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गयाजी पितृपक्ष मेला 2026: डीएम शशांक शुभंकर ने वेदी स्थलों का निरीक्षण किया, 25 सितंबर से शुरुआत

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गयाजी पितृपक्ष मेला 2026: डीएम शशांक शुभंकर ने वेदी स्थलों का निरीक्षण किया, 25 सितंबर से शुरुआत

सारांश

मोक्ष स्थली गयाजी में पितृपक्ष मेला-2026 की तैयारी शुरू हो गई है। डीएम शशांक शुभंकर ने वैतरणी तालाब, ब्रह्मसत और अक्षयवट वेदी स्थलों का निरीक्षण कर सुरक्षा, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कड़े निर्देश दिए। मेला 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित होगा।

मुख्य बातें

गयाजी में पितृपक्ष मेला-2026 का आयोजन 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक होगा।
जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने बुधवार को वैतरणी तालाब , ब्रह्मसत वेदी स्थल और अक्षयवट वेदी स्थल का निरीक्षण किया।
वैतरणी तालाब में तीन फीट पानी के बाद बैरिकेडिंग और लाल झंडे लगाने के निर्देश दिए गए।
ब्रह्मसत वेदी पर बंद पड़े लाइट एंड साउंड प्रोजेक्ट को मेले से पहले चालू कराने का आदेश।
रुक्मिणी तालाब की गाद सफाई, रास्तों को समतल करने और सभी वेदी स्थलों पर बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश।

मोक्ष स्थली के रूप में विश्वविख्यात गयाजी में पितृपक्ष मेला-2026 की तैयारियों ने रफ़्तार पकड़ ली है। इस वर्ष यह मेला 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा, और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है। जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने बुधवार को वैतरणी तालाब, ब्रह्मसत वेदी स्थल और अक्षयवट वेदी स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया तथा संबंधित अधिकारियों को सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और बुनियादी ढाँचे से जुड़े विस्तृत निर्देश दिए।

वैतरणी तालाब पर सुरक्षा इंतज़ाम

निरीक्षण के दौरान वैतरणी तालाब में जल की गहराई को देखते हुए डीएम शशांक शुभंकर ने तालाब के चारों ओर करीब तीन फीट पानी के बाद बैरिकेडिंग कराने का निर्देश दिया। बैरिकेडिंग पर लाल झंडे लगाने का भी आदेश दिया गया, ताकि श्रद्धालु गहरे पानी की सीमा को स्पष्ट रूप से पहचान सकें और दुर्घटनाओं से बचा जा सके। घाट की सीढ़ियों पर जमी काई की सफाई, जल की स्वच्छता और टूटे टाइल्स की मरम्मत के निर्देश भी दिए गए।

इसके अतिरिक्त वैतरणी घाट पर चेंजिंग रूम, पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था और खराब पड़ी लाइटों को दुरुस्त कराने को कहा गया। घाट के रिक्त स्थानों पर टेंट-पंडाल लगाने तथा नगर आयुक्त को सभी घाटों पर नियमित और बेहतर साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

ब्रह्मसत वेदी स्थल पर लाइट एंड साउंड परियोजना

ब्रह्मसत वेदी स्थल के निरीक्षण में डीएम ने वहाँ बंद पड़े लाइट एंड साउंड प्रोजेक्ट को मेले से पूर्व चालू कराने का निर्देश दिया। यह परियोजना श्रद्धालुओं को गयाजी की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता, पिंडदान की परंपरा तथा भगवान विष्णु से जुड़ी कथाओं से परिचित कराने के लिए महत्त्वपूर्ण है। संवास सदन में पर्याप्त रोशनी, बिजली, पानी, शौचालय और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ ही नालों के टूटे ढक्कनों की मरम्मत और जलजमाव वाले स्थानों पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

अक्षयवट वेदी स्थल पर मरम्मत और सौंदर्यीकरण

अक्षयवट वेदी स्थल के दौरे में जिला पदाधिकारी ने श्रद्धालुओं के आवागमन वाले रास्तों को समतल कराने और नालियों के टूटे ढक्कनों की मरम्मत का निर्देश दिया। वेदी स्थल की रंगाई-पुताई और शौचालयों की सफाई भी सुनिश्चित करने को कहा गया। रुक्मिणी तालाब में जमा गाद की सफाई और जल की स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए टेंट-पंडाल लगाने तथा संवास सदन में साफ-सफाई, पेयजल, निर्बाध बिजली आपूर्ति, लाइट और पंखे समेत सभी ज़रूरी सुविधाएँ उपलब्ध कराने को कहा गया।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश

जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले सभी तैयारियाँ समयबद्ध तरीके से पूरी कर ली जाएँ। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, प्रकाश व्यवस्था और सुगम आवागमन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए। गौरतलब है कि गयाजी में पितृपक्ष मेला हर वर्ष देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है, जिसमें पिंडदान के लिए लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देश वास्तव में मेला शुरू होने से पहले कितने पूरे होते हैं। वैतरणी तालाब में बैरिकेडिंग और लाइट एंड साउंड प्रोजेक्ट जैसी व्यवस्थाएँ पिछले वर्षों में भी चर्चा में रही हैं, फिर भी हर बार नए सिरे से निर्देश देने की ज़रूरत पड़ती है। असली परीक्षा यह है कि प्रशासन इस बार समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित कर पाता है या नहीं, क्योंकि लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा केवल घोषणाओं से नहीं, ज़मीनी काम से तय होती है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गयाजी में पितृपक्ष मेला 2026 कब से कब तक होगा?
गयाजी में पितृपक्ष मेला-2026 का आयोजन 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक होगा। यह मेला पिंडदान के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
डीएम शशांक शुभंकर ने किन स्थलों का निरीक्षण किया?
जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने बुधवार को वैतरणी तालाब, ब्रह्मसत वेदी स्थल और अक्षयवट वेदी स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विस्तृत निर्देश दिए गए।
वैतरणी तालाब पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए क्या इंतज़ाम किए जा रहे हैं?
वैतरणी तालाब में तीन फीट पानी के बाद बैरिकेडिंग कराने और उस पर लाल झंडे लगाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि श्रद्धालु गहरे पानी की सीमा पहचान सकें। इसके अलावा घाट की सीढ़ियों की काई सफाई, टूटे टाइल्स की मरम्मत, चेंजिंग रूम और पेयजल व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
ब्रह्मसत वेदी स्थल पर लाइट एंड साउंड प्रोजेक्ट क्यों महत्त्वपूर्ण है?
यह परियोजना श्रद्धालुओं को गयाजी की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्ता, पिंडदान की परंपरा और भगवान विष्णु से जुड़ी कथाओं की जानकारी देती है। फिलहाल यह परियोजना बंद है और डीएम ने मेले से पहले इसे चालू कराने का निर्देश दिया है।
पितृपक्ष मेले में प्रशासन की मुख्य प्राथमिकताएँ क्या हैं?
जिला पदाधिकारी ने सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, प्रकाश व्यवस्था और सुगम आवागमन को सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित किया है। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और मेला शुरू होने से पहले सभी तैयारियाँ समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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