3 नवंबर 2026
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अयोध्या की जमीन पर बने बाबरी मस्जिद, बंगाल में क्यों: मौलाना शाजिद रशीदी

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अयोध्या की जमीन पर बने बाबरी मस्जिद, बंगाल में क्यों: मौलाना शाजिद रशीदी

सारांश

मौलाना शाजिद रशीदी ने एक साथ कई विवादित मुद्दों पर बेबाकी से बोलते हुए कहा — बाबरी मस्जिद बंगाल में नहीं, अयोध्या की अदालती आवंटित ज़मीन पर बननी चाहिए, और वे खुद नींव रखने जाएंगे। साथ ही उन्होंने आजम खान की रिहाई, यूजीसी थप्पड़ कांड और धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर भी तीखा रुख अपनाया।

मुख्य बातें

मौलाना शाजिद रशीदी ने कहा कि बाबरी मस्जिद पश्चिम बंगाल में नहीं, अयोध्या में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर आवंटित ज़मीन पर बनाई जाए।
रशीदी ने हुमायूं कबीर से अपील की — वे स्वयं अयोध्या जाकर मस्जिद की नींव रखने को तैयार हैं।
प्रयागराज में यूजीसी कानून पर सवाल पूछने वाले युवक को थप्पड़ मारे जाने को रशीदी ने 'तानाशाही' बताया और कड़ी कार्रवाई की माँग की।
आजम खान की ईडी गिरफ्तारी पर सपा की निष्क्रियता को लेकर रशीदी ने अखिलेश यादव पर सवाल उठाए।
धीरेंद्र शास्त्री के बयानों को अनुचित बताते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई और धार्मिक कथाओं में वसूली बंद करने की माँग की।

इस्लामिक विद्वान मौलाना शाजिद रशीदी ने 3 नवंबर 2026 को कई सामयिक विवादों पर अपनी स्पष्ट राय रखी — जिनमें पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण का प्रस्ताव, प्रयागराज में यूजीसी कानून पर सवाल पूछने वाले युवक के साथ हुई मारपीट, आजम खान की गिरफ्तारी और धीरेंद्र शास्त्री के विवादित बयान शामिल हैं। रशीदी ने सीधे शब्दों में कहा कि बाबरी मस्जिद बंगाल में बनाने की बजाय अयोध्या में अदालती आदेश पर आवंटित ज़मीन पर निर्माण शुरू किया जाना चाहिए।

बाबरी मस्जिद और अयोध्या की आवंटित ज़मीन

पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने और 6 दिसंबर को NH-34 जाम करने की धमकी पर रशीदी ने तीखा सवाल उठाया — 'बाबरी मस्जिद बंगाल में क्यों बनाई जाए?' उन्होंने हुमायूं कबीर से सीधी अपील की कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर सरकार द्वारा अयोध्या में जो ज़मीन मस्जिद के लिए दी गई है, वहीं निर्माण आरंभ किया जाए।

रशीदी ने कहा कि वह स्वयं हुमायूं कबीर के साथ उस स्थान पर जाकर मस्जिद की नींव रखने को तैयार हैं। उनके अनुसार निर्धारित ज़मीन का उपयोग करना ही उचित मार्ग है और इस प्रकार के विवादों को अनावश्यक रूप से हवा नहीं दी जानी चाहिए।

धार्मिक नेताओं की जवाबदेही पर रशीदी का रुख

नेहा बोरा की पुजारियों पर टिप्पणी के संदर्भ में रशीदी ने कहा कि धार्मिक गुरुओं पर गलत गतिविधियों के जो मामले सामने आए हैं, उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आसाराम बापू और राम रहीम जैसे नामों का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों अनुयायियों की आस्था के बावजूद गलत को गलत मानना ज़रूरी है।

रशीदी ने यह भी स्पष्ट किया कि नेहा बोरा की जिन बातों को वे गलत मानते हैं, उन पर भी वे पहले अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। संन्यास की परंपरा पर उन्होंने कहा कि इस्लाम में इसे उचित नहीं माना गया है, क्योंकि मनुष्य की स्वाभाविक आवश्यकताएँ होती हैं — और कुछ मामलों में संन्यास के बाद हुई गलत गतिविधियों से धर्म और भगवा वस्त्रों की छवि को नुकसान पहुँचता है।

प्रयागराज में थप्पड़ कांड: 'लोकतंत्र में तानाशाही'

प्रयागराज में यूजीसी कानून पर सवाल पूछने वाले एक युवक को थप्पड़ मारे जाने की घटना को रशीदी ने 'तानाशाही' करार दिया। उनके अनुसार संविधान प्रत्येक नागरिक को सरकार से असहमति जताने और सवाल पूछने का अधिकार देता है — और इस अधिकार के प्रयोग पर हिंसा पूरी तरह अस्वीकार्य है।

उन्होंने यह भी कहा कि यूजीसी कानून को लेकर सवर्ण हिंदुओं की भारतीय जनता पार्टी (BJP) से दूरी बढ़ती दिख रही है। इस मामले में जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

आजम खान की गिरफ्तारी और सपा की भूमिका पर सवाल

जमानत मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा आजम खान की गिरफ्तारी पर रशीदी ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) पर आरोप लगाया कि पार्टी ने आजम खान के कानूनी मामलों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं उठाया।

अखिलेश यादव की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए रशीदी ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि सपा नेतृत्व आजम खान की रिहाई के लिए पर्याप्त प्रयास कर रहा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि यदि आजम खान की यूनिवर्सिटी में कोई अनियमितता हुई है, तो उस पर संवाद का रास्ता अपनाया जाए और उनके विरुद्ध दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।

धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर तीखी नाराज़गी

धीरेंद्र शास्त्री के भगवान कृष्ण और महिलाओं से जुड़े बयानों पर रशीदी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्थाओं का अपमान किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और बाद में दी गई सफाई से कही गई बात का प्रभाव समाप्त नहीं होता।

रशीदी ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धार्मिक कथाओं के नाम पर भारी रकम वसूली जाती है और लोगों को अंधविश्वास की ओर धकेला जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक नेताओं की सार्वजनिक जवाबदेही पर देशभर में बहस तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर मस्जिद निर्माण को एक इंच भी आगे नहीं ले जाते। आजम खान मामले में सपा की चुप्पी पर उठाए गए सवाल भी महत्वपूर्ण हैं — यह दिखाता है कि अल्पसंख्यक राजनीति के नाम पर वोट लेने वाले दलों की जवाबदेही अब समुदाय के भीतर से भी माँगी जा रही है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शाजिद रशीदी ने बाबरी मस्जिद पर क्या कहा?
रशीदी ने कहा कि बाबरी मस्जिद पश्चिम बंगाल में नहीं, बल्कि अयोध्या में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर सरकार द्वारा आवंटित ज़मीन पर बनाई जानी चाहिए। उन्होंने हुमायूं कबीर से अपील की कि वे उस स्थान पर जाकर नींव रखने के लिए उनके साथ चलने को भी तैयार हैं।
पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण का विवाद क्या है?
पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने का प्रस्ताव और 6 दिसंबर को NH-34 जाम करने की धमकी विवाद का केंद्र बनी है। रशीदी ने इसे अनावश्यक विवाद बताते हुए कहा कि अयोध्या में उपलब्ध आवंटित ज़मीन का उपयोग करना बेहतर और उचित है।
प्रयागराज यूजीसी थप्पड़ कांड पर रशीदी का क्या कहना है?
मौलाना रशीदी ने प्रयागराज में यूजीसी कानून पर सवाल पूछने वाले युवक को थप्पड़ मारे जाने को 'तानाशाही' करार दिया। उन्होंने कहा कि संविधान हर नागरिक को सरकार से असहमति और सवाल पूछने का अधिकार देता है, और इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
आजम खान की ईडी गिरफ्तारी पर रशीदी ने क्या कहा?
रशीदी ने आजम खान की जमानत के बाद ईडी द्वारा गिरफ्तारी पर सवाल उठाए और समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाया कि उसने इस मामले को गंभीरता से नहीं उठाया। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आजम खान जैसे वरिष्ठ नेता के मामले में संवाद का रास्ता अपनाया जाए और उनके विरुद्ध मुकदमे वापस लिए जाएं।
धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर मौलाना रशीदी की क्या प्रतिक्रिया है?
रशीदी ने धीरेंद्र शास्त्री के भगवान कृष्ण और महिलाओं से जुड़े बयानों को अनुचित और आस्थाओं का अपमान बताया। उन्होंने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की और आरोप लगाया कि धार्मिक कथाओं के नाम पर भारी रकम वसूल कर लोगों को अंधविश्वास की ओर ले जाया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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