कावेरी विवाद: कर्नाटक में सर्वदलीय एकता, कानूनी सलाह के बाद ही तमिलनाडु को पानी छोड़ने का निर्णय
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 2 अगस्त को स्पष्ट किया कि कावेरी नदी का पानी तमिलनाडु को छोड़ने का कोई भी अंतिम निर्णय कानूनी विशेषज्ञों, वरिष्ठ नेताओं और सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा। बेंगलुरु में आयोजित सर्वदलीय बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता कर्नाटक के किसानों और आम नागरिकों के हितों की रक्षा करना है।
सर्वदलीय बैठक: कौन-कौन हुए शामिल
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस बैठक को 'ऐतिहासिक' बताया। बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, बी.एस. येदियुरप्पा, एच.डी. कुमारस्वामी और बसवराज बोम्मई सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य, लोकसभा-राज्यसभा सांसद, पूर्व सिंचाई मंत्री और कानूनी विशेषज्ञ भी इसमें शामिल हुए। दिल्ली में मौजूद कर्नाटक की कानूनी टीम वर्चुअल माध्यम से जुड़ी। सभी दलों ने सरकार के अंतिम फैसले में साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया।
जल संकट की स्थिति: आंकड़े क्या कहते हैं
शिवकुमार ने बताया कि इस वर्ष राज्य में सामान्य से केवल 30 से 35 प्रतिशत वर्षा हुई है, जिससे कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। जलाशयों में मौजूदा जलप्रवाह के अनुसार कबीनी बांध में 24,000 क्यूसेक, कृष्णराज सागर (केआरएस) में 22,000 क्यूसेक, हरंगी में 10,430 क्यूसेक और हेमावती में 12,000 क्यूसेक पानी की आमद हो रही है — कुल जलप्रवाह 67,378 क्यूसेक दर्ज किया गया। इसके बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया कि पेयजल के लिए कम से कम 40 टीएमसी जल भंडारण अनिवार्य है, जिसमें 36 टीएमसी पेयजल आवश्यकताओं के लिए आरक्षित रखना होगा।
CWRC और CWMA का निर्देश, कर्नाटक की आपत्ति
कावेरी वाटर रेगुलेशन कमेटी (CWRC) और कावेरी वाटर मैनेजमेंट अथॉरिटी (CWMA) ने हाल ही में कर्नाटक को 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ने का निर्देश दिया है। शिवकुमार ने कहा कि यह आदेश ऐसे समय आया जब राज्य गंभीर जल संकट से जूझ रहा है और तमिलनाडु ने उस समय 9 टीएमसी पानी की मांग की थी जब जलाशय पूरी तरह भरे नहीं थे। उन्होंने बताया कि सरकार CWMA के इन निर्देशों को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की संभावना पर भी विचार कर रही है।
पिछले वर्षों की तुलना में कितना कम छोड़ा पानी
शिवकुमार ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पिछले वर्ष जून में कर्नाटक ने 19.19 टीएमसी पानी छोड़ा था, जबकि इस वर्ष केवल 2.9 टीएमसी छोड़ा गया। जुलाई 2025 में 31 टीएमसी की तुलना में इस वर्ष मात्र 3.6 टीएमसी पानी छोड़ा गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2 अगस्त तक किसी भी जलाशय से विशेष रूप से तमिलनाडु के लिए पानी नहीं छोड़ा गया — केवल कबीनी बांध की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पानी छोड़ा गया।
सूखा घोषणा और 13 अगस्त का बंद
विपक्ष के नेता आर. अशोक की तत्काल सूखा घोषित करने की मांग पर शिवकुमार ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन किए बिना ऐसा संभव नहीं है और अगस्त के अंत तक रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। 13 अगस्त को विभिन्न संगठनों द्वारा बुलाए गए कर्नाटक बंद के संदर्भ में उन्होंने लोगों से संयम बरतने की अपील की। डीएमके की ओर से कथित तौर पर सर्वोच्च न्यायालय में दायर निजी याचिका पर टिप्पणी करने से उन्होंने इनकार किया, यह कहते हुए कि निजी याचिकाओं पर सामान्यतः सुनवाई नहीं होती।