केरल पीएससी मूल्यांकन घोटाला: 228 उम्मीदवार प्रभावित, मंत्री ने CM सतीसन से उच्च-स्तरीय जांच की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) में सामने आई मूल्यांकन की गंभीर चूक ने तिरुवनंतपुरम में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। 13 जुलाई 2023 को आयोजित परीक्षा में 228 उम्मीदवारों के दस वर्णनात्मक (डिस्क्रिप्टिव) उत्तरों की जांच ही नहीं की गई, जो स्टेट प्लानिंग बोर्ड के तीन वरिष्ठ पदों के लिए हुई कॉमन परीक्षा में शामिल हुए थे। इस खुलासे के बाद खेल मंत्री ओ.जे. जेनिश ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन से मिलकर स्वतंत्र, उच्च-स्तरीय जांच की माँग करने की घोषणा की है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह परीक्षा स्टेट प्लानिंग बोर्ड के तीन पदों — 'चीफ, इंडस्ट्री एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवीजन', 'चीफ, पर्सपेक्टिव प्लानिंग डिवीजन' और 'चीफ, प्लानिंग कोऑर्डिनेशन डिवीजन' — के लिए 13 जुलाई 2023 को आयोजित की गई थी। इन पदों का बेसिक मासिक वेतन ₹1.25 लाख है।
KPSC ने 31 मई 2025 को रैंक लिस्ट जारी की और 'इंडस्ट्री एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवीजन' के शीर्ष उम्मीदवार की नियुक्ति बहुत तेज़ी से कर दी गई। यह ऐसे समय में आया है जब भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं।
चूक कैसे उजागर हुई
असफल उम्मीदवारों को अपने स्कोर में अनियमितता का संदेह हुआ और उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत अपनी जांची गई आंसर स्क्रिप्ट की प्रति माँगी। KPSC ने इस अनुरोध और बाद की अपीलों को खारिज कर दिया।
इसके बाद एक उम्मीदवार ने स्टेट इंफॉर्मेशन कमीशन का दरवाजा खटखटाया। जब कमीशन जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश देने ही वाला था, तब KPSC ने आंसर शीट उपलब्ध कराईं — और तब पता चला कि दस वर्णनात्मक उत्तरों का मूल्यांकन ही नहीं हुआ था। गौरतलब है कि यह चूक केवल एक उम्मीदवार तक सीमित नहीं, बल्कि परीक्षा में बैठे सभी 228 उम्मीदवारों पर इसका असर पड़ा।
मंत्री की प्रतिक्रिया और राजनीतिक दबाव
खेल मंत्री ओ.जे. जेनिश, जो यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं, ने बुधवार को KPSC की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, 'सिर्फ अंदरूनी विजिलेंस जांच से भरोसा नहीं जगेगा।' जेनिश ने आरोप लगाया कि इन गड़बड़ियों के लिए केवल आंतरिक जांच पर्याप्त नहीं है और केरल के युवाओं की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर जनता को यह शक हो कि पिछले एक दशक में KPSC का राजनीतिक इस्तेमाल हुआ है, तो इसमें जनता की कोई गलती नहीं है। जेनिश ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन से मिलकर अधिक व्यापक और निष्पक्ष जांच की माँग करने की घोषणा की।
KPSC का रुख और आगे की कार्रवाई
KPSC ने इस चूक की अंदरूनी विजिलेंस जांच की घोषणा की है। आयोग ने कहा है कि संशोधित रैंक लिस्ट तैयार करने से पहले सभी 228 उम्मीदवारों के बिना जांचे गए उत्तरों का मूल्यांकन किया जाएगा। हालाँकि, जो उम्मीदवार पहले ही केरल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल का रुख कर चुके हैं, उनके मामले में — और जिन्हें एडवाइस मेमो व नियुक्ति मिल चुकी है — आगे की कार्रवाई ट्रिब्यूनल के फैसले पर निर्भर करेगी।
वामपंथी विपक्ष की चुप्पी पर सवाल
उल्लेखनीय है कि सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वामपंथी विपक्ष ने इस मामले पर असामान्य चुप्पी साधे रखी है, जबकि विधानसभा का सत्र 1 जुलाई को समाप्त हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह चुप्पी इसलिए भी संदिग्ध है क्योंकि मौजूदा KPSC बोर्ड के सभी 15 सदस्यों की नियुक्ति पिनाराई विजयन सरकार ने अपने कार्यकाल में की थी।
यह मामला केरल में भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि ट्रिब्यूनल और संभावित उच्च-स्तरीय जांच इस मामले में क्या दिशा तय करती है।