अयोध्या की जमीन पर बने बाबरी मस्जिद, बंगाल में क्यों: मौलाना शाजिद रशीदी
सारांश
मुख्य बातें
इस्लामिक विद्वान मौलाना शाजिद रशीदी ने 3 नवंबर 2026 को कई सामयिक विवादों पर अपनी स्पष्ट राय रखी — जिनमें पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण का प्रस्ताव, प्रयागराज में यूजीसी कानून पर सवाल पूछने वाले युवक के साथ हुई मारपीट, आजम खान की गिरफ्तारी और धीरेंद्र शास्त्री के विवादित बयान शामिल हैं। रशीदी ने सीधे शब्दों में कहा कि बाबरी मस्जिद बंगाल में बनाने की बजाय अयोध्या में अदालती आदेश पर आवंटित ज़मीन पर निर्माण शुरू किया जाना चाहिए।
बाबरी मस्जिद और अयोध्या की आवंटित ज़मीन
पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने और 6 दिसंबर को NH-34 जाम करने की धमकी पर रशीदी ने तीखा सवाल उठाया — 'बाबरी मस्जिद बंगाल में क्यों बनाई जाए?' उन्होंने हुमायूं कबीर से सीधी अपील की कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर सरकार द्वारा अयोध्या में जो ज़मीन मस्जिद के लिए दी गई है, वहीं निर्माण आरंभ किया जाए।
रशीदी ने कहा कि वह स्वयं हुमायूं कबीर के साथ उस स्थान पर जाकर मस्जिद की नींव रखने को तैयार हैं। उनके अनुसार निर्धारित ज़मीन का उपयोग करना ही उचित मार्ग है और इस प्रकार के विवादों को अनावश्यक रूप से हवा नहीं दी जानी चाहिए।
धार्मिक नेताओं की जवाबदेही पर रशीदी का रुख
नेहा बोरा की पुजारियों पर टिप्पणी के संदर्भ में रशीदी ने कहा कि धार्मिक गुरुओं पर गलत गतिविधियों के जो मामले सामने आए हैं, उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आसाराम बापू और राम रहीम जैसे नामों का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों अनुयायियों की आस्था के बावजूद गलत को गलत मानना ज़रूरी है।
रशीदी ने यह भी स्पष्ट किया कि नेहा बोरा की जिन बातों को वे गलत मानते हैं, उन पर भी वे पहले अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। संन्यास की परंपरा पर उन्होंने कहा कि इस्लाम में इसे उचित नहीं माना गया है, क्योंकि मनुष्य की स्वाभाविक आवश्यकताएँ होती हैं — और कुछ मामलों में संन्यास के बाद हुई गलत गतिविधियों से धर्म और भगवा वस्त्रों की छवि को नुकसान पहुँचता है।
प्रयागराज में थप्पड़ कांड: 'लोकतंत्र में तानाशाही'
प्रयागराज में यूजीसी कानून पर सवाल पूछने वाले एक युवक को थप्पड़ मारे जाने की घटना को रशीदी ने 'तानाशाही' करार दिया। उनके अनुसार संविधान प्रत्येक नागरिक को सरकार से असहमति जताने और सवाल पूछने का अधिकार देता है — और इस अधिकार के प्रयोग पर हिंसा पूरी तरह अस्वीकार्य है।
उन्होंने यह भी कहा कि यूजीसी कानून को लेकर सवर्ण हिंदुओं की भारतीय जनता पार्टी (BJP) से दूरी बढ़ती दिख रही है। इस मामले में जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
आजम खान की गिरफ्तारी और सपा की भूमिका पर सवाल
जमानत मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा आजम खान की गिरफ्तारी पर रशीदी ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) पर आरोप लगाया कि पार्टी ने आजम खान के कानूनी मामलों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं उठाया।
अखिलेश यादव की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए रशीदी ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि सपा नेतृत्व आजम खान की रिहाई के लिए पर्याप्त प्रयास कर रहा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि यदि आजम खान की यूनिवर्सिटी में कोई अनियमितता हुई है, तो उस पर संवाद का रास्ता अपनाया जाए और उनके विरुद्ध दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।
धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर तीखी नाराज़गी
धीरेंद्र शास्त्री के भगवान कृष्ण और महिलाओं से जुड़े बयानों पर रशीदी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्थाओं का अपमान किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और बाद में दी गई सफाई से कही गई बात का प्रभाव समाप्त नहीं होता।
रशीदी ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धार्मिक कथाओं के नाम पर भारी रकम वसूली जाती है और लोगों को अंधविश्वास की ओर धकेला जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक नेताओं की सार्वजनिक जवाबदेही पर देशभर में बहस तेज़ हो रही है।