तुलु मंडल मामला: कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने आगे की सुनवाई से खुद को किया अलग
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से फरार पत्थर खदान मालिक तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन से जुड़े मामले की आगे की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। अब यह मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे के कार्यालय को भेजा जाएगा, जो यह निर्धारित करेंगे कि इस प्रकरण को किस नई पीठ को सौंपा जाएगा।
मामले का घटनाक्रम
इस सप्ताह की शुरुआत में न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने तुलु मंडल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें बीरभूम जिला न्यायालय द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के तहत पुलिस की जबरदस्ती कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा की मांग की गई थी। इसके बाद न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल पीठ के समक्ष मंडल ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए एक समानांतर याचिका दायर की। हालाँकि, न्यायमूर्ति चंदा ने सुनवाई से इनकार कर दिया, क्योंकि इससे संबंधित एक अन्य प्रकरण न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ में पहले से विचाराधीन था।
मामला पुनः न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ को लौटाया गया। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने यह कहते हुए खुद को अलग कर लिया कि वे पहले ही मंडल की अंतरिम सुरक्षा याचिका पर अपना अंतिम आदेश दे चुके हैं।
संपत्ति जब्ती और जाँच की स्थिति
पुलिस तुलु मंडल की ₹220 करोड़ की संपत्ति पहले ही जब्त कर चुकी है। जाँच अधिकारियों का मानना है कि यह राशि उनकी कुल संपत्ति का एक छोटा हिस्सा मात्र हो सकती है। ₹220 करोड़ नकद और सोने के अतिरिक्त, जाँचकर्ताओं को कथित तौर पर लगभग 400 बीघा (करीब 125 एकड़) भूमि की जानकारी मिली है, जिस पर मंडल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष स्वामित्व बताया जाता है।
कर चोरी का कथित नेटवर्क
जाँच टीम को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान पत्थर खदान मालिकों द्वारा राज्य करों की चोरी के लिए कथित तौर पर नकली कार्बन प्रतियों के इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी मिली है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार के कुछ अधिकारी, जिन पर इस कर चोरी प्रक्रिया में सहयोगी होने का आरोप है, वे भी जाँचकर्ताओं की नज़र में हैं।
इंटरपोल नोटिस और वारंट
बीरभूम जिला न्यायालय द्वारा पहले से जारी गिरफ्तारी वारंट के अलावा तुलु मंडल के विरुद्ध इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है। यह इस बात का संकेत है कि जाँच एजेंसियाँ उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खोज रही हैं।
आगे की दिशा
अब मुख्य न्यायाधीश घुगे का कार्यालय यह तय करेगा कि इस मामले को कौन-सी नई पीठ सुनेगी। इस प्रकरण में न्यायिक पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया से साफ है कि तुलु मंडल से जुड़ा कानूनी संघर्ष अभी लंबा खिंचने की संभावना है।