केरल PSC बनाम क्राइम ब्रांच: पूछताछ नोटिस को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी, संवैधानिक टकराव गहराया
सारांश
मुख्य बातें
केरल लोक सेवा आयोग (PSC) और क्राइम ब्रांच के बीच राज्य योजना बोर्ड नियुक्ति अनियमितताओं की जाँच को लेकर टकराव अब कानूनी लड़ाई में बदलने की कगार पर है। 14 सितंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम से मिली जानकारी के अनुसार, आयोग ने अपने सदस्यों को क्राइम ब्रांच मुख्यालय में पेश होने से इनकार कर दिया है और क्राइम ब्रांच के नोटिस को न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी कर ली है। यह विवाद इस मूलभूत संवैधानिक प्रश्न को जन्म दे रहा है कि किसी स्वायत्त संवैधानिक संस्था के सदस्यों से जाँच एजेंसी किस प्रक्रिया और किस स्थान पर पूछताछ कर सकती है।
मुख्य घटनाक्रम
PSC की सोमवार को हुई बैठक में सदस्यों ने स्पष्ट किया कि वे बयान देने को तैयार हैं, परंतु पूछताछ PSC मुख्यालय में ही होगी, न कि क्राइम ब्रांच के दफ्तर में। इसके विपरीत, क्राइम ब्रांच अपने रुख पर अडिग है। एजेंसी का तर्क है कि पूछताछ की जगह तय करना जाँच अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आता है और PSC सदस्यों को बुलाने पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है।
चार PSC सदस्यों को नोटिस भेजकर मंगलवार से जाँच दल के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। इनमें से तीन सदस्य PSC चेयरमैन एम.आर. बैजू के साथ उस विवादित पद के लिए इंटरव्यू बोर्ड में शामिल थे। उल्लेखनीय है कि चेयरमैन को अब तक कोई समन नहीं भेजा गया है।
आयोग का पक्ष
आयोग के भीतर यह भावना प्रबल है कि योजना बोर्ड नियुक्तियों में जो गड़बड़ियाँ हुईं, उनके लिए सदस्यों को 'बलि का बकरा' बनाया जा रहा है। आयोग का कहना है कि वह जाँच में सहयोग करने को तैयार है, लेकिन अपनी संवैधानिक स्वायत्तता से समझौता नहीं करेगा।
गौरतलब है कि PSC एक संवैधानिक संस्था है और उसके सदस्यों की स्थिति सामान्य सरकारी कर्मचारियों से भिन्न है। इसी आधार पर आयोग कानूनी राह अपनाने को तैयार है।
क्राइम ब्रांच की जाँच का दायरा
क्राइम ब्रांच पहले ही PSC के दो अधिकारियों — जिनमें से एक सेवानिवृत्त हो चुके हैं — की ओर से हुई अनियमितताओं की पहचान कर चुकी है। अब एजेंसी यह जाँच रही है कि क्या अन्य सदस्यों और अधिकारियों की भूमिका पहले से चिह्नित गड़बड़ियों से परे भी रही है। रिपोर्टों के अनुसार, सदस्यों से पूछताछ के बाद ही क्राइम ब्रांच उन दो अधिकारियों के विरुद्ध आगे की कानूनी कार्रवाई पर निर्णय लेगी।
यह विवाद राज्य योजना बोर्ड की दो नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं की जाँच के एक निर्णायक चरण में उभरा है, जो इसे और संवेदनशील बनाता है।
टकराव और गहराने की आशंका
बताया जा रहा है कि क्राइम ब्रांच PSC को यह स्पष्ट करने पर भी विचार कर रही है कि वह पूछताछ के लिए आयोग के मुख्यालय नहीं जाएगी। यदि ऐसा होता है, तो यह गतिरोध और लंबा खिंच सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं।
आगे क्या होगा
PSC द्वारा नोटिस को अदालत में चुनौती देने के बाद न्यायालय को तय करना होगा कि संवैधानिक संस्थाओं के सदस्यों से पूछताछ की प्रक्रिया और स्थान क्या हो। यह फैसला न केवल केरल PSC बल्कि देशभर की समान संस्थाओं के लिए एक मिसाल बन सकता है।