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वीणा विजयन को ईडी का तीसरा समन संभव, सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में जांच और तेज

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वीणा विजयन को ईडी का तीसरा समन संभव, सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में जांच और तेज

सारांश

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी वीणा विजयन से ईडी ने कोच्चि में 10 घंटे से अधिक पूछताछ की। सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले में ₹1.72 करोड़ के कथित मासिक भुगतान और 'क्विड प्रो क्वो' की जांच में एसएफआईओ के 134 दस्तावेज मिलने के बाद तीसरा समन संभव।

मुख्य बातें

वीणा विजयन से कोच्चि स्थित ईडी कार्यालय में 10 घंटे से अधिक पूछताछ की गई; तीसरा समन संभव।
सीएमआरएल ने 2017–2020 के बीच एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को कंसल्टेंसी शुल्क के नाम पर कथित तौर पर ₹1.72 करोड़ का भुगतान किया।
ईडी यह जाँच रही है कि भुगतान और एलडीएफ सरकार द्वारा सीएमआरएल को मिली रियायतों के बीच 'क्विड प्रो क्वो' था या नहीं।
केरल उच्च न्यायालय की अनुमति के बाद ईडी को एसएफआईओ चार्जशीट के 134 एनेक्सचर प्राप्त हुए।
वीणा विजयन ने कंसल्टेंसी अनुबंध को पूरी तरह वैध बताया; ईडी उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं बताई जा रही।
जांच के दौरान वीणा विजयन के एचडीएफसी बैंक लॉकर का भी निरीक्षण किया जा चुका है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीएमआरएल-एक्सालॉजिक 'मासप्पड़ी' (मासिक भुगतान) मामले में अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी वीणा विजयन से कोच्चि स्थित ईडी कार्यालय में 10 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई और सूत्रों के अनुसार उन्हें तीसरी बार भी समन भेजे जाने की संभावना है। एजेंसी यह जाँचने में जुटी है कि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) को 2017 से 2020 के बीच एलडीएफ सरकार से कोई विशेष रियायत या लाभ मिला था या नहीं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला आयकर निपटान आयोग की उन टिप्पणियों से उपजा है जिनमें कहा गया था कि सीएमआरएल ने 2017 से 2020 के बीच वीणा विजयन की आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को कंसल्टेंसी शुल्क के नाम पर ₹1.72 करोड़ का भुगतान किया, जबकि कथित तौर पर इसके बदले कोई वास्तविक आईटी सेवा नहीं ली गई। इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने जांच शुरू की थी, जिसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया।

दूसरी पूछताछ का ब्योरा

वीणा विजयन गुरुवार को दूसरी बार ईडी के सामने पेश हुईं। केरल उच्च न्यायालय द्वारा आगे की जांच को अनुमति दिए जाने के बाद उन्हें नया समन जारी किया गया था। वह सुबह करीब 9:30 बजे अपने पति एवं केरल सरकार में मंत्री पी. ए. मोहम्मद रियास के साथ कार्यालय पहुंचीं। पूछताछ में ईडी ने एक्सालॉजिक और सीएमआरएल के बीच हुए वित्तीय लेन-देन के साथ-साथ इस आरोप पर भी सवाल किए कि सीएमआरएल को उक्त अवधि में सरकार की ओर से विशेष लाभ मिले थे।

वीणा विजयन ने ईडी को बताया कि एक्सालॉजिक को मिला कंसल्टेंसी अनुबंध पूरी तरह वैध था और उसमें कोई अनियमितता नहीं थी। हालांकि, सूत्रों के अनुसार ईडी उनके इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं बताई जा रही है।

एसएफआईओ के दस्तावेज और नई कड़ियाँ

यह पूछताछ ऐसे समय में हुई जब ईडी को कोच्चि स्थित कंपनी कोर्ट से एसएफआईओ की चार्जशीट से जुड़े 134 एनेक्सचर (संलग्न दस्तावेज) प्राप्त हुए हैं। सीएमआरएल ने इन दस्तावेजों को सौंपने का विरोध किया था, परंतु अदालत ने उसकी आपत्ति खारिज कर दी। अब ईडी इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। गौरतलब है कि पहली पूछताछ के दौरान एजेंसी ने वीणा विजयन के एचडीएफसी बैंक के लॉकर का भी निरीक्षण किया था।

