25 सितंबर 2026
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तुलु मंडल मामला: कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने आगे की सुनवाई से खुद को किया अलग

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तुलु मंडल मामला: कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने आगे की सुनवाई से खुद को किया अलग

सारांश

फरार पत्थर खदान मालिक तुलु मंडल का मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में नई पीठ की राह देख रहा है — न्यायमूर्ति भट्टाचार्य के खुद को अलग करने के बाद अब मुख्य न्यायाधीश तय करेंगे सुनवाई का अगला पड़ाव। ₹220 करोड़ जब्त, इंटरपोल नोटिस जारी, और कर चोरी के आरोप गहराते जा रहे हैं।

मुख्य बातें

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने 25 सितंबर 2026 को तुलु मंडल मामले की आगे की सुनवाई से खुद को अलग किया।
मामला अब मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे के कार्यालय को भेजा गया, जो नई पीठ तय करेंगे।
पुलिस मंडल की ₹220 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुकी है; जाँचकर्ताओं को लगभग 400 बीघा (करीब 125 एकड़ ) और भूमि की भी जानकारी है।
मंडल के खिलाफ बीरभूम जिला न्यायालय का गिरफ्तारी वारंट और इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस दोनों जारी हैं।
जाँच में TMC सरकार के कार्यकाल में नकली कार्बन प्रतियों से राज्य कर चोरी के आरोप; कुछ सरकारी अधिकारी भी कथित तौर पर जाँच के दायरे में।

कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से फरार पत्थर खदान मालिक तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन से जुड़े मामले की आगे की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया। अब यह मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे के कार्यालय को भेजा जाएगा, जो यह निर्धारित करेंगे कि इस प्रकरण को किस नई पीठ को सौंपा जाएगा।

मामले का घटनाक्रम

इस सप्ताह की शुरुआत में न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने तुलु मंडल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें बीरभूम जिला न्यायालय द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के तहत पुलिस की जबरदस्ती कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा की मांग की गई थी। इसके बाद न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल पीठ के समक्ष मंडल ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने के लिए एक समानांतर याचिका दायर की। हालाँकि, न्यायमूर्ति चंदा ने सुनवाई से इनकार कर दिया, क्योंकि इससे संबंधित एक अन्य प्रकरण न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ में पहले से विचाराधीन था।

मामला पुनः न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की पीठ को लौटाया गया। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने यह कहते हुए खुद को अलग कर लिया कि वे पहले ही मंडल की अंतरिम सुरक्षा याचिका पर अपना अंतिम आदेश दे चुके हैं।

संपत्ति जब्ती और जाँच की स्थिति

पुलिस तुलु मंडल की ₹220 करोड़ की संपत्ति पहले ही जब्त कर चुकी है। जाँच अधिकारियों का मानना है कि यह राशि उनकी कुल संपत्ति का एक छोटा हिस्सा मात्र हो सकती है। ₹220 करोड़ नकद और सोने के अतिरिक्त, जाँचकर्ताओं को कथित तौर पर लगभग 400 बीघा (करीब 125 एकड़) भूमि की जानकारी मिली है, जिस पर मंडल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष स्वामित्व बताया जाता है।

कर चोरी का कथित नेटवर्क

जाँच टीम को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान पत्थर खदान मालिकों द्वारा राज्य करों की चोरी के लिए कथित तौर पर नकली कार्बन प्रतियों के इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी मिली है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार के कुछ अधिकारी, जिन पर इस कर चोरी प्रक्रिया में सहयोगी होने का आरोप है, वे भी जाँचकर्ताओं की नज़र में हैं।

इंटरपोल नोटिस और वारंट

बीरभूम जिला न्यायालय द्वारा पहले से जारी गिरफ्तारी वारंट के अलावा तुलु मंडल के विरुद्ध इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया है। यह इस बात का संकेत है कि जाँच एजेंसियाँ उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खोज रही हैं।

आगे की दिशा

अब मुख्य न्यायाधीश घुगे का कार्यालय यह तय करेगा कि इस मामले को कौन-सी नई पीठ सुनेगी। इस प्रकरण में न्यायिक पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया से साफ है कि तुलु मंडल से जुड़ा कानूनी संघर्ष अभी लंबा खिंचने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु इससे तुलु मंडल जैसे फरार आरोपियों के मामलों में न्यायिक सुनवाई की गति पर सवाल उठता है — जहाँ हर पुनर्नियुक्ति अनिवार्यतः और समय जोड़ती है। ₹220 करोड़ की जब्त संपत्ति प्रभावशाली आँकड़ा है, लेकिन जाँचकर्ताओं की यह स्वीकृति कि यह कुल संपत्ति का एक छोटा हिस्सा भर है, पत्थर खदान क्षेत्र में कथित अवैध धन की गहराई को रेखांकित करती है। नकली कार्बन प्रतियों से कर चोरी और सरकारी अधिकारियों की कथित संलिप्तता — यदि सिद्ध हुई — तो यह मामला महज एक भगोड़े खदान मालिक की कहानी नहीं, बल्कि राज्य तंत्र के भीतर संस्थागत मिलीभगत की परीक्षा बन जाएगा।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलु मंडल कौन हैं और उनके खिलाफ क्या आरोप हैं?
तुलु मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के पत्थर खदान मालिक हैं, जो फिलहाल फरार हैं। उन पर नकली कार्बन प्रतियों के जरिए राज्य करों की चोरी का आरोप है और बीरभूम जिला न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी वारंट के साथ-साथ इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने मामले से खुद को क्यों अलग किया?
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने इसलिए खुद को अलग किया क्योंकि वे पहले ही तुलु मंडल की अंतरिम सुरक्षा याचिका पर अपना अंतिम आदेश दे चुके थे। ऐसे में उसी मामले की आगे की सुनवाई जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से उचित नहीं होता।
अब मामले की सुनवाई कौन करेगा?
मामला अब कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे के कार्यालय को भेजा गया है। वे यह तय करेंगे कि इस प्रकरण को किस नई पीठ को सौंपा जाएगा।
तुलु मंडल की कितनी संपत्ति जब्त हुई है?
पुलिस अब तक मंडल की ₹220 करोड़ की संपत्ति — नकद और सोना — जब्त कर चुकी है। इसके अलावा, जाँचकर्ताओं को लगभग 400 बीघा (करीब 125 एकड़) भूमि की भी जानकारी मिली है, जिस पर मंडल का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष स्वामित्व बताया जाता है।
इस मामले में TMC सरकार के अधिकारियों की क्या भूमिका बताई जा रही है?
जाँच टीम को कथित तौर पर जानकारी मिली है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पिछली सरकार के दौरान पत्थर खदान मालिकों ने नकली कार्बन प्रतियों से करोड़ों रुपए के राज्य करों की चोरी की। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार के कुछ अधिकारी इस प्रक्रिया में कथित भागीदार के रूप में जाँचकर्ताओं की नज़र में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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