राम मंदिर दान विवाद: मौलाना साजिद रशीदी बोले- 'आस्था की लूट है', इकबाल अंसारी ने योगी की कार्रवाई को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या स्थित राम मंदिर के दान प्रकरण पर देशभर में प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी है। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने 29 जून को कहा कि यह मामला महज चंदे की चोरी नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ धोखा है। वहीं, बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्रवाई की सराहना करते हुए सरकार का पक्ष लिया।
मौलाना रशीदी का बयान: 'आस्था की लूट, पैसे की लूट से ज़्यादा खतरनाक'
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, 'विश्व हिंदू परिषद पर रथ यात्रा के समय ₹1,400 करोड़ के घोटाले के आरोप भी लगे थे और चंपत राय का नाम उन आरोपों से जुड़ा था। कुछ लोगों का कहना है कि राम मंदिर आंदोलन के लिए असल में लड़ने वालों को किनारे कर दिया गया, एक नया ट्रस्ट बनाया गया और चंपत राय को डायरेक्टर बना दिया गया।'
उन्होंने आगे कहा कि साध्वी ऋतंभरा ने चंपत राय को 'चंदन के पेड़' की संज्ञा दी है, लेकिन उनके अनुसार जब किसी की मंजूरी के बिना वहाँ 'पत्ता भी नहीं हिल सकता था', तो उनकी जानकारी के बिना हज़ारों करोड़ की हेराफेरी कैसे संभव है। रशीदी ने कहा, 'हिंदुओं ने जो भी चंदा दिया, वह आस्था के नाम पर दिया था। इसलिए आस्था की लूट, पैसे की लूट से कहीं अधिक खतरनाक होती है।'
इकबाल अंसारी का रुख: योगी की तारीफ, कार्रवाई का समर्थन
पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने इस मामले में अलग राय रखी। उन्होंने कहा, 'अयोध्या भगवान राम का शहर है और यह सभी की आस्था का केंद्र है — हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी। मंदिर में जो चोरी हुई, उसके लिए जिम्मेदार लोगों को मुख्यमंत्री के निर्देश पर गिरफ्तार किया गया है और मामले की जाँच जारी है।'
अंसारी ने कहा कि जिन्होंने दान पर हाथ साफ किया, वे जेल में हैं और आगे भी 'चुन-चुनकर गिरफ्तारियाँ होती रहेंगी।' उन्होंने कहा, 'इसके लिए हम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देते हैं।'
सीपीएम महासचिव का बयान: असली लुटेरों को बचाया जा रहा है?
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एम.ए. बेबी ने कहा कि किसी भी धर्म के अनुयायियों को अपनी आस्था के अनुसार पूजा करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्य सवाल यह है कि क्या योगी आदित्यनाथ सभी दोषियों को पकड़ रहे हैं, या केवल कुछ लोगों को 'बलि का बकरा' बनाया जा रहा है जबकि 'असली लुटेरे' — जो कथित तौर पर भाजपा और आरएसएस से जुड़े हैं — बचे हुए हैं।
बेबी ने कहा कि योगी सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि जाँच का दायरा कहाँ तक जाएगा।
प्रकरण की पृष्ठभूमि
यह विवाद अयोध्या में राम मंदिर परिसर में दान-पेटियों से धन की हेराफेरी के आरोपों के बाद सामने आया। कथित तौर पर कैमरे बंद रहे, गिनती में गड़बड़ियाँ हुईं और राशि के स्थानांतरण में अनियमितताएँ पाई गईं। उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और जाँच जारी है। गौरतलब है कि यह प्रकरण ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद से दान की राशि में भारी इज़ाफा हुआ है।
आगे क्या होगा
जाँच एजेंसियाँ मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं। विपक्षी दलों की माँग है कि जाँच का दायरा ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों तक बढ़ाया जाए। मामले में राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में और प्रतिक्रियाएँ सामने आने की संभावना है।