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बाबरी बयान पर इमाम साजिद रशीदी का सोनिया गांधी पर हमला: '16 साल में कार्रवाई क्यों नहीं हुई?'

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बाबरी बयान पर इमाम साजिद रशीदी का सोनिया गांधी पर हमला: '16 साल में कार्रवाई क्यों नहीं हुई?'

सारांश

इमाम साजिद रशीदी ने सोनिया गांधी के बाबरी मस्जिद पर भावुक बयान को 'सियासी नौटंकी' करार दिया। उनका सवाल सीधा है — 16 साल की सत्ता में जो नहीं हुआ, वो अब आंसुओं से नहीं होगा। यह टकराव 2027 यूपी चुनावों की आहट में मुस्लिम वोट की राजनीति को नई दिशा दे सकता है।

मुख्य बातें

इमाम साजिद रशीदी ने सोनिया गांधी के बाबरी मस्जिद बयान को 'मगरमच्छ के आंसू' बताया।
रशीदी ने कहा कि कांग्रेस 1992–1996 और 2004–2014 के दौरान कुल 16 साल सत्ता में रही, लेकिन न मस्जिद बनी न साजिशकर्ताओं पर कार्रवाई हुई।
उन्होंने मेरठ, मलियाना, हाशिमपुरा, भागलपुर दंगों और TADA/POTA के तहत हिरासत का हवाला देते हुए कांग्रेस की 'चुप्पी' पर सवाल उठाया।
रशीदी ने दावा किया कि मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस को वोट न देने का फैसला कर लिया है।
टीएमसी नेता के 'अग्निपरीक्षा' बयान पर रशीदी ने दोहरे मापदंड की आलोचना की और कार्रवाई की माँग की।

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के प्रमुख इमाम साजिद रशीदी ने 8 नवंबर 2026 को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के बाबरी मस्जिद संबंधी बयान पर कड़ा प्रहार किया। रशीदी ने सोनिया गांधी की भावनाओं को 'घड़ियाली और मगरमच्छ के आंसू' बताते हुए सवाल उठाया कि जब कांग्रेस 16 साल तक केंद्र में सत्तारूढ़ रही, तब न बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण हुआ और न ही कथित साजिशकर्ताओं पर कोई कार्रवाई की गई।

रशीदी का सीधा सवाल: 16 साल में क्या किया?

इमाम रशीदी ने विस्तार से कहा, '1992 से 1996 तक और फिर 2004 से 2014 तक कांग्रेस की सरकार थी। अगर सोनिया गांधी को वाकई दर्द था, तो उन 16 वर्षों में बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया जा सकता था। कोर्ट ने भी कहा है कि जो लोग इस साजिश में शामिल थे, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए — लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया।'

उन्होंने आगे कहा कि उस दौर में विश्व हिंदू परिषद पर प्रतिबंध लगाने और आरएसएस पर बैन की भी ताकत सरकार के पास थी, परंतु यह कदम नहीं उठाया गया।

मुस्लिम समुदाय पर हुई हिंसा का हवाला

रशीदी ने कहा कि जब मेरठ, मलियाना, हाशिमपुरा और भागलपुर में सांप्रदायिक हिंसा हुई, उस वक्त सोनिया गांधी के 'आंसू नहीं निकले।' उन्होंने TADA और POTA जैसे कानूनों के तहत मुस्लिम युवाओं की कथित हिरासत का भी उल्लेख किया। रशीदी ने दावा किया कि कांग्रेस ने देशभर में 50,000 साम्प्रदायिक दंगों को अंजाम दिया, जिनकी कीमत मुस्लिम समुदाय को चुकानी पड़ी।

यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की आहट के बीच राजनीतिक दलों के मुस्लिम मतदाताओं को लेकर बयान तेज हो रहे हैं।

कांग्रेस को भविष्य का आह्वान

इमाम रशीदी ने कहा कि अभी भी एक अवसर है — कांग्रेस यदि सार्वजनिक रूप से वादा करे कि सत्ता में आने पर बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण करेगी, साजिशकर्ताओं को दंडित करेगी और आरएसएस पर बैन लगाएगी — तो मुसलमान माफ करने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि मुस्लिम मतदाताओं ने अपना फैसला कर लिया है।

