यूसीसी पर अमित शाह के बयान के बाद सियासी हलचल, मोहसिन रजा बोले — जनहित और देशहित का कानून
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने संबंधी बयान के बाद 15 सितंबर 2026 को देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया। उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन मोहसिन रजा ने यूसीसी को सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने वाला कानून बताया, जबकि बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के घटक दलों ने विस्तृत प्रस्ताव के अध्ययन के बाद रुख स्पष्ट करने की बात कही।
मोहसिन रजा का समर्थन
लखनऊ में मोहसिन रजा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यूसीसी को अपने संकल्प के रूप में सार्वजनिक किया था और केंद्र सरकार उसी संकल्प के अनुरूप आगे बढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी का मकसद किसी भी नागरिक के अधिकारों का हनन रोकना है। रजा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जनहित के कार्यों का विरोध राजनीतिक प्रेरणा से किया जा रहा है।
उन्होंने सवाल किया, 'अगर यूसीसी आम जनता के हित में है, तो उसके खिलाफ आपत्ति क्यों?' उनके अनुसार जनता देश में समान नागरिक संहिता की स्थापना चाहती है और विपक्ष का विरोध तथ्यों पर आधारित नहीं बल्कि राजनीतिक कारणों से प्रेरित है।
एनडीए घटकों की 'प्रतीक्षा करो' वाली नीति
पटना में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सरकार की ओर से विस्तृत प्रस्ताव आने तक इंतजार करना उचित होगा। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव सामने आने के बाद पार्टी के भीतर विचार-विमर्श करके ही अपना रुख स्पष्ट किया जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब जनता दल (यूनाइटेड) — JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा था कि वे इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से सीधी बातचीत करेंगे। कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक पार्टी अपने स्तर पर राय बनाने में सक्षम है और RLM का निर्णय भी स्वतंत्र रूप से होगा।
बिहार बाढ़ पर भी कुशवाहा ने की केंद्र की सराहना
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने पर कुशवाहा ने केंद्र और राज्य सरकार की संवेदनशीलता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी हैं और नुकसान का आकलन होने के बाद केंद्र की ओर से सकारात्मक पहल की जाएगी।
बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आरोपों पर कुशवाहा ने कहा कि विपक्ष को अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है। गौरतलब है कि यूसीसी पर बहस ऐसे समय तेज हुई है जब लोकसभा चुनाव की तैयारियाँ एक अहम पड़ाव पर हैं।
यूसीसी पर राजनीतिक ध्रुवीकरण का इतिहास
समान नागरिक संहिता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में शामिल है, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जहाँ यूसीसी कानून पारित किया गया। अब केंद्र सरकार के 21 राज्यों में इसे विस्तारित करने के प्रस्ताव ने नई बहस को जन्म दिया है।
आगे क्या होगा
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार NDA के घटक दलों का 'प्रस्ताव देखने के बाद फैसला' वाला रुख आंतरिक असहमति का संकेत दे सकता है, जो चुनाव से पहले गठबंधन की एकता के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत होगा। आने वाले हफ्तों में केंद्र सरकार द्वारा विस्तृत यूसीसी मसौदे के सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक परिदृश्य और स्पष्ट होने की उम्मीद है।