कलकत्ता हाई कोर्ट ने तुलु मंडल की वारंट-चुनौती याचिका ठुकराई, 'घोषित अपराधी' का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ ने 13 अगस्त 2026 को फरार पत्थर खदान मालिक तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने बीरभूम जिला अदालत द्वारा जारी 'हुलिया' (फरार संदिग्ध के विवरण सहित अदालती वारंट) को चुनौती दी थी। अब तुलु के सामने 14 अगस्त को सुबह 10 बजे तक जिला अदालत में उपस्थित होने या 'घोषित अपराधी' घोषित होने का विकल्प बचा है।
मामले का घटनाक्रम
गुरुवार सुबह बीरभूम जिला पुलिस ने तुलु के घर की दीवार पर अंग्रेजी और बंगाली दोनों भाषाओं में हुलिया चिपकाए। इसके कुछ घंटों बाद दोपहर में तुलु के वकील ने न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की पीठ के समक्ष जल्दबाजी में याचिका दायर की और वारंट को निरस्त करने की माँग की।
न्यायमूर्ति चंदा ने सुनवाई से यह कहते हुए इनकार किया कि तुलु पहले से ही न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल-न्यायाधीश पीठ के समक्ष गिरफ्तारी सहित पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा की माँग करते हुए एक अलग याचिका दायर कर चुका है। तदनुसार, नई याचिका न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ को स्थानांतरित कर दी गई।
₹28 करोड़ नकद और 15 किलो सोने की बरामदगी
इस मामले की जड़ इस महीने की शुरुआत में तुलु के करीबी रिश्तेदार मीनार मंडल के घर से हुई बड़ी बरामदगी में है। पुलिस ने वहाँ से ₹28 करोड़ नकद और लगभग ₹22 करोड़ के अनुमानित बाजार मूल्य का 15 किलोग्राम सोना जब्त किया।
पूछताछ के दौरान मीनार मंडल ने स्वीकार किया कि यह नकदी और सोना तुलु का था और उसे केवल इन्हें सुरक्षित रखने का काम सौंपा गया था। इस खुलासे के बाद से तुलु फरार है। बीरभूम जिला पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों ने उस पर नजर रखना शुरू कर दिया है। पिछले सप्ताह जिला अदालत से हुलिया जारी कराने के साथ ही उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है।
तुलु मंडल का उदय: दिहाड़ी मजदूर से करोड़पति तक
तुलु मंडल ने अपना जीवन एक साधारण दिहाड़ी मजदूर के रूप में शुरू किया था। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान बीरभूम में TMC के पूर्व जिला अध्यक्ष अनुब्रता मंडल के करीबी होने के बाद उसकी संपत्ति में असाधारण तेजी से वृद्धि हुई। यह ऐसे समय में आया है जब बीरभूम जिले में अवैध खनन से जुड़े कई मामले पहले से जाँच के दायरे में हैं।
आगे क्या होगा
यदि तुलु 14 अगस्त को सुबह 10 बजे तक बीरभूम जिला अदालत में उपस्थित नहीं होता, तो अदालत उसे 'घोषित अपराधी' घोषित कर सकती है, जिससे उसकी संपत्ति कुर्की सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल जाएगा। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ में स्थानांतरित याचिका पर सुनवाई का परिणाम भी इस दिशा को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।