केरल पीएससी गवर्निंग बॉडी भंग करो: भाजपा युवा मोर्चा का आंदोलन तेज, 10 साल की नियुक्तियों की सीबीआई जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) युवा मोर्चा ने 18 अगस्त 2026 को तिरुवनंतपुरम में केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) की मौजूदा गवर्निंग बॉडी को तत्काल भंग करने और पिछले 10 वर्षों में की गई नियुक्तियों की सीबीआई जांच की मांग के साथ अपना अभियान और तेज कर दिया। संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
मुख्य मांगें और घटनाक्रम
युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वी. मनुप्रसाद ने स्पष्ट किया कि जब तक भ्रष्टाचार और नौकरी के इच्छुक युवाओं के साथ कथित धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे पीएससी सदस्यों सहित वर्तमान गवर्निंग बॉडी को पद से नहीं हटाया जाता, आंदोलन नहीं थमेगा। उन्होंने कहा, 'मौजूदा पीएससी गवर्निंग बॉडी को भंग किया जाना चाहिए। जब तक कार्रवाई नहीं होती, हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे।'
संगठन ने सरकार से सभी सरकारी विभागों में रिक्त पदों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने और एक श्वेत पत्र जारी करने की माँग की है। इसके साथ ही पीएससी की मौजूदा रैंक सूची में शामिल उम्मीदवारों को सभी स्वीकृत रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति देने की भी माँग उठाई गई है।
राज्यपाल से शिकायत और आश्वासन
मनुप्रसाद ने बताया कि युवा मोर्चा पहले ही केरल के राज्यपाल को पीएससी से जुड़े मुद्दों की लिखित शिकायत सौंप चुका है। राज्यपाल ने संगठन को आश्वस्त किया है कि मामले पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। यह आश्वासन संगठन के लिए उम्मीद की किरण बना है, हालाँकि ठोस कार्रवाई अभी बाकी है।
धरना प्रदर्शन और आगे की रणनीति
आंदोलन के अगले चरण में युवा मोर्चा 19 और 20 अगस्त को पीएससी मुख्यालय के बाहर दिन-रात धरना देगा। यह प्रदर्शन सरकारी रिक्तियों, नियुक्तियों में देरी और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। नेतृत्व ने संकेत दिया है कि यदि माँगें नहीं मानी गईं, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा।
पीएससी सदस्यों की नियुक्ति में पारदर्शिता की मांग
युवा मोर्चा ने पीएससी सदस्यों की नियुक्ति के लिए पारदर्शी कानूनी नियम बनाने की भी माँग की है, ताकि राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को रोका जा सके और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। गौरतलब है कि केरल में पीएससी भर्ती को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है — पिछले कुछ वर्षों में कई बार नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं।
आम जनता और उम्मीदवारों पर असर
मनुप्रसाद के अनुसार यह अभियान उन हजारों उम्मीदवारों की आवाज़ है जो भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी नियुक्ति की प्रतीक्षा में हैं, जबकि पद रिक्त पड़े हैं। उन्होंने इसे लगातार सरकारों द्वारा नौकरी के इच्छुक युवाओं के साथ 'विश्वासघात' करार दिया। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में बेरोज़गारी और सरकारी नौकरियों की माँग युवाओं के बीच एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।