कावेरी जल विवाद: CM शिवकुमार की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक, राज्यहित में एकजुटता का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 2 अगस्त 2026 को बेंगलुरु स्थित मुख्यमंत्री आवास 'कृष्णा' में कावेरी नदी के जल बंटवारे के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सत्तापक्ष और विपक्ष के शीर्ष नेताओं ने एक स्वर में राज्य के हितों की रक्षा का संकल्प लिया। यह बैठक ऐसे समय हुई जब कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) ने कर्नाटक की अपील खारिज कर तमिलनाडु को 15 दिनों तक 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के आदेश को बरकरार रखा है।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
इस सर्वदलीय बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, एचडी कुमारस्वामी, डीवी सदानंद गौड़ा और बसवराज बोम्मई सहित केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना और शोभा करंदलाजे उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर, कई कैबिनेट मंत्री, सांसद, विपक्ष के नेता, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और कानूनी विशेषज्ञों ने भी बैठक में भाग लिया। राजनीतिक दलों की इस व्यापक भागीदारी ने कावेरी मुद्दे पर कर्नाटक की एकजुटता को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री का रुख और आह्वान
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बैठक में कहा कि कावेरी विवाद कोई नया मुद्दा नहीं है — यह पीढ़ियों से चला आ रहा संघर्ष है। उन्होंने सभी दलों से राजनीतिक मतभेद भुलाकर किसानों और आम नागरिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आग्रह किया। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की स्थायी प्राथमिकता पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना है और इस पर सभी दलों में सहमति है।
केंद्र से समन्वय और पूर्व प्रयास
मुख्यमंत्री ने बताया कि CWMA और कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की बैठकों से पहले उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों सीआर पाटिल, प्रह्लाद जोशी और वी. सोमन्ना के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और जगदीश शेट्टार से मुलाकात कर कर्नाटक का पक्ष विस्तार से रखा था। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने केंद्र सरकार के समक्ष राज्य की चिंताओं को प्रभावी ढंग से उठाया। नई दिल्ली में आयोजित सांसदों की बैठक में भी सभी दलों ने राज्यहित में एकजुट रहने का भरोसा दिलाया था।
CWMA का आदेश और कर्नाटक की स्थिति
कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने हाल ही में CWRC के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें कर्नाटक को 15 दिनों तक तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था। कर्नाटक की अपील को खारिज किए जाने के बाद यह सर्वदलीय बैठक राज्य की एकीकृत रणनीति तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। गौरतलब है कि कावेरी विवाद दशकों से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच तनाव का केंद्र रहा है और सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के फैसले के बाद भी जल वितरण पर मतभेद जारी हैं।
आगे की राह
सर्वदलीय बैठक के बाद राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वह CWMA के आदेश को कानूनी और राजनयिक दोनों स्तरों पर चुनौती देने की रणनीति तैयार करेगी। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने सभी जनप्रतिनिधियों से राज्यहित को सर्वोपरि रखते हुए सामूहिक प्रयास जारी रखने का आह्वान किया है।