जांच का केंद्रीय सवाल

सूत्रों के अनुसार, ईडी यह स्थापित करने की कोशिश कर रही है कि एक्सालॉजिक को किए गए कथित मासिक भुगतान और सीएमआरएल को मिली सरकारी रियायतों के बीच कोई 'क्विड प्रो क्वो' (लेन-देन के बदले लाभ) का संबंध था या नहीं। एजेंसी को दोनों कंपनियों के बीच हुए कंसल्टेंसी समझौते की प्रामाणिकता पर भी संदेह है। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में विपक्ष इस मामले को सत्तारूढ़ एलडीएफ सरकार के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील बता रहा है।

आगे क्या होगा

सूत्रों का संकेत है कि ईडी जल्द ही वीणा विजयन को तीसरी बार पूछताछ के लिए बुला सकती है। एजेंसी अभी भी एक्सालॉजिक द्वारा दी गई कंसल्टेंसी सेवाओं का ब्योरा और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। मामले की अगली दिशा काफी हद तक एसएफआईओ के उन 134 दस्तावेजों के विश्लेषण पर निर्भर करेगी जो हाल ही में ईडी को प्राप्त हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

पारिवारिक संबंध और सरकारी रियायतों के संभावित दुरुपयोग तक जाती हैं। ईडी का एसएफआईओ के 134 दस्तावेजों पर भरोसा करना यह संकेत देता है कि एजेंसी के पास अब केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य से आगे जाने की कोशिश है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ईडी 'क्विड प्रो क्वो' की वह कड़ी साबित कर पाएगी जो सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय तक जाती हो — क्योंकि अब तक के सार्वजनिक साक्ष्य उस स्तर तक नहीं पहुंचे हैं। केरल में विपक्ष इसे राजनीतिक हथियार बना रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के रूप में पेश कर रहा है — और इस खींचतान में तथ्यात्मक जवाबदेही कहीं पीछे छूट रही है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएमआरएल-एक्सालॉजिक 'मासप्पड़ी' मामला क्या है?
यह मामला कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) द्वारा वीणा विजयन की आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को 2017–2020 के बीच कंसल्टेंसी शुल्क के नाम पर कथित तौर पर ₹1.72 करोड़ के मासिक भुगतान से जुड़ा है। आयकर निपटान आयोग ने पाया कि इस भुगतान के बदले कोई वास्तविक आईटी सेवा नहीं ली गई, जिसके बाद एसएफआईओ और फिर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
वीणा विजयन से ईडी ने क्या पूछा?
ईडी ने वीणा विजयन से एक्सालॉजिक और सीएमआरएल के बीच हुए वित्तीय लेन-देन, कंसल्टेंसी सेवाओं के दस्तावेज, और इस आरोप पर सवाल किए कि 2017–2020 के दौरान एलडीएफ सरकार ने सीएमआरएल को विशेष रियायतें दीं। एजेंसी यह जानना चाहती है कि क्या ये भुगतान किसी 'क्विड प्रो क्वो' का हिस्सा थे।
केरल उच्च न्यायालय की इस मामले में क्या भूमिका है?
केरल उच्च न्यायालय ने ईडी को आगे की जांच जारी रखने की अनुमति दी, जिसके बाद वीणा विजयन को दूसरा समन जारी किया गया। अदालत ने सीएमआरएल की उस आपत्ति को भी खारिज किया जिसमें कंपनी ने एसएफआईओ चार्जशीट के 134 संलग्न दस्तावेज ईडी को सौंपने से इनकार किया था।
एसएफआईओ के 134 दस्तावेजों का इस जांच में क्या महत्व है?
ये दस्तावेज एसएफआईओ की चार्जशीट के अनुलग्नक हैं जो कोच्चि स्थित कंपनी कोर्ट ने ईडी को उपलब्ध कराए हैं। सूत्रों के अनुसार ईडी इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सीएमआरएल और एक्सालॉजिक के बीच संभावित वित्तीय अनियमितताओं की जांच आगे बढ़ा रही है।
क्या वीणा विजयन को तीसरी बार ईडी के सामने पेश होना होगा?
सूत्रों के अनुसार ईडी वीणा विजयन को जल्द ही तीसरी बार पूछताछ के लिए बुला सकती है, क्योंकि एजेंसी उनके स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं बताई जा रही। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तीसरे समन की पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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