केरल हाई कोर्ट ने CMRL-ED जांच को दी हरी झंडी, BJP नेता शॉन जॉर्ज बोले — 'कानूनी व्यवस्था अखंडनीय'
सारांश
मुख्य बातें
केरल उच्च न्यायालय ने 5 जून 2026 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) से जुड़े कथित मासिक भुगतान मामले में जांच जारी रखने का अधिकार बरकरार रखा, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता शॉन जॉर्ज ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय सिद्ध करता है कि भारतीय न्यायिक प्रणाली को किसी भी दबाव में नहीं झुकाया जा सकता। अदालत की डिवीजन बेंच ने CMRL की वह अपील खारिज कर दी, जिसमें ED की जांच को चुनौती दी गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद वीना विजयन की आईटी कंपनी एक्सालॉजिक द्वारा CMRL से कथित तौर पर प्राप्त अनियमित भुगतानों से जुड़ा है। वीना विजयन केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पी. विजयन की पुत्री हैं और बेपोर से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI-M] के विधायक तथा पूर्व राज्य मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास की पत्नी हैं। गौरतलब है कि CMRL एक ऐसी कंपनी है जिसमें केरल राज्य सरकार की भी हिस्सेदारी है।
अदालत का निर्णय
डिवीजन बेंच ने न केवल CMRL की मुख्य अपील खारिज की, बल्कि कंपनी की उस याचिका को भी अस्वीकार कर दिया जिसमें सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने के लिए आदेश पर दो सप्ताह की रोक माँगी गई थी। इस प्रकार ED को जांच आगे बढ़ाने का पूर्ण अधिकार मिल गया है।
BJP का रुख और आरोप
शॉन जॉर्ज ने कहा कि जांच एजेंसी को इस मामले में नए साक्ष्य जुटाने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस नेता मैथ्यू कुझलनादन द्वारा उठाया गया मामला और उनके द्वारा संचालित मामला अपनी प्रकृति में भिन्न हैं। जॉर्ज के अनुसार, CMRL द्वारा जीएसटी भुगतान के लिए प्रस्तुत किए गए चालान फर्जी थे और उन सेवाओं से संबंधित थे जो वास्तव में प्रदान ही नहीं की गई थीं।
BJP नेता ने दावा किया कि वीना विजयन इस पूरे प्रकरण में केवल एक मध्यस्थ की भूमिका में थीं और अंतिम जिम्मेदारी किसी और की है। उन्होंने CMRL द्वारा किए गए भुगतानों को 'अनुचित लाभ' और 'भाई-भतीजावाद' के समतुल्य बताया। जॉर्ज ने यह भी कहा कि राज्य सरकार चाहे तो इस मामले में स्वयं भी प्राथमिकी दर्ज करा सकती है।
राजनीतिक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में उभरा है जब केरल में सत्तारूढ़ CPI-M के नेतृत्व वाली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार पर विपक्ष का दबाव लगातार बढ़ रहा है। आलोचकों का कहना है कि राज्य सरकार की हिस्सेदारी वाली कंपनी में कथित अनियमितताएं सुशासन पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।
आगे की राह
उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद ED अब CMRL-एक्सालॉजिक भुगतान मामले में जांच को विस्तार दे सकती है। CMRL के पास अब सर्वोच्च न्यायालय में अपील का विकल्प शेष है, हालांकि स्टे याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। इस पूरे प्रकरण का राजनीतिक असर केरल की आगामी विधानसभा राजनीति पर भी पड़ सकता है।