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कावेरी विवाद: शिवकुमार ने तमिलनाडु CM विजय को जलग्रहण क्षेत्र दौरे का न्योता दिया, हेलीकॉप्टर की पेशकश

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कावेरी विवाद: शिवकुमार ने तमिलनाडु CM विजय को जलग्रहण क्षेत्र दौरे का न्योता दिया, हेलीकॉप्टर की पेशकश

सारांश

एक दशक से अधिक समय में पहली बार, कर्नाटक और तमिलनाडु कावेरी जल विवाद पर सीधी बातचीत के लिए तैयार हैं। शिवकुमार ने विजय को जलग्रहण क्षेत्र का हेलीकॉप्टर दौरा कराने की पेशकश की है और 3 अगस्त को बेंगलुरु में उच्चस्तरीय बैठक प्रस्तावित है — यह 2012 की विफल वार्ता के बाद का सबसे बड़ा कूटनीतिक कदम है।

मुख्य बातें

शिवकुमार ने 29 जुलाई को तमिलनाडु CM सी.
जोसेफ विजय को कावेरी जलग्रहण क्षेत्र का दौरा करने और हेलीकॉप्टर से जमीनी स्थिति देखने का न्योता दिया।
3 अगस्त को दोपहर 2 बजे बेंगलुरु के विधान सौधा में दोनों राज्यों के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है।
यह एक दशक से अधिक समय में कावेरी मुद्दे पर दोनों राज्यों की पहली सीधी द्विपक्षीय वार्ता होगी; इससे पहले ऐसी बैठक नवंबर 2012 में हुई थी।
कर्नाटक ने CWRC के जल-छोड़ने के निर्देश को CWMA में चुनौती देने की घोषणा की है।
कावेरी बेसिन में इस वर्ष बारिश की भारी कमी के बीच कर्नाटक ने पीने के पानी की प्राथमिकता का हवाला देते हुए पानी छोड़ने में असमर्थता जताई है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 29 जुलाई को नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को कावेरी जलग्रहण क्षेत्रों का स्थलीय दौरा करने का आमंत्रण दिया है और ज़रूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर से दौरा कराने की पेशकश भी की है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का निर्देश दिया है, जिसे कर्नाटक ने चुनौती देने की घोषणा की है।

मुख्य घटनाक्रम

शिवकुमार ने कहा, 'हमने मुख्यमंत्री विजय से हमारे कावेरी कैचमेंट क्षेत्र की स्थिति देखने का अनुरोध किया है। जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर का इंतजाम भी किया जाएगा ताकि वह जमीनी हकीकत का खुद जायजा ले सकें।' उन्होंने बताया कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने कर्नाटक के मुख्य सचिव को औपचारिक पत्र लिखा है और टेलीफोन पर भी संपर्क किया है।

इसी क्रम में बेंगलुरु के विधान सौधा में 3 अगस्त को दोपहर 2 बजे दोनों राज्यों के बीच एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। शीर्ष सूत्रों के अनुसार, यह बैठक विधान सौधा की तीसरी मंजिल के कॉन्फ्रेंस हॉल में होगी, जिसमें दोनों मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होने की उम्मीद है।

एक दशक से अधिक में पहली सीधी बातचीत

गौरतलब है कि यह बैठक एक दशक से अधिक समय में कावेरी मुद्दे पर दोनों राज्य सरकारों के बीच पहली सीधी द्विपक्षीय वार्ता होगी। इससे पहले दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच ऐसी बैठक नवंबर 2012 में बेंगलुरु में हुई थी, जो जल-बंटवारे पर किसी सहमति के बिना समाप्त हो गई थी। यह ऐसे समय में आया है जब कावेरी बेसिन में इस वर्ष बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है और तनाव चरम पर है।

कर्नाटक का रुख और CWRC विवाद

कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह CWRC के जल-छोड़ने के निर्देश को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के समक्ष चुनौती देगी। सरकार का तर्क है कि जलाशयों में पानी का सीमित भंडार है और कई जिलों में पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता है, इसलिए फिलहाल पानी छोड़ना संभव नहीं है।

शिवकुमार ने कहा, 'उन्हें स्थिति का खुद अनुभव करना चाहिए। देखते हैं कि जमीनी हकीकत देखने के बाद वह क्या फैसला लेते हैं।' उन्होंने पड़ोसी राज्यों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया।

बैठक की तैयारियाँ

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 3 अगस्त की बैठक के लिए विधान सौधा में व्यापक तैयारियाँ चल रही हैं — सफाई, लाइटिंग, एयर-कंडीशनिंग जाँच और फर्श बदलने जैसे कार्य शामिल हैं। शिवकुमार ने कहा, 'हमारे राज्य में आने वाले किसी भी मेहमान का सम्मान के साथ स्वागत करना हमारा कर्तव्य है।'

आगे क्या होगा

यदि 3 अगस्त की बैठक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होती है, तो यह दोनों राज्यों के बीच दशकों पुराने कावेरी विवाद में एक नया अध्याय जोड़ सकती है। हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बिना किसी बाध्यकारी तंत्र के केवल द्विपक्षीय वार्ता से स्थायी समाधान निकलना कठिन है। कर्नाटक का CWMA में CWRC के निर्देश को चुनौती देने का निर्णय बताता है कि राज्य कानूनी और राजनयिक, दोनों मोर्चों पर एक साथ काम कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक ऐसी बैठकें राजनीतिक संकेत देने से अधिक कुछ नहीं बन पातीं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कावेरी विवाद पर 3 अगस्त की बैठक क्यों महत्वपूर्ण है?
यह एक दशक से अधिक समय में कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद पर पहली सीधी द्विपक्षीय वार्ता होगी। इससे पहले नवंबर 2012 में बेंगलुरु में ऐसी बैठक हुई थी, जो बिना किसी सहमति के समाप्त हो गई थी।
शिवकुमार ने विजय को हेलीकॉप्टर दौरे की पेशकश क्यों की?
कर्नाटक CM शिवकुमार चाहते हैं कि तमिलनाडु CM विजय कावेरी जलग्रहण क्षेत्र में बारिश की कमी और जलाशयों की वास्तविक स्थिति खुद देखें। उनका तर्क है कि जमीनी हकीकत देखने के बाद ही जल-बंटवारे पर कोई उचित निर्णय लिया जा सकता है।
CWRC ने कर्नाटक को क्या निर्देश दिया है और कर्नाटक का क्या रुख है?
कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का निर्देश दिया है। कर्नाटक ने इस निर्देश को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) में चुनौती देने की घोषणा की है और कहा है कि जलाशयों में सीमित भंडार और पीने के पानी की ज़रूरतों के कारण वह पानी छोड़ने में असमर्थ है।
3 अगस्त की बैठक में कौन शामिल होगा?
बेंगलुरु के विधान सौधा की तीसरी मंजिल पर होने वाली इस बैठक में मुख्यमंत्री शिवकुमार और विजय के अलावा दोनों राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होने की उम्मीद है। बैठक दोपहर 2 बजे निर्धारित है।
कावेरी जल विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
कावेरी नदी के जल-बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच दशकों पुराना विवाद है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2018 में एक फैसला दिया था, लेकिन क्रियान्वयन को लेकर विवाद जारी है। इस वर्ष कावेरी बेसिन में बारिश की भारी कमी के कारण तनाव और बढ़ गया है।
राष्ट्र प्रेस
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