क्या टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर का निलंबन राजनीतिक हलचल का कारण बन गया?
सारांश
Key Takeaways
- हुमायूं कबीर का निलंबन टीएमसी की आंतरिक राजनीति को दर्शाता है।
- बाबरी मस्जिद के निर्माण का मुद्दा फिर से सुर्खियों में आया है।
- राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ इस घटना की गंभीरता को दर्शाती हैं।
कोलकाता, 4 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति के लिए नींव पत्थर रखने की योजना की घोषणा करने वाले टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर को पार्टी ने निलंबित कर दिया है। यह निर्णय उस समय लिया गया जब कबीर मस्जिद के निर्माण कार्य को शुरू करने के अपने इरादे पर अड़े रहे।
कोलकाता के महापौर फिरहाद हाकिम ने गुरुवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि पार्टी ने पहले ही कबीर को उनके बयानों के लिए चेतावनी दी थी।
हुमायूं कबीर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं अभी कुछ नहीं कहूंगा। मैं चुनाव में उन्हें जवाब दूंगा, यही मेरा एकमात्र संदेश है। मैं 135 सीटों पर चुनाव लड़ूंगा।"
उन्होंने कहा कि "मैं 17 तारीख को इस्तीफा दे दूंगा। बड़ा बाजार में मेरी दो मीटिंग हैं, एक दोपहर 1 बजे और दूसरी उसके बाद। मीटिंग के बाद, मैं दोपहर 2 बजे स्पीकर से मिलने जाऊंगा। अगर स्पीकर मौजूद होंगे, तो मैं उसी दिन अपना इस्तीफा दे दूंगा।"
कबीर ने पिछले महीने कहा था कि वे मुर्शिदाबाद के बेलदांगा क्षेत्र में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति के लिए नींव पत्थर रखेंगे। उन्होंने कहा था कि यह मस्जिद लगभग तीन महीने में बनकर तैयार हो सकती है। इस घोषणा के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई।
दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, "टीएमसी वोट बैंक राजनीति करती है। पहले उन्होंने हुमायूं कबीर का बयान लिया, लेकिन जब यह उल्टा पड़ गया तो उन्हें पार्टी से हटा दिया। बाबरी मस्जिद भारत में किसी भी हाल में नहीं बनेगी। अगर हुमायूं कबीर की इच्छा है कि उनके नाम पर कोई मस्जिद बने तो इसमें हम कोई आपत्ति नहीं करेंगे। अगर अपने पिता के नाम पर बने तो भी कोई आपत्ति नहीं। बाबर कौन है हुमायूं के लिए?"
वहीं, आसनसोल से भाजपा विधायक अग्निमित्रा पाल ने कहा, "आज मुस्लिम विधायक 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद को फिर से बनवाने, जिहाद और एनएच-34 को ब्लॉक करने जैसे बयान दे रहे हैं। उनका दावा है कि पूरे पश्चिम बंगाल के मुस्लिम सड़क जाम करेंगे। हुमायूं कबीर यह खुलकर कह रहे हैं। जबकि, सच यह है कि पिछले 15 सालों में ममता बनर्जी ने हिंदू, मुस्लिम या सिखों के लिए कोई काम नहीं किया।"