हिंदू मतदाताओं से अपील

रशीदी ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के हवाले से कहा कि 'जो अपने बाप का नहीं हुआ, वो किसी का नहीं हो सकता।' उन्होंने हिंदू मतदाताओं से पूछा कि जो पार्टी मुलायम सिंह के साथ वफादार नहीं रही, वह उनके साथ कैसे खड़ी होगी।

टीएमसी नेता के बयान पर प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक नेता के 'अग्निपरीक्षा' वाले बयान पर रशीदी ने कहा कि यदि किसी मुसलमान ने ऐसा कहा होता, तो तुरंत एफआईआर दर्ज होती। उन्होंने इस दोहरे मापदंड की आलोचना की और कहा कि ऐसे बयानों से 'भावनाएं भड़कती हैं और इन पर कार्रवाई होनी चाहिए।' आगे देखना होगा कि सोनिया गांधी के बयान पर कांग्रेस की ओर से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है और क्या यह विवाद 2027 चुनावों से पहले और गहराता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से के उस बढ़ते मोहभंग की अभिव्यक्ति है जो कांग्रेस की 'सेक्युलर' राजनीति को अब महज़ चुनावी उपकरण मानता है। उल्लेखनीय है कि ऐसे बयान तब सार्वजनिक होते हैं जब चुनावी कैलेंडर करीब हो — और 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव इसी संदर्भ में हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस तथ्य को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है कि मुस्लिम वोट एकजुट नहीं है और इमाम-नेतृत्व वाले बयान ज़मीनी मतदाता मनोविज्ञान को पूरी तरह नहीं दर्शाते। फिर भी, यह बयान कांग्रेस के लिए एक चेतावनी है कि परंपरागत वोट बैंक की धारणाएँ तेज़ी से बदल रही हैं।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इमाम साजिद रशीदी ने सोनिया गांधी पर क्या आरोप लगाए?
रशीदी ने सोनिया गांधी के बाबरी मस्जिद बयान को 'घड़ियाली आंसू' बताया और कहा कि कांग्रेस 16 साल केंद्र में सत्ता में रही, परंतु न मस्जिद का पुनर्निर्माण हुआ और न कथित साजिशकर्ताओं पर कार्रवाई की गई। उन्होंने इसे 2027 चुनावों से पहले की सियासी चाल बताया।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन क्या है?
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन एक राष्ट्रीय संगठन है जो देशभर की मस्जिदों के इमामों का प्रतिनिधित्व करता है। इमाम साजिद रशीदी इस संगठन के प्रमुख हैं और सामाजिक-धार्मिक मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देते रहे हैं।
रशीदी ने कांग्रेस के किन ऐतिहासिक मुद्दों का जिक्र किया?
रशीदी ने मेरठ, मलियाना, हाशिमपुरा और भागलपुर के सांप्रदायिक दंगों का उल्लेख किया। उन्होंने TADA और POTA के तहत मुस्लिम युवाओं की कथित हिरासत और कांग्रेस शासनकाल में हुए कथित 50,000 दंगों का भी हवाला दिया।
2027 चुनावों से इस बयान का क्या संबंध है?
रशीदी ने खुद कहा कि ये 'सिर्फ 2027 के आंसू हैं।' उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं और मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। उनके बयान ने संकेत दिया कि मुस्लिम समुदाय का एक वर्ग कांग्रेस को वोट देने के पक्ष में नहीं है।
टीएमसी नेता के 'अग्निपरीक्षा' बयान पर रशीदी ने क्या कहा?
रशीदी ने कहा कि यदि किसी मुसलमान ने ऐसा बयान दिया होता, तो उसके खिलाफ तुरंत एफआईआर होती और कार्रवाई होती। उन्होंने इसे दोहरा मापदंड बताया और मांग की कि ऐसे बयानों पर बिना भेदभाव के कार्रवाई होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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