7 अगस्त 2026
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केरल पीएससी भर्ती विवाद: भाजपा युवा मोर्चा का राज्यव्यापी आंदोलन तेज, सतीशन सरकार पर निशाना

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केरल पीएससी भर्ती विवाद: भाजपा युवा मोर्चा का राज्यव्यापी आंदोलन तेज, सतीशन सरकार पर निशाना

सारांश

केरल पीएससी भर्ती विवाद अब सड़क पर आ गया है। भाजपा युवा मोर्चा ने 7 अगस्त को तिरुवनंतपुरम सचिवालय तक मार्च निकाला और सतीशन सरकार पर जांच में ढिलाई का आरोप लगाया। हज़ारों रैंक होल्डर्स का इंतज़ार और टूटे वादे — यह विवाद नई यूडीएफ सरकार की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है।

मुख्य बातें

भाजपा युवा मोर्चा ने 7 अगस्त 2026 को तिरुवनंतपुरम में केरल पीएससी विवाद पर राज्यव्यापी आंदोलन तेज किया।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के.
सुरेंद्रन ने सचिवालय मार्च की अगुवाई की और मुख्यमंत्री वीडी सतीशन पर जांच में विफलता का आरोप लगाया।
सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि पीएससी में गंभीर अनियमितताएं पिछली एलडीएफ सरकार के नियुक्त नेतृत्व के कार्यकाल से जुड़ी हैं।
युवा मोर्चा की तीन मुख्य मांगें: स्वतंत्र जांच , समय-सीमाबद्ध भर्ती शेड्यूल , और तत्काल नियुक्तियाँ ।
सतीशन ने विपक्ष में रहते हुए पीएससी रैंक होल्डर्स से वादा किया था कि यूडीएफ सत्ता में आने पर सचिवालय के बाहर प्रदर्शन नहीं करना पड़ेगा।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की युवा शाखा भाजपा युवा मोर्चा ने 7 अगस्त 2026 को केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर अपना राज्यव्यापी आंदोलन और तेज कर दिया। तिरुवनंतपुरम में सचिवालय तक मार्च निकालते हुए संगठन ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार पर लंबित भर्तियों और भर्ती एजेंसी से जुड़े आरोपों की जांच में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने सचिवालय मार्च की अगुवाई करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार पिछली एलडीएफ (LDF) सरकार के कार्यकाल में सामने आई कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच का आदेश देने में विफल रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नियुक्ति का इंतजार कर रहे हज़ारों पीएससी रैंक होल्डर्स की चिंताओं को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।

सुरेंद्रन के अनुसार, आयोग के इतिहास में कुछ सबसे गंभीर आरोप उस दौर से जुड़े हैं जब पीएससी का नेतृत्व पिछली एलडीएफ सरकार द्वारा नियुक्त चेयरमैन और सदस्यों के हाथों में था। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रशासन ने जवाबदेही तय करने में बहुत कम रुचि दिखाई है।

सतीशन के पुराने वादे पर सवाल

सुरेंद्रन ने मुख्यमंत्री सतीशन को उनके विपक्ष के नेता रहते दिए वादे की याद दिलाई। उन्होंने कहा, 'आज, वही उम्मीदवार एक बार फिर सेक्रेटेरिएट के सामने विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य सरकार ने न तो उन्हें बातचीत के लिए बुलाया है और न ही नियुक्तियों के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा घोषित की है।' गौरतलब है कि सतीशन ने विपक्ष में रहते हुए पीएससी रैंक होल्डर्स से वादा किया था कि यूडीएफ सत्ता में आने पर उन्हें सचिवालय के बाहर प्रदर्शन नहीं करना पड़ेगा।

वाम-समर्थित संगठनों पर निशाना

सुरेंद्रन ने डीवाईएफआई (DYFI) सहित वाम-समर्थित युवा संगठनों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इन संगठनों की हिचकिचाहट इस तथ्य से जुड़ी है कि आरोपों के घेरे में आए पीएससी नेतृत्व को पिछली एलडीएफ सरकार के दौरान नियुक्त किया गया था।

युवा मोर्चा की मांगें

भाजपा युवा मोर्चा ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं — कथित अनियमितताओं की गहन और स्वतंत्र जांच, भर्ती के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा वाला शेड्यूल, और योग्य रैंक होल्डर्स के लिए तत्काल नियुक्ति। संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक ये मांगें पूरी नहीं होतीं, राज्यव्यापी आंदोलन जारी रहेगा।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब नई यूडीएफ सरकार अपने शुरुआती महीनों में ही कई मोर्चों पर दबाव में है। पीएससी विवाद तेज़ी से सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले हफ्तों में यदि सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो विरोध प्रदर्शनों के और व्यापक होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और भाजपा इस विरोधाभास को चतुराई से भुनाने में जुटी है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार जांच और नियुक्तियों पर ठोस कदम उठाती है, या महज़ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझी रहती है — क्योंकि हज़ारों योग्य उम्मीदवारों का करियर इस जवाब पर टिका है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल पीएससी भर्ती विवाद क्या है?
केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) पर कथित अनियमितताओं के आरोप हैं, जिनमें भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी और हज़ारों रैंक होल्डर्स को समय पर नियुक्ति न मिलना शामिल है। भाजपा का आरोप है कि ये अनियमितताएं पिछली एलडीएफ सरकार के दौरान नियुक्त पीएससी नेतृत्व के कार्यकाल में हुईं।
भाजपा युवा मोर्चा की मुख्य मांगें क्या हैं?
युवा मोर्चा तीन मांगें कर रहा है: पीएससी में कथित अनियमितताओं की गहन और स्वतंत्र जांच, भर्ती के लिए स्पष्ट समय-सीमाबद्ध शेड्यूल, और योग्य रैंक होल्डर्स को तत्काल नियुक्ति। संगठन ने कहा है कि जब तक ये मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने आरोप लगाया है कि सतीशन ने विपक्ष के नेता रहते हुए पीएससी रैंक होल्डर्स से वादा किया था कि यूडीएफ सरकार आने पर उन्हें सचिवालय के बाहर प्रदर्शन नहीं करना पड़ेगा, लेकिन वही उम्मीदवार आज भी सड़क पर हैं। सरकार ने न तो बातचीत बुलाई है और न ही नियुक्तियों की कोई समय-सीमा घोषित की है।
डीवाईएफआई और वाम युवा संगठन इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं?
सुरेंद्रन का आरोप है कि डीवाईएफआई सहित वाम-समर्थित युवा संगठन इस मुद्दे को उठाने में इसलिए हिचकिचा रहे हैं क्योंकि आरोपों के घेरे में आए पीएससी नेतृत्व को पिछली एलडीएफ सरकार ने नियुक्त किया था। इन संगठनों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह विवाद केरल की नई यूडीएफ सरकार के लिए क्यों अहम है?
पीएससी विवाद नई यूडीएफ सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन रहा है क्योंकि यह सीधे तौर पर सत्ता में आने से पहले किए गए वादों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। भाजपा इसे अपना प्रमुख अभियान मुद्दा बना चुकी है और आने वाले हफ्तों में आंदोलन के और व्यापक होने की आशंका है।
राष्ट्र प्रेस
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