पितृपक्ष मेला महासंगम 2026: गयाजी में 16 लाख श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारी, 25 सितंबर से आरंभ
सारांश
मुख्य बातें
पितृपक्ष मेला महासंगम-2026 के लिए गयाजी पूरी तरह तैयार है — 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस विश्वप्रसिद्ध धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से 16 लाख से अधिक पिंडदानी गया पहुँचने की उम्मीद है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शुक्रवार को उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे, जिसके साथ ही पितरों के तर्पण और पिंडदान के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों की औपचारिक शुरुआत होगी।
मुख्य धार्मिक अनुष्ठान और कार्यक्रम
जिला प्रशासन के अनुसार, 25 सितंबर को गोदावरी तालाब में तर्पण के साथ मेले के प्रमुख अनुष्ठान आरंभ होंगे। इसके बाद अलग-अलग तिथियों पर गया के विभिन्न पिंड वेदियों, सरोवरों और घाटों पर पिंडदान एवं तर्पण का सिलसिला जारी रहेगा। विष्णुपद मंदिर और देवघाट समेत प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं।
26 सितंबर से प्रतिदिन शाम 6:30 बजे देवघाट एवं सीताकुंड में फल्गु महाआरती का आयोजन होगा। शाम 4:30 से 7 बजे तक राज्यस्तरीय एवं स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन प्रस्तुत किए जाएंगे। शाम 7 से रात 10 बजे तक विष्णुपद मंदिर परिसर और टेंट सिटी, गांधी मैदान में प्रवचन एवं भागवत कथा का आयोजन होगा।
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था
मेला क्षेत्र को 16 सुपर जोन, 45 जोन और 365 सेक्टर में विभाजित किया गया है। हर क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी, महिला दंडाधिकारी और महिला पुलिस बल की तैनाती की गई है।
जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने कहा कि मेले में भीड़ प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने अधिकारियों को अपने-अपने दायित्व और ड्यूटी स्थल की पूरी जानकारी रखने तथा संवेदनशीलता के साथ काम करने का निर्देश दिया है। वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार ने स्पष्ट किया कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक बर्दाश्त नहीं होगी।
प्रमुख सरोवरों और घाटों पर एसडीआरएफ, प्रशिक्षित गोताखोर और लाइफ जैकेट की व्यवस्था की गई है। आवश्यकता अनुसार नाव भी उपलब्ध रहेगी। श्मशान घाट से गयाजी डैम तक एक समय में करीब 40 से 50 हज़ार तीर्थयात्रियों के बैठकर तर्पण करने की व्यवस्था की गई है।
बुनियादी सुविधाएँ और डिजिटल सहायता
श्रद्धालुओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए 'पिंडदान गयाजी' मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा। सभी प्रतिनियुक्त अधिकारियों को यह ऐप अपने मोबाइल में इंस्टॉल करने का निर्देश दिया गया है। शिकायतें संबंधित सेल तक तत्काल पहुँचाई जाएंगी।
मेला क्षेत्र में एम्बुलेंस, फायर सर्विस और अन्य आपातकालीन सेवाओं के नंबर प्रदर्शित किए गए हैं। स्वच्छता, पेयजल, शौचालय, रोशनी और पार्किंग व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की भी जाँच होगी।
विष्णुपथ और सीतापथ क्षेत्र में नए घाट एवं पंडाल तैयार किए गए हैं। घाटों से विष्णुपद मंदिर तक श्रद्धालुओं के सुरक्षित आवागमन के लिए रूट प्लान बनाया गया है और मंदिर में कतारबद्ध दर्शन सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रशासन का संकल्प
प्रशासन का कहना है कि पितृपक्ष मेला गयाजी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना बिहार सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। गौरतलब है कि गयाजी पितृपक्ष मेला विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। प्रशासन का लक्ष्य है कि पिंडदान के लिए आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु सुरक्षित, सुगम और सकारात्मक अनुभव लेकर लौटे।