अखिलेश यादव की अयोध्या यात्रा पर BJP का पलटवार: ब्रजेश पाठक बोले — 'वोट के लिए राम की शरण लेनी होगी'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 8 नवंबर 2026 को लखनऊ में दीपावली की पूर्व संध्या पर समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव की कथित अयोध्या यात्रा पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने मन और कर्मों में राम के विरोधी रहे हैं, वे भी अब समझ चुके हैं कि वोट हासिल करने के लिए भगवान राम की शरण लेनी होगी। इसी दिन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी कौशांबी में इस मुद्दे पर अपनी बात रखी।
ब्रजेश पाठक का सीधा निशाना
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा, 'मैं दीपावली के शुभ अवसर पर राज्य की जनता को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ। यह त्योहार देश और दुनिया भर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह भारत की सनातन संस्कृति के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है।' अखिलेश की अयोध्या यात्रा पर पाठक ने कहा, 'समाजवादी पार्टी के सदस्य भगवान राम लला के मंदिर पर कभी चर्चा नहीं करते थे। सनातन संस्कृति इतनी भव्य और विशाल है कि जो लोग अपने मन और कर्मों में इसके विरोधी हैं, वे भी यह समझते हैं कि यदि उन्हें वोट हासिल करने हैं, तो उन्हें भगवान राम की शरण लेनी होगी।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी हुई है और सपा की ओर से धार्मिक स्थलों पर सक्रियता के संकेत मिल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे अपने राजनीतिक आख्यान को मजबूत करने का अवसर मान रही है।
केशव प्रसाद मौर्य की प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कौशांबी में पत्रकारों से बात करते हुए अखिलेश यादव की संभावित अयोध्या यात्रा पर कहा, 'समाजवादी पार्टी के आधिकारिक मंच से कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है, न ही अखिलेश यादव ने स्वयं इस पर कोई बयान दिया है। अगर पार्टी का कोई उम्मीदवार या सदस्य बयान देता है और मैं उस पर प्रतिक्रिया देता हूँ, तो मुझे इसकी कोई आवश्यकता नहीं लगती।' उन्होंने कहा कि जब आधिकारिक पुष्टि होगी, तब उनके पास कई सवाल होंगे।
मौर्य ने आगे कहा, 'वे राम-विरोधी तत्वों के परिवार से हैं और राम भक्तों की भावनाओं का सम्मान करना नहीं जानते। इसलिए जब वे ऐसे प्रश्न उठाते हैं, तो वे स्वयं प्रश्नों के घेरे में होते हैं और स्वयं से ही प्रश्न कर रहे होते हैं।'
सपा और राम मंदिर: पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर सपा की ऐतिहासिक स्थिति हमेशा BJP से अलग रही है। जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा समारोह से अखिलेश यादव ने दूरी बनाई थी, जिसे BJP ने चुनावी मुद्दा बनाया था। ऐसे में अखिलेश की कथित अयोध्या यात्रा को राजनीतिक पर्यवेक्षक सपा की रणनीति में बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं। BJP के लिए यह बयानबाजी 'हिंदुत्व की राजनीति' पर अपनी पकड़ बनाए रखने का हिस्सा है।
आम जनता और राजनीतिक असर
दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर इस तरह के बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गए हैं। आलोचकों का कहना है कि राजनीतिक दलों द्वारा धार्मिक त्योहारों को चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल करना नागरिक विमर्श को सांप्रदायिक रंग देता है। वहीं BJP समर्थकों का तर्क है कि सनातन संस्कृति की रक्षा पार्टी के मूल एजेंडे का हिस्सा है।
आगे क्या होगा
अखिलेश यादव की ओर से अभी तक अयोध्या यात्रा को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है। यदि वे अयोध्या जाते हैं, तो BJP की प्रतिक्रिया और तीखी हो सकती है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अयोध्या का प्रतीकात्मक महत्व आगामी चुनावी कैलेंडर के मद्देनजर और गहरा होने की संभावना है।