24 जुलाई 2026
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कावेरी विवाद: डीके शिवकुमार तमिलनाडु CM से सीधी बातचीत को तैयार, 3 अगस्त बेंगलुरु बैठक संभव

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कावेरी विवाद: डीके शिवकुमार तमिलनाडु CM से सीधी बातचीत को तैयार, 3 अगस्त बेंगलुरु बैठक संभव

सारांश

दशकों से सीधी बातचीत से परहेज करने वाले दो दक्षिणी राज्य अब आमने-सामने आ सकते हैं। कर्नाटक CM शिवकुमार ने तमिलनाडु CM विजय को 3 अगस्त को बेंगलुरु बुलाया है — कावेरी विवाद और मेकेदातु परियोजना पर। तमिलनाडु का जवाब अभी बाकी है।

मुख्य बातें

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 24 जुलाई 2026 को कहा कि वे कावेरी जल विवाद पर तमिलनाडु CM से बातचीत को तैयार हैं।
सूत्रों के अनुसार, शिवकुमार ने CM सी.
जोसेफ विजय को 3 अगस्त को बेंगलुरु में वार्ता का न्योता दिया है।
मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना सहित कई अहम मुद्दे प्रस्तावित एजेंडे में शामिल हैं।
DMK और AIADMK की सरकारें अब तक कावेरी पर कर्नाटक के साथ सीधी बातचीत से इनकार करती रही हैं।
तमिलनाडु ने निमंत्रण स्वीकार किया है या नहीं, यह अभी अनिश्चित है।
शिवकुमार ने नीट विरोध के बाद शिक्षा सुधार पर केंद्र के कदम का भी स्वागत किया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 24 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि वे कावेरी नदी जल बंटवारे के दीर्घकालिक विवाद पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से सीधी बातचीत के लिए तैयार हैं। बेंगलुरु टेक समिट से पूर्व आयोजित सीईओ नाश्ता बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने यह संकेत दिया कि दोनों राज्यों के बीच संवाद का रास्ता खुला है।

मुख्यमंत्री शिवकुमार का बयान

शिवकुमार ने कहा, 'कुछ मुद्दों पर हम सभी से बात करने, सभी के साथ जानकारी साझा करने और सभी के साथ काम करने को तैयार हैं।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस समय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के पत्र की सामग्री सार्वजनिक नहीं करना चाहते, क्योंकि इस सप्ताह मंत्रिमंडल विस्तार और अन्य महत्त्वपूर्ण कार्यों में व्यस्तता रही।

यह बयान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री द्वारा कथित तौर पर भेजे गए पत्र के संदर्भ में पूछे गए सवालों के जवाब में आया। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने मुख्यमंत्री विजय को 3 अगस्त को बेंगलुरु में वार्ता के लिए आमंत्रित किया है, हालाँकि यह अभी अनिश्चित है कि तमिलनाडु ने यह निमंत्रण स्वीकार किया है या नहीं।

दशकों पुराना विवाद और ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के नेतृत्व वाली तमिलनाडु की लगातार सरकारें कावेरी जल बंटवारे पर कर्नाटक के साथ सीधी द्विपक्षीय वार्ता से परहेज करती रही हैं। तमिलनाडु का आधिकारिक रुख यह रहा है कि यह विवाद कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों से पहले ही सुलझाया जा चुका है, इसलिए अलग से बातचीत की आवश्यकता नहीं।

यदि यह प्रस्तावित बैठक होती है, तो यह कई दशकों में उन विरल अवसरों में से एक होगा जब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री कावेरी मुद्दे पर सीधे आमने-सामने बैठेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत में अंतरराज्यीय जल विवादों को लेकर तनाव बना हुआ है।

मेकेदातु परियोजना भी एजेंडे में

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित वार्ता में मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। यह परियोजना कर्नाटक के लिए महत्त्वपूर्ण है, लेकिन तमिलनाडु ने इस पर आपत्ति जताई है। दोनों राज्यों के बीच आपसी हित के अन्य मुद्दे भी बातचीत में उठाए जाने की संभावना है।

नीट विवाद पर भी बोले शिवकुमार

इसी बैठक में शिवकुमार ने नीट परीक्षा को लेकर देशभर में जारी छात्र विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में केंद्र सरकार की पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा, 'यह उत्साहजनक है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार ने एक महीने बाद आखिरकार शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा के लिए कदम बढ़ाया है। पूरा देश अब इस मुद्दे को लेकर जागरूक हो गया है।'

ये टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब नीट परीक्षा के संचालन को लेकर छात्र और विपक्षी दल प्रवेश प्रक्रिया में व्यापक सुधार की माँग कर रहे हैं।

आगे क्या होगा

3 अगस्त की प्रस्तावित बेंगलुरु बैठक पर तमिलनाडु की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है। यदि बैठक होती है, तो यह दक्षिण भारत के सबसे पुराने और संवेदनशील अंतरराज्यीय जल विवादों में से एक में एक नई शुरुआत का संकेत हो सकती है। कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने राज्य के हितों की रक्षा करते हुए पड़ोसी राज्यों के साथ संवाद जारी रखेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तमिलनाडु की प्रतिक्रिया में है — एक राज्य जिसने दशकों तक द्विपक्षीय वार्ता को 'न्यायिक रूप से निपटाए गए मामले' की आड़ में टाला है। यदि विजय सरकार बेंगलुरु आती है, तो यह DMK की उस पुरानी नीति से स्पष्ट विचलन होगा जो सीधी बात से बचती रही। मेकेदातु परियोजना एजेंडे में होना तमिलनाडु के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील है — वहाँ इसका विरोध सर्वदलीय है। बिना किसी ठोस कार्यसूची और तमिलनाडु की स्वीकृति के, यह बैठक अभी सद्भावना के संकेत से अधिक कुछ नहीं है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कावेरी जल विवाद पर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच बातचीत क्यों अहम है?
दशकों से दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री कावेरी मुद्दे पर सीधे नहीं बैठे हैं। यदि 3 अगस्त की प्रस्तावित बेंगलुरु बैठक होती है, तो यह इस पुराने और संवेदनशील विवाद में एक दुर्लभ द्विपक्षीय पहल होगी।
मेकेदातु परियोजना क्या है और यह विवादास्पद क्यों है?
मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना कर्नाटक द्वारा कावेरी नदी पर प्रस्तावित एक बाँध परियोजना है। तमिलनाडु इसका विरोध करता है, क्योंकि उसे आशंका है कि इससे नदी के निचले हिस्से में पानी का प्रवाह प्रभावित होगा।
तमिलनाडु कावेरी विवाद पर सीधी बातचीत से क्यों बचता रहा है?
तमिलनाडु का आधिकारिक रुख रहा है कि कावेरी विवाद कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों से पहले ही सुलझाया जा चुका है। DMK और AIADMK दोनों सरकारें इसी आधार पर द्विपक्षीय वार्ता से परहेज करती रही हैं।
क्या 3 अगस्त की बेंगलुरु बैठक तय हो गई है?
अभी तक यह बैठक पूरी तरह तय नहीं हुई है। सूत्रों के अनुसार कर्नाटक CM ने निमंत्रण भेजा है, लेकिन तमिलनाडु CM सी. जोसेफ विजय ने इसे स्वीकार किया है या नहीं, यह अनिश्चित है।
शिवकुमार ने नीट विवाद पर क्या कहा?
शिवकुमार ने केंद्र सरकार द्वारा नीट परीक्षा से जुड़ी शिक्षा व्यवस्था की चिंताओं पर चर्चा शुरू करने के कदम का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पूरा देश इस मुद्दे पर जागरूक हो गया है और सभी छात्रों के भविष्य के लिए काम होना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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