कोलकाता हाई कोर्ट: जज भट्टाचार्य ने अभिषेक बनर्जी की TMC छापेमारी याचिका से खुद को किया अलग
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य ने सोमवार, 15 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी की उस याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया, जिसमें पश्चिम बंगाल की आपराधिक जाँच विभाग (CID) द्वारा TMC के दो कार्यालयों पर की गई छापेमारी को चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य की एकल-न्यायाधीश अवकाश पीठ ने यह निर्णय न्यायिक टकराव की आशंका को देखते हुए लिया।
छापेमारी का पृष्ठभूमि
9 जून 2026 को CID की दो टीमों ने एक साथ TMC के दो कार्यालयों पर छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब अभिषेक बनर्जी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में भाग लेने गई थीं। यह छापेमारी विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित विसंगति के मामले में की गई थी।
जिन दो कार्यालयों को निशाना बनाया गया, उनमें से एक दक्षिण कोलकाता के हरीश चटर्जी स्ट्रीट पर ममता बनर्जी के आवास के निकट स्थित था, जबकि दूसरा मध्य कोलकाता के कैमक स्ट्रीट पर अभिषेक बनर्जी का कार्यालय था।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने क्यों लिया यह निर्णय
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी ने इसी अदालत की एक अन्य एकल-न्यायाधीश पीठ के समक्ष पहले से एक अलग याचिका दायर कर रखी है, जिसमें विधायकों के हस्ताक्षर मिलान में गड़बड़ी के मामले में CID द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई है। उन्होंने कहा कि एक ही मामले से जुड़े विषयों पर दो अलग-अलग एकल-न्यायाधीश पीठों के परस्पर विरोधी फैसले न्यायिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं होंगे।
गौरतलब है कि न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने यह भी निर्देश दिया कि TMC कार्यालयों पर छापेमारी को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल-न्यायाधीश पीठ में होनी चाहिए, जहाँ अभिषेक बनर्जी की एफआईआर चुनौती वाली याचिका पहले से विचाराधीन है।
मामले का राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC और राज्य की जाँच एजेंसियों के बीच तनाव का माहौल है। विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित विसंगति का यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेताओं के कार्यालय सीधे तौर पर जाँच के दायरे में आए हैं। अभिषेक बनर्जी TMC के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे हैं।
आगे क्या होगा
अब यह याचिका न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होने की संभावना है, जहाँ संबंधित एफआईआर मामले की सुनवाई पहले से चल रही है। दोनों याचिकाओं की एकसाथ सुनवाई से मामले में कानूनी स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। न्यायिक प्रक्रिया की अगली तारीख अभी तय नहीं हुई है।