यूसीसी पर बिहार एनडीए में दरार: जदयू ने किया विरोध, लोजपा ने माँगा मसौदा
सारांश
मुख्य बातें
गृह मंत्री अमित शाह के 2029 लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व वाले 21 एनडीए-शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के बयान के बाद बिहार के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में अलग-अलग सुर फूट पड़े हैं। जहाँ जनता दल (यूनाइटेड) ने बिहार में यूसीसी लागू करने का स्पष्ट विरोध किया है, वहीं गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों ने सतर्क रुख अपनाते हुए व्यापक विचार-विमर्श की शर्त रखी है।
जदयू का स्पष्ट विरोध
जदयू के वरिष्ठ नेता एवं विधायक श्याम रजक ने 14 सितंबर को कहा कि जब यह विधेयक संसद में पारित हो रहा था, तब भी उनकी पार्टी ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने कहा, 'जदयू ने विधेयक का समर्थन किया था, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि बिहार में इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए — पार्टी आज भी इसी रुख पर कायम है।'
रजक ने दो टूक कहा कि बिहार में किसी भी सूरत में यूसीसी लागू होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार की मौजूदा एनडीए सरकार केवल भाजपा की सरकार नहीं है — इसमें जदयू, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम), लोजपा (रामविलास) सहित अन्य सहयोगी दल शामिल हैं।
हम का सतर्क स्वागत
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने अमित शाह के यूसीसी संकल्प का स्वागत करते हुए इसे 'समानता, न्याय और नागरिकों के समान अधिकार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम' बताया। हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि इस विषय की विस्तृत जानकारी अभी उनके संज्ञान में नहीं आई है।
सुमन ने कहा, 'यदि इस मुद्दे पर आगे चर्चा होती है तो एनडीए के सभी घटक दलों के नेताओं को विश्वास में लेकर बातचीत की जाएगी।' उन्होंने इसे पक्ष या विपक्ष का नहीं, बल्कि सरकार का मामला बताया और कहा कि मुख्यमंत्री के समक्ष भी घटक दल अपनी बातें रखेंगे।
लोजपा की शर्त: पहले मसौदा, फिर राय
लोजपा (रामविलास) प्रमुख एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है और अलग-अलग वर्गों की अपनी नागरिक परंपराएँ व रीति-रिवाज हैं। उन्होंने संविधान में अनुसूचित जनजातियों को मिली छूटों का हवाला देते हुए कहा कि उनकी पार्टी 'समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है।'
पासवान ने स्पष्ट किया कि यूसीसी का मसौदा सार्वजनिक होने, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन और व्यापक विचार-विमर्श होने के बाद ही उनकी पार्टी अपना अंतिम मत रखेगी।
गठबंधन की राजनीति पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब 2025 बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद एनडीए गठबंधन में सीट-बँटवारे और नीतिगत समन्वय को लेकर पहले से ही तनाव की खबरें सामने आती रही हैं। गौरतलब है कि यूसीसी भाजपा के दीर्घकालीन राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा रहा है, लेकिन जदयू जैसे सहयोगी दल, जो अल्पसंख्यक-बहुल सीटों पर निर्भर हैं, इस मुद्दे पर हमेशा सतर्क रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि 2029 चुनाव से पहले यूसीसी को 21 राज्यों में लागू करने की कोशिश गठबंधन की आंतरिक एकता को परखेगी। आने वाले दिनों में बिहार एनडीए के भीतर इस मुद्दे पर बहस और तेज होने के संकेत हैं।