गयाजी पितृपक्ष मेला 2026: 5 जोन, 54 सेक्टर और 39,500 मानवबल के साथ तैयारियों की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के गयाजी में पितृपक्ष मेला 2026 के सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए 14 सितंबर 2026 को जिला परिषद सभागार में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बिहार सरकार के कृषि मंत्री एवं गया जिले के प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जिला प्रशासन ने तैयारियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया।
मुख्य घटनाक्रम
जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने बैठक में विभिन्न विभागों की तैयारियों, उपलब्ध संसाधनों और श्रद्धालुओं को मुहैया कराई जाने वाली सुविधाओं का पूरा विवरण सामने रखा। प्रभारी मंत्री ने कहा कि पितृपक्ष मेला गया की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजन है। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं, इसलिए उनकी सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश, आवासन, यातायात, पार्किंग, स्वास्थ्य, सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन की व्यवस्था को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया।
जोन और सेक्टर प्रबंधन
मेला क्षेत्र को प्रभावी प्रबंधन के लिए 5 जोन और 54 सेक्टर में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जोन और सेक्टर के लिए संबंधित पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। जिला पदाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मेले की तैयारियों को महज विभागीय कार्य के रूप में नहीं, बल्कि समग्र और समन्वित प्रबंधन के रूप में देखा जाए।
स्वच्छता और पेयजल व्यवस्था
स्वच्छता व्यवस्था के तहत तीन पालियों में सफाई कार्य कराया जाएगा। इसके लिए करीब 39,500 मानवबल की आवश्यकता के अनुसार एजेंसी चयन हेतु निविदा प्रकाशित की जा चुकी है। फल्गु नदी की सफाई के लिए ट्रैश क्लीनिंग बोट का इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि मेला क्षेत्र के 9 तालाबों की भी विशेष सफाई कराई जा रही है।
श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न वेदी और घाटों, यात्री आवासन, पुलिस आवासन तथा पार्किंग स्थलों पर पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। वाटर एटीएम और वाटर टैंकर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। पेयजल की गुणवत्ता की लगातार जाँच के साथ बोतलबंद पानी की भी जाँच कराने का निर्देश दिया गया है।
सुरक्षा और तकनीकी इंतजाम
बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने क्यूआर आधारित रिस्ट बैंड की व्यवस्था की है। इन रिस्ट बैंड को अभिभावकों के मोबाइल नंबर से जोड़ा जाएगा, ताकि बच्चा गुम होने की स्थिति में उसकी पहचान और परिजनों तक पहुँचाने में मदद मिल सके। मेला क्षेत्र में सीसीटीवी, सार्वजनिक संबोधन प्रणाली तथा अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार की व्यवस्था की जाएगी।
श्रद्धालुओं की सहायता के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन और सहायता केंद्र संचालित किए जाएंगे। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र भी चौबीसों घंटे संचालित रहेगा और आपात स्थिति में 112 नंबर का उपयोग किया जा सकेगा। मेला क्षेत्र में प्रमुख पोल पर तिरंगा सजावटी लाइट लगाने के साथ स्ट्रीट लाइट, हाईमास्ट और ट्रांसफॉर्मर के रखरखाव का कार्य भी जारी है।
व्यापक भागीदारी और आगे की राह
बैठक में स्थानीय विधायक, नगर निगम के महापौर, नगर परिषद के सभापति, जिला अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी तथा पंडा-पुरोहितों ने भी अपने सुझाव दिए। मेले से जुड़े विभिन्न कोषांगों के वरीय पदाधिकारी, नोडल पदाधिकारी और अन्य अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे। जिला पदाधिकारी ने नियमित समीक्षा, स्थल निरीक्षण और कमियों के तत्काल निराकरण पर विशेष जोर दिया। आने वाले हफ्तों में मेला क्षेत्र में सभी व्यवस्थाएँ अंतिम रूप लेंगी ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।