दक्षिण कोरिया के बैंकों पर साइबर हमला: 25 हज़ार से अधिक ग्राहकों का डेटा लीक, राष्ट्रपति ली ने दिए जाँच के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने 4 अक्टूबर 2026 को देश के प्रमुख वित्तीय संस्थानों — हाना बैंक, केबी कूकमिन बैंक और शिनहान बैंक — पर हुए लगातार साइबर हमलों की व्यापक जाँच के आदेश दिए, जिनमें हज़ारों ग्राहकों की निजी जानकारी लीक होने की पुष्टि हुई है। राष्ट्रपति की प्रवक्ता कांग यू-जुंग ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इस बात की जानकारी दी।
साइबर हमलों का विवरण
शिनहान बैंक ने गुरुवार को खुलासा किया कि उसके करीब 25,000 ग्राहकों की संवेदनशील जानकारी — जिसमें नाम, फोन नंबर और सालाना आय शामिल थी — साइबर हमले में लीक हो गई। सूत्रों के अनुसार, हमलावर हैकरों ने एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल कर बैंक के सिस्टम में सेंध लगाई। इसके अतिरिक्त, हाना बैंक के 89 ग्राहकों की निजी जानकारी भी लीक होने की पुष्टि की गई है।
वूरी बैंक और एनएच नोंगह्युप बैंक को भी इसी प्रकार के साइबर हमलों में निशाना बनाने की कोशिश की गई, परंतु इन दोनों बैंकों ने अनधिकृत पहुँच की कोशिशों को समय रहते विफल कर दिया, जिससे उनके ग्राहकों की जानकारी सुरक्षित रही।
राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया और सरकारी निर्देश
राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, राष्ट्रपति ली जे म्युंग को वित्तीय और सरकारी संस्थानों में हुए डेटा लीक और उनसे निपटने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने अधिकारियों को इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेने, संपूर्ण जाँच सुनिश्चित करने और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ज़रूरी कदम उठाने का निर्देश दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब साइबर सुरक्षा को लेकर दक्षिण कोरिया में बढ़ती चिंताओं के बीच वित्तीय क्षेत्र को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
आपात बैठक का आयोजन
फाइनेंशियल सर्विसेज कमीशन के अध्यक्ष ली इओग-वोन और फाइनेंशियल सुपरवाइजरी सर्विस के गवर्नर ली चान-जिन ने रविवार को प्रभावित वित्तीय कंपनियों के प्रमुखों के साथ एक आपात बैठक की। इस बैठक में साइबर हमलों की प्रकृति, डेटा लीक के दायरे और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की गई।
गौरतलब है कि वित्तीय निगरानी संस्था ने पहले यह बैठक बुधवार को आयोजित करने की योजना बनाई थी। किंतु पिछले कुछ दिनों में साइबर हमलों का असर अतिरिक्त वित्तीय संस्थानों तक फैलने के बाद बैठक को तीन दिन पहले खींचकर रविवार को आयोजित किया गया — जो स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करता है।
आम जनता और ग्राहकों पर असर
डेटा लीक में नाम, मोबाइल नंबर और सालाना आय जैसी संवेदनशील जानकारियाँ शामिल होने से प्रभावित ग्राहक वित्तीय धोखाधड़ी, फिशिंग और पहचान-चोरी (identity theft) के जोखिम में हो सकते हैं। फिलहाल प्रभावित बैंकों ने अपने ग्राहकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
यह देश की वित्तीय साइबर सुरक्षा के लिए एक बड़ी चेतावनी है और आने वाले दिनों में नियामकीय सख्ती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।