैसी प्रमुख चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।

मंत्रियों को जिला दौरे के निर्देश

मुख्यमंत्री ने नए मंत्रियों को निर्देश दिया कि वे बुधवार से अपने-अपने जिलों का दौरा करें, भारी बारिश और सूखे से प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करें और विस्तृत रिपोर्ट राजस्व मंत्री को सौंपें। उन्होंने कहा, 'सरकार इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर आगे के फैसले करेगी।' साथ ही मंत्रियों को निर्देश दिया गया कि वे सभी राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करें, ताकि नुकसान का पारदर्शी आकलन हो सके।

जलाशयों की स्थिति और राहत उपाय

शिवकुमार ने माना कि हाल की बारिश से पानी के संकट में कुछ राहत ज़रूर मिली है, लेकिन सूखे का खतरा पूरी तरह टला नहीं है। उन्होंने कहा, 'स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी, लेकिन हाल की बारिश से अस्थायी राहत मिली है। बढ़ते जल प्रवाह के बावजूद केआरएस और हेमावती जैसे प्रमुख जलाशय अभी तक पूरी तरह नहीं भरे हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि शिवमोग्गा और तीर्थहल्ली में बारिश से जुड़ी घटनाएँ सामने आई हैं और रिपोर्ट मिलने के बाद उचित राहत उपाय किए जाएँगे।

पेयजल के लिए ₹1 करोड़ प्रति विधानसभा क्षेत्र

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार पहले ही हर विधानसभा क्षेत्र के लिए पेयजल ज़रूरतों को पूरा करने हेतु ₹1 करोड़ मंजूर कर चुकी है। जिला स्तर की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे के निर्णय लिए जाएँगे। कावेरी विवाद पर अगली कानूनी कार्रवाई राज्य के विशेषज्ञों की राय और सर्वोच्च न्यायालय में तमिलनाडु की याचिका की प्रकृति के आधार पर तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्राधिकरण के आदेशों और राज्य की जमीनी जरूरतों के बीच की खाई हर बार चुनावी मौसम में चौड़ी होती दिखती है। असली सवाल यह है कि क्या नई कैबिनेट के पास कोई ठोस कानूनी रणनीति है या यह बयान भी उसी परंपरागत राजनीतिक आश्वासन की अगली कड़ी है। केआरएस और हेमावती जलाशयों का अधूरा भरना और एक साथ सूखे व बाढ़ की दोहरी मार यह दर्शाती है कि कर्नाटक के जल प्रबंधन की चुनौती केवल अंतरराज्यीय नहीं, बल्कि आंतरिक भी है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कावेरी जल विवाद में तमिलनाडु सुप्रीम कोर्ट क्यों गया है?
तमिलनाडु ने कावेरी जल बँटवारे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है। यह विवाद दशकों पुराना है और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों के क्रियान्वयन को लेकर दोनों राज्यों के बीच बार-बार तनाव उभरता रहा है।
कर्नाटक के सीएम शिवकुमार ने इस मामले में क्या कहा?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 3 अगस्त को कहा कि कर्नाटक विशेषज्ञों से सलाह लेकर कानूनी तरीके से जवाब देगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों का कानूनी ढाँचे के भीतर पालन किया है।
कर्नाटक की नई कैबिनेट की पहली बैठक में क्या फैसले हुए?
19 नए मंत्रियों के शपथ के बाद हुई पहली कैबिनेट बैठक में कावेरी विवाद के अलावा सूखा, बारिश से नुकसान और पेयजल संकट पर चर्चा हुई। मंत्रियों को बुधवार से जिला दौरे कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए।
कर्नाटक के प्रमुख जलाशयों की अभी क्या स्थिति है?
मुख्यमंत्री शिवकुमार के अनुसार, हाल की बारिश से कुछ राहत मिली है, लेकिन केआरएस और हेमावती जैसे प्रमुख जलाशय अभी तक पूरी तरह नहीं भरे हैं। शिवमोग्गा और तीर्थहल्ली में बारिश से जुड़ी घटनाएँ भी सामने आई हैं।
पेयजल संकट से निपटने के लिए कर्नाटक सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र के लिए पेयजल ज़रूरतों को पूरा करने हेतु ₹1 करोड़ पहले ही मंजूर कर दिए हैं। जिला स्तर की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे के निर्णय लिए जाएँगे।
राष्ट्र प्रेस
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