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केरल पीएससी भर्ती विवाद: युवा मोर्चा का राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान, एलडीएफ पर गंभीर आरोप

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केरल पीएससी भर्ती विवाद: युवा मोर्चा का राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान, एलडीएफ पर गंभीर आरोप

सारांश

केरल पीएससी भर्ती विवाद अब बहुदलीय राजनीतिक संघर्ष बन चुका है। युवा मोर्चा ने 50+ प्रश्नों में हेरफेर और मत्स्य विभाग में एसएफआई कार्यकर्ताओं के कथित चयन के आरोप लगाते हुए राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। पीएससी की विश्वसनीयता दांव पर है।

मुख्य बातें

युवा मोर्चा ने 6 जुलाई से केरल में राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की।
मनु प्रसाद ने आरोप लगाया कि 50 से अधिक प्रश्नों में विकल्प 'बी' को जानबूझकर सही उत्तर बनाया गया।
मत्स्य विभाग भर्ती में चयनित 42 उम्मीदवारों में से 30 से अधिक कथित तौर पर एसएफआई कार्यकर्ता थे।
यूनिवर्सिटी कॉलेज हत्या के प्रयास मामले के आरोपी पुलिस भर्ती मेरिट सूची में शीर्ष पर पाए जाने का आरोप।
भाजपा ने पीएससी अध्यक्ष और सदस्यों के इस्तीफे तथा स्वतंत्र जांच की माँग की।
विधानसभा में भाजपा के प्रस्ताव का एलडीएफ और यूडीएफ दोनों ने विरोध किया।

केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की युवा इकाई युवा मोर्चा ने 6 जुलाई से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। इससे पहले कांग्रेस के युवा संगठन भी इस मुद्दे पर सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोल चुके हैं, जिससे यह भर्ती विवाद अब एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप लेता जा रहा है।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

आंदोलन की घोषणा करते हुए युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वी. मनु प्रसाद ने आरोप लगाया कि पिछली वामपंथी सरकार के कार्यकाल में पीएससी की कार्यप्रणाली को सुनियोजित तरीके से प्रभावित किया गया, ताकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं और उनके करीबियों को लाभ पहुँचाया जा सके। उनके अनुसार, इससे उन लाखों युवाओं के साथ घोर अन्याय हुआ जो वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहते हैं।

मनु प्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षाओं में कुछ चुनिंदा उम्मीदवारों को लाभ पहुँचाने के लिए 50 से अधिक प्रश्नों में विकल्प 'बी' को सही उत्तर के रूप में निर्धारित किया गया।

मत्स्य विभाग भर्ती और एसएफआई पर सवाल

युवा मोर्चा नेता ने मत्स्य विभाग की भर्ती परीक्षा का विशेष उल्लेख किया। उनका दावा है कि चयनित 42 उम्मीदवारों में से 30 से अधिक एक ही कॉलेज के स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ता थे। उनके अनुसार, यह भर्ती प्रक्रिया में संगठित हेरफेर का स्पष्ट संकेत है।

इसके अतिरिक्त, मनु प्रसाद ने यूनिवर्सिटी कॉलेज हत्या के प्रयास मामले का भी हवाला दिया, जिसमें उनके अनुसार उस मामले के आरोपी पुलिस भर्ती की मेरिट सूची में शीर्ष स्थानों पर पाए गए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे लगातार सामने आ रहे विवाद यह दर्शाते हैं कि पीएससी प्रणाली को पारदर्शी बनाने में बुनियादी विफलता रही है।

स्वतंत्र जांच और इस्तीफे की मांग

मनु प्रसाद ने मामले की पूर्णतः स्वतंत्र जांच की माँग करते हुए कहा कि आयोग द्वारा कराई जा रही आंतरिक जांच की कोई विश्वसनीयता नहीं है और उसका उद्देश्य केवल जिम्मेदार लोगों को बचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन पीएससी अध्यक्ष और सदस्यों पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, उन्हें नैतिक आधार पर तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करते, तो सरकार को उन्हें पद से हटाने के लिए कानूनी प्रक्रिया आरंभ करनी चाहिए।

विधानसभा प्रस्ताव पर विरोध की आलोचना

युवा मोर्चा नेता ने इस मुद्दे पर विधानसभा में भाजपा विधायक द्वारा लाए गए प्रस्ताव का वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) दोनों द्वारा विरोध किए जाने की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे दोनों मोर्चों की मिलीभगत का प्रमाण बताया।

युवा कांग्रेस भी पीएससी भर्ती में कथित हेरफेर की न्यायिक जांच की माँग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रही है। भाजपा का कहना है कि केरल की प्रमुख भर्ती एजेंसी पीएससी की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए अब निरंतर जनदबाव बनाना अनिवार्य है।

आगे क्या

युवा मोर्चा के राज्यव्यापी आंदोलन के साथ-साथ युवा कांग्रेस के प्रदर्शन जारी रहने से तिरुवनंतपुरम सहित पूरे केरल में राजनीतिक तापमान बढ़ने की संभावना है। पीएससी की स्वायत्तता और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता अब सीधे राजनीतिक एजेंडे पर आ गई है — और आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक गहराने के संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

सदन तक नहीं। जब तक स्वतंत्र जांच की माँग केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस और धरनों तक सिमटी रहेगी और न्यायिक हस्तक्षेप नहीं होगा, पीएससी की विश्वसनीयता का सवाल अनुत्तरित ही रहेगा।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल पीएससी भर्ती विवाद क्या है?
केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) पर आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में सत्तारूढ़ दल से जुड़े उम्मीदवारों को लाभ पहुँचाने के लिए व्यवस्थित हेरफेर किया गया। इसमें 50 से अधिक प्रश्नों में जानबूझकर एक विकल्प को सही उत्तर रखने और मत्स्य विभाग भर्ती में एसएफआई कार्यकर्ताओं के बड़े पैमाने पर चयन के आरोप शामिल हैं।
युवा मोर्चा का आंदोलन कब और क्यों शुरू हो रहा है?
भाजपा की युवा इकाई युवा मोर्चा ने 6 जुलाई से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य पीएससी में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच, दोषी अधिकारियों के इस्तीफे और लाखों प्रतियोगी परीक्षार्थियों के साथ हुए कथित अन्याय के खिलाफ जनदबाव बनाना है।
मत्स्य विभाग भर्ती में क्या गड़बड़ी का आरोप है?
युवा मोर्चा के अनुसार, मत्स्य विभाग की भर्ती परीक्षा में चयनित 42 उम्मीदवारों में से 30 से अधिक एक ही कॉलेज के स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ता थे। इसे भर्ती प्रक्रिया में संगठित हेरफेर का प्रमाण बताया जा रहा है।
भाजपा ने पीएससी के संबंध में क्या माँगें रखी हैं?
भाजपा ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं: पीएससी अध्यक्ष और संबंधित सदस्यों का तत्काल इस्तीफा, आयोग की आंतरिक जांच के स्थान पर पूर्णतः स्वतंत्र जांच, और यदि इस्तीफा नहीं मिला तो सरकार द्वारा कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें पद से हटाना।
क्या विधानसभा में इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई हुई है?
भाजपा विधायक ने विधानसभा में पीएससी विवाद पर एक प्रस्ताव लाया था, जिसका एलडीएफ और यूडीएफ दोनों ने विरोध किया। युवा मोर्चा ने इसे दोनों मोर्चों की मिलीभगत बताते हुए कड़ी आलोचना की है।
राष्ट्र प्रेस
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