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मथुरा कारसेवा आह्वान पर मौलाना साजिद रशीदी बोले — '1992 की पुनरावृत्ति की साजिश, सरकार तुरंत कार्रवाई करे'

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मथुरा कारसेवा आह्वान पर मौलाना साजिद रशीदी बोले — '1992 की पुनरावृत्ति की साजिश, सरकार तुरंत कार्रवाई करे'

सारांश

मौलाना साजिद रशीदी का यह बयान महज़ एक प्रतिक्रिया नहीं — यह उस बढ़ते तनाव की आवाज़ है जो 6 दिसंबर की तारीख नज़दीक आते ही धार्मिक स्थलों के विवाद के इर्द-गिर्द फिर से उभर रहा है। 1992 की याद दिलाते हुए उन्होंने सरकार को सीधी चुनौती दी है।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने 6 दिसंबर को मथुरा में कारसेवा के आह्वान को 1992 की घटनाओं की पुनरावृत्ति की साजिश बताया।
उन्होंने शासन-प्रशासन से कारसेवा का आह्वान करने वालों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की माँग की।
अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को उन्होंने सांप्रदायिक सोच से प्रेरित बताया और केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर दोहरे मानदंड का आरोप लगाया।
वंदे मातरम पर उन्होंने 1986 और 2016 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला दिया — अनिवार्यता को असंवैधानिक बताया।
उन्होंने पिनाराई विजयन के बयान पर वंदे मातरम के मुद्दे को 'गंदी राजनीतिक चाल' करार दिया।

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 9 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में कई संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी — जिनमें 6 दिसंबर को मथुरा में कारसेवा के ऐलान, उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर, ज्ञानवापी-मथुरा विवाद और 'वंदे मातरम' पर केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के बयान शामिल हैं। उन्होंने कारसेवा के आह्वान को 1992 की घटनाओं की पुनरावृत्ति की कोशिश बताते हुए शासन-प्रशासन से सख्त कदम उठाने की माँग की।

मथुरा कारसेवा पर सख्त आपत्ति

मौलाना रशीदी ने 6 दिसंबर को मथुरा में कारसेवा करने के संतों के ऐलान को सीधे तौर पर गलत ठहराया। उन्होंने कहा, 'आपको याद होगा कि यह वही कारसेवा है जिसके कारण 1992 में बाबरी मस्जिद को गिराया गया था। वह पूरे देश के लिए एक काला दिन था। एक ढाँचे को गैर-कानूनी तरीके से गिराया गया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी माना था कि 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद को गिराने का काम गैर-कानूनी तरीके से किया गया था।'

उन्होंने आगे कहा, 'कोर्ट ने यह भी कहा कि इस कार्रवाई में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वो अलग बात है कि छोटी अदालतों ने उन्हें माफ कर दिया।' मौलाना रशीदी के अनुसार, ऐसा आह्वान करने वाले लोग 'संत का चोला पहनकर हिंदू-मुस्लिम में नफरत पैदा करना चाहते हैं।'

अपने खिलाफ एफआईआर को बताया सांप्रदायिक सोच का नतीजा

अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर पर मौलाना रशीदी ने कहा, 'मेरे खिलाफ एफआईआर इसलिए दर्ज की गईं क्योंकि मैं एक मुसलमान हूँ और मैंने लोगों के सामने एक सच्ची और अच्छी बात रखने की कोशिश की।' उन्होंने केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान का हवाला दिया जिसमें कथित तौर पर सभी मदरसों को 'आतंकवाद की फैक्ट्री' कहा गया था, और पूछा कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

गौरतलब है कि मौलाना रशीदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक स्थलों को लेकर कई विवाद एक साथ सुर्खियों में हैं और सांप्रदायिक तनाव की आशंकाएँ बढ़ रही हैं।

'वंदे मातरम' विवाद पर मौलाना का स्पष्ट रुख

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) नेता पिनाराई विजयन के 'वंदे मातरम' संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना रशीदी ने कहा, 'वंदे मातरम किसी भी तरह से अनिवार्य नहीं है — न संविधान के तहत, न ही हाल ही में संसद द्वारा पारित विधेयक में। वह विधेयक केवल इसके अपमान को रोकने के बारे में है।'

उन्होंने 1986 और 2016 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि शीर्ष अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि इसे किसी पर थोपा नहीं जा सकता। उनके अनुसार, 'बार-बार जानबूझकर वंदे मातरम का मुद्दा उठाना और मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना एक गंदी राजनीतिक चाल है।'

सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पर चेतावनी

मौलाना रशीदी ने कारसेवा का आह्वान करने वालों की तुलना 'आसिफ मुनीर के पैटर्न' से करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य यह संदेश फैलाना है कि 'हिंदू और मुसलमान एकसाथ काम नहीं कर सकते।' उन्होंने सरकार और प्रशासन से माँग की कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि असली मुद्दे बेरोजगारी, शिक्षा और रोजगार हैं, और इनसे ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक विवादों को हवा दी जा रही है। आने वाले महीनों में 6 दिसंबर की तारीख नज़दीक आने के साथ यह विवाद और गहरा होने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी उसी तर्ज पर नए आह्वान बेरोकटोक जारी हैं — यह कानून के शासन पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने मथुरा कारसेवा पर क्या कहा?
मौलाना रशीदी ने 6 दिसंबर को मथुरा में कारसेवा के आह्वान को 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस की पुनरावृत्ति की साजिश बताया। उन्होंने सरकार और प्रशासन से ऐसे आह्वान करने वालों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की माँग की।
मौलाना रशीदी के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज हुई?
मौलाना रशीदी के अनुसार, उनके खिलाफ एफआईआर सांप्रदायिक सोच के कारण दर्ज की गई क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। उन्होंने केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों संबंधी कथित बयान का हवाला देते हुए दोहरे मानदंड का आरोप लगाया।
वंदे मातरम पर मौलाना रशीदी का क्या रुख है?
मौलाना रशीदी का कहना है कि वंदे मातरम न तो संविधान के तहत अनिवार्य है और न ही हाल के संसदीय विधेयक में इसे गाना जरूरी बताया गया है। उन्होंने 1986 और 2016 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला दिया जिनमें इसे थोपने को असंवैधानिक बताया गया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने 1992 की बाबरी मस्जिद विध्वंस पर क्या कहा था?
मौलाना रशीदी के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने माना था कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को गिराने का काम गैर-कानूनी तरीके से किया गया था और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी।
पिनाराई विजयन के 'वंदे मातरम' बयान पर मौलाना रशीदी ने क्या कहा?
मौलाना रशीदी ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के बयान के संदर्भ में वंदे मातरम को बार-बार मुद्दा बनाने को 'गंदी राजनीतिक चाल' बताया। उनके अनुसार, असली मुद्दे बेरोजगारी और शिक्षा हैं, न कि धार्मिक विवाद।
राष्ट्र प्रेस